दमघोंटू प्रदूषण: 2018 की तुलना में पंजाब में इस साल 5 गुना ज्यादा पराई जलाई गई

इस साल पराली जलाने की घटनाएं बहुत तेजी के साथ बढ़ी हैं. (फाइल फोटो)
इस साल पराली जलाने की घटनाएं बहुत तेजी के साथ बढ़ी हैं. (फाइल फोटो)

पंजाब के सुदूर संवेदन केंद्र (Punjab Remote Sensing Centre) के एसीएम डिविजन के हेड अनिल सूद ने चौंकाने वाली जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि इस साल पराली जलाने (stubble burning) के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 11:12 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की हवा (Air Quality) मंगलवार को फिर खराब हालत में पहुंच गई. सिर्फ राजधानी ही नहीं आस-पास के नोएडा और गाजियाबाद में भी हवा का स्तर खराब बताया गया. इस बीच पंजाब के सुदूर संवेदन केंद्र  (Punjab Remote Sensing Centre) के एसीएम डिविजन के हेड अनिल सूद ने चौंकाने वाली जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि इस साल पराली जलाने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. बीते साल 21 सितंबर से लेकर 12 अक्टूबर तक पराली जलाने की 755 घटनाएं सामने आई थीं. जबकि इसी अवधि में 2018 में ये संख्या 510 थी. जबकि इस साल अब तक 2873 घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में हवा की क्वालिटी लगातार खराब होती जा रही है. जबकि पिछले एक हफ्ते की अगर बात की जाए तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब की श्रेणी में आ गई है. इतना ही नहीं दिल्ली से सटे नोएडा में भी हवा मध्यम से बेहद खराब स्थिति में आ गई है. मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी 239 यानी की खराब श्रेणी में रहा.


दिल्ली एमसीडी की तैयारी
दिल्ली के तीनों निगमों का दावा है कि वो प्रदूषण से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. दिल्ली के दक्षिणी नगर निगम ने तो इस बार 10 एंटी स्मॉग गनों का इस्तेमाल करने का फैसला भी लिया है जिससे की 10 लोकेशन में प्रदूषण से राहत मिलेगी. इसके अलावा वॉटर स्प्रिंकलरों से पानी का छिड़काव. कूड़ा न जलाया जाए इसके लिए नाइट पेट्रोलिंग और कूड़ा जलाने वालों के चालान आदि की तैयारियां कर रखी हैं.



हर साल सर्दियों में होता है ऐसा हाल
गौरतलब है कि बीते कुछ सालों से दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की शुरुआत में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में पहुंच जाती है. विशेषकर दीवाली के बाद से अगले कुछ दिनों तक हालात बेहद खराब होते हैं. एक तरफ पराली जाने से पैदा हुआ धुंआ होता है और फिर दीवाली के पटाखों से पैदा हुए प्रदूषण के मिश्रण की वजह से लोगों को बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
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