देश में 30 ग्रुप कर रहे कोरोना वैक्सीन पर काम, फरवरी 2021 तक मिलेगी गुड न्यूज

देश में 30 ग्रुप कर रहे कोरोना वैक्सीन पर काम, फरवरी 2021 तक मिलेगी गुड न्यूज
लॉकडाउन में ढील के बाद से अस्‍पतालों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से रोज सामने वाले नए मामलों की संख्‍या बढ़ती जा रही है.

कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) बनाने में अमूमन 200-300 मिलियन डॉलर तक खर्च हो जाते हैं. अब वैक्सीन को साल भर में बनाने की कोशिश है तो इसमें 2-3 अरब डॉलर तक का खर्च आ सकता है.

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नई दिल्ली. चीन (China) से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस (Coronavirus) ने अब तक 5,790,090 लोग को संक्रमित किया है, जबकि 357,432 लोगों की मौत हो चुकी है. दुनिया का हर देश कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) को बनाने में लगा हुआ, जिससे इस महामारी को तुरंत रोका जा सके. भारत में 30 वैज्ञानिक समूह के साथ साथ 6 स्थानीय वैक्सीन कंपनियां इस काम में लगी हुई हैं. देश और दुनिया में फैले कोरोना महामारी से निपटने के लिए 10 दवाओं की एक बार फिर टेस्टिंग की जा रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के विजय राघवन ने कहा है कि देश में वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन को तैयार करने में जुटे हुए हैं, लेकिन इसे विकसित करने में समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि इस दौरान हमें कई महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देने की जरूरत है. जैसे कि मास्क का इस्तेमाल, व्यक्तिगत साफ सफाई की आदत, शरीरिक दूरी बनाने, संक्रमित लोगों का पता लगाने और लोगों में टेस्टिंग पर ध्यान देने की जरूरत है.

डॉ. राघवन ने जानकारी देने हुए कहा कि भारत में इस समय 8 वैक्सीन पर काम चल रहा है. इसमें भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, कैडिला और बायोलॉजिकल ई़ प्रमुख हैं. इसके साथ ही भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत प्रयाेगशालाएं,जैव प्रौद्याेगिकी विभाग,वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) में भी कोरोना को खत्म करने के लिए छह वैक्सीनों पर काम चल रहा है. उन्होंने बताया कि दो के नतीजे काफी सकारात्मक सामने आए हैं. जल्द ही अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं.



डॉ. राघवन ने कहा वैक्सीन बनाए जाने के बाद इसे लोगों तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती है. एक साथ सभी लोगों तक वैक्सीन नहीं भेजी जा सकती है. ऐसे में प्राथमिकता वाले समूहों पर विचार किया जा रहा है. यह वैक्सीन तत्काल हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं होगी. इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान और फार्मास्यूटिकल्स को दुनिया में अपने काम से जाना जाता है.
भारत में दुनिया को कई बड़ी बीमारी की वैक्सीन उपलब्ध कराई है और इस बार भी भारत ही मानवता के लिए इस वैक्सीन को विकसित करेगा और कोरोना के खिलाफ जंग में दुनिया की मदद करेगा.

उन्होंने कहा कि किसी भी वैक्सीन को बनाने में 10 से 15 साल तक लग जाते है इसका सबसे बड़ा कारण है कि इसको बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि यह इंसानों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचाए. राघवन के अनुसार वैक्सीन बनाने में अमूमन 200-300 मिलियन डॉलर तक खर्च हो जाते हैं. अब वैक्सीन को साल भर में बनाने की कोशिश है तो इसमें 2-3 अरब डॉलर तक का खर्च आ सकता है.

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फरवरी 2021 तक कोरोना वैक्सीन आएगी
प्रोफेसर के विजय राघवन के मुताबिक कुछ कंपनियां अक्टूबर तक वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल पूरा कर लेंग जबकि कुछ के बारे में हम कह सकते हैं कि वह फरवरी 2021 तक वैक्सील बनाकर तैयार कर सकती हैं. वैक्सीन बनाने में कुछ स्टार्टअप कैडमिक्स और विदेशी कंपनियां भी लगी हुई हैं. हालांकि, उन्होंने एक बात साफ की कि कोरोना की वैक्सीन में पहली-दूसरी कहना कोई खास मायने नहीं रखना. उन्होंने कहा कि सभी कंपनियां पूरी मेहनत के साथ काम कर रही हैं और बहुत जल्द हम कोरोना की जंग जीतेंगे.

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