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महेश कॉपरेटिव बैंक में 300 करोड़ का घोटाला, टॉप मैनेजमेंट के खिलाफ एफआईआर

महेश कॉपरेटिव बैंक के पूर्व निदेशक अशोक गिलडा बताते हैं कि गड़बड़ियों को छिपाने के लिए नए लोगों को प्रबंधकों में शामिल होने नहीं दिया जाता है. फाइल फोटो

महेश कॉपरेटिव बैंक के पूर्व निदेशक अशोक गिलडा बताते हैं कि गड़बड़ियों को छिपाने के लिए नए लोगों को प्रबंधकों में शामिल होने नहीं दिया जाता है. फाइल फोटो

Mahesh Cooperative Bank Scam: नए सदस्यों को एक साल तक मतदान का अधिकार नहीं होता है, लेकिन बैंक के नियमों के खिलाफ जाकर नए लोगों को वोटिंग राइट्स दिए गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 15, 2021, 8:12 PM IST
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संजय तिवारी

हैदराबाद. महाराष्ट्र में पीएमसी बैंक घोटाले के बाद तेलंगाना में कॉपरेटिव बैंक फ्रॉड का नया मामला सामने आया है. 4500 करोड़ की पूंजी वाले आंध्र प्रदेश महेश कॉपरेटिव अर्बन बैंक में 300 करोड़ से ज्यादा की धांधली और गोल्ड लोन के नाम पर फर्जी सदस्य बनाकर कॉपरेटिव बैंक चुनाव को प्रभावित करने को लेकर पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की हैं. दोनों मामलों में महेश कॉपरेटिव अर्बन बैंक के चेयरमैन रमेश कुमार बंग, वाइस चेयरमैन पुरुषोत्तम मंधाना, एमडी और सीईओ उमेश चंद असावा को आरोपी बनाया गया है. इसके अलावा कॉपरेटिव सोसाइटी की डिप्टी रजिस्ट्रार ईस्टर रानी जॉन के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है.

आरोप है कि महेश कॉपरेटिव बैंक को टॉप मैनेजमेंट ने मिलीभगत से वक्फ प्रॉपर्टी को गिरवी रखकर लोन आवंटित कर दिए, जबकि वक्फ प्रॉपर्टी को बिना वक्फ बोर्ड की इजाजत के गिरवी नहीं रखा जा सकता. इसके अलावा विवादित जमीन के कागजात को आधार बनाकर कर्ज का बंदरबांट किया गया. इससे बैंक को करीब 300 करोड़ का चूना लगा है. इसके अलावा कॉपरेटिव बैंक की 43वीं और 44वीं वार्षिक रिपोर्ट में जिन लोगों का नाम कर्ज के लाभार्थियों के रूप में दर्ज है, उनमें से कई बैंक प्रबंधकों के करीबी और रिश्तेदार बताए जाते हैं. ऐसे लोगों को 20 करोड़ से ज्यादा के लोन आवंटित कर दिए गए हैं, जबकि कानून के मुताबिक बोर्ड के सदस्यों के रिश्तेदारों को इस तरह का लाभ नहीं दिया जा सकता.



'कहीं धराशायी ना हो जाए बैंक'
महेश कॉपरेटिव अर्बन बैंक शेयर होल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश मोदानी के मुताबिक बैंक में हजारों छोटे निवेशकों ने अपनी गाढ़े पसीने की कमाई और जिंदगी भर की इकट्ठा की हुई पूंजी जमा की है, लेकिन जिस तरह से बैंक के प्रबंधक गड़बड़ियां कर रहे हैं, उससे डर लगने लगा है कि कहीं महेश कॉपरेटिव बैंक भी पंजाब-महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक की तरह धराशाई न हो जाए. अगर ऐसा हुआ तो हजारों लोग बर्बाद हो जाएंगे.

बैंक के चुनावों में धांधली
महेश कॉपरेटिव बैंक के पूर्व निदेशक अशोक गिलडा बताते हैं कि गड़बड़ियों को छिपाने के लिए नए लोगों को प्रबंधकों में शामिल होने नहीं दिया जाता है. कॉपरेटिव बैंक के हाल ही में हुए चुनाव से ठीक पहले 1800 लोगों को गोल्ड लोन के नाम पर नया सदस्य बनाया गया. यह काम चुनाव घोषित होने के ठीक 15-20 दिन पहले किया गया. नए सदस्यों को एक साल तक मतदान का अधिकार नहीं होता है, लेकिन बैंक के नियमों के खिलाफ जाकर नए लोगों को वोटिंग राइट्स दिए गए. इस तरह से प्रबंधक फिर से काबिज होने में सफल हो गए हैं.

अदालत के आदेश पर दर्ज हुई FIR
पुलिस में दर्ज एफआईआर में एक एफआईआर कॉपरेटिव बैंक के चुनाव में हुई धांधली को लेकर है. इस एफआईआर में कॉपरेटिव सोसायटी विभाग की डिप्टी रजिस्ट्रार ईस्टर रानी जॉन को आरोपी बनाया गया है. व्हिसल ब्लोअर श्याम सुंदर बियानी का कहना है कि उन्होंने बैंक से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायत पुलिस में की थी, लेकिन बैंक प्रबंधक शक्तिशाली लोग हैं और पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की. लिहाजा उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने मजबूरी में एफआईआर दर्ज की है.

लूटा जा रहा जनता का पैसा
शेयर होल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश बताते हैं कि निष्पक्ष जांच होने पर घोटाले का आंकड़ा काफी बड़ा निकलकर सामने आ सकता है, क्योंकि बैंक की परिसंपत्तियों का बुरी तरह से दोहन हुआ है.

बैंक की 44वीं वार्षिक रिपोर्ट में अन्य खर्चों के नाम पर 6.5 करोड़ रुपये दर्ज हैं. यह पैसा निजी इस्तेमाल में उड़ाया गया और उसके फर्जी बिल अकाउंट्स में दर्ज कर दिए गए. जनता का पैसा दोनों हाथों से लुटाया जा रहा है.
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