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26/11 मुंबई हमले के 12 साल बाद तटीय सुरक्षा चाकचौबंद, लेकिन छोटी नावों की चुनौतियां अब भी बरक़रार

26/11 मुंबई हमले के 12 साल बाद तटीय सुरक्षा चाकचौबंद, लेकिन छोटी नावों की चुनौतियां अब भी बरक़रार

सैटेलाइट के जरिए रखी जाती है समुद्र पर नजर. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-PTI)

सैटेलाइट के जरिए रखी जाती है समुद्र पर नजर. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर-PTI)

26/11 Mumbai Attack: नौसेना ने गुड़गांव में इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर यानी IMAC को 2014 में तैयार किया. जोकि देश के तटीय इलाकों में लगाए गए रडारों के जरिए रियल टाइम तस्वीरों से निगरानी में जुटी है.

नई दिल्‍ली. आज से ठीक 12 साल पहले समंदर के रास्ते पाकिस्तान (Pakistan) से आए आतंकियों ने मुंबई (Mumbai) में हमला किया. ये हमला मुंबई पर तो था ही लेकिन भारतीय तटीय सुरक्षा की खामी को दुनिया के सामने ले आया. इस चूक ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली. लेकिन, उस हमले से सबक लेते हुए भारत सरकार (Indian Government) ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने भारतीय समुद्री इलाके में आने वाले जहाज और छोटी बोट पर निगरानी तेज कर दी. नौसेना ने गुड़गांव में इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर यानी IMAC को 2014 में तैयार किया. जोकि देश के तटीय इलाकों में लगाए गए रडारों के जरिए रियल टाइम तस्वीरों से निगरानी में जुटी है.

26/11 के बाद से निगरानी के लिए 38 रडार स्टेशन और 4 मोबाइल रडार स्टेशन लगाए गए हैं. जो कि साल भर चौबीस घंटे निगरानी में लगे हैं. और जैसे ही कोई भी ऐसा जहाज या फिर नाव जो कि भारतीय समुद्री इलाके या फिर तटीय इलाकों में नजर आती है जिसे उस इलाके में नहीं होना चाहिए तो तुरंत कार्रवाई की जाती है. तकनीक का इस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है कि महज़ कंप्यूटर के एक क्लिक भर से सारी कार्रवाई को अंजाम दिया जा सकता है.

20 मीटर से छोटी नाव अब भी चुनौती
सरकारी नीति के तहत 20 मीटर से बड़ी मछली मारने वाली बोट पर ट्रांसपॉडर लगाना अनिवार्य और एक आंकड़े के मुताबिक़ देश में 2.9 लाख के क़रीब मछली पकड़ने वाली नावें हैं. जिनमें से 50 से 60 फ़ीसदी नावें एसी हैं जोकि 20 मीटर से छोटी हैं. यानी की देश की कुल मछली पकड़ने वाली नावों में से आधे से ज़्यादा में ट्रांसपॉडर नहीं लगे है और जिन्हे ट्रैक करना बहुत मुश्किल है. लेकिन सैटेलाइट के जरिए उन पर नजर रखी जाती है. साथ ही मत्स्य पालन विभाग, पोर्ट अथॉरिटी और कोस्टल पुलिस के साथ-साथ कोस्टगार्ड हमेशा इस तरह की नावों पर नजर रखते हैं.

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26/11 की घटना के बाद से तटीय सुरक्षा के लिए जो क़दम उठाए गए हैं उसकी जानकारी पाकिस्तान को भी है और उसे पता है कि हर एक कोशिश पर भारत की नजर है. वह समंदर के रास्ते कोई हिमाकत करने से परहेज कर रहा है. मुस्तैदी का बड़ा उदाहरण है मंगलवार को कोस्ट गार्ड की तरफ से किए गए एक ऑपरेशन में जहां श्रीलंका की नाव से 100 किलो हेरोइन पकड़ी गई थी. यह बोट पाकिस्‍तान के कराची से हथियार और ड्रग की तस्करी कर रही थी. इस बोट पर कार्रवाई एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी को मिली जानकारी के आधार पर की गई थी.

तटीय राज्य भी अपने हिसाब से अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. पिछले बारह साल में 350 के क़रीब कोस्टल पुलिस स्टेशन खोले गए हैं साथ ही कैमरा और सर्वेलांस सिस्टम को लगाने का काम अपने अंतिम चरण पर है. IMAC अभी तक राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के साथ इंफॉर्मेशन को ही साझा करता रहा है लेकिन अब एक ऐसे मेरिटाइम डोमेन अवेयरनेस सेंटर का प्रस्ताव भी है जिसमें देश की सभी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी, राज्य की एजेंसियों को एक जुट कर काम करेंगी.

Tags: 26/11 attack, 26/11 mumbai attack, Pakistan

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