लाखों की नकदी और जेवरात की लूट का 33 साल पुराना मामला अब सुलझा, तीन चोर गिरफ्तार

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा के नूंह (Nuh Haryana) में 33 साल पहले लाखों की नकदी और जेवरात की लूट हुई थी. 33 साल बाद यूपी पुलिस (UP Police) की मदद से नूह का यह मामला सुलझा लिया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 9:21 AM IST
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बुलंदशहर/नूंह. हरियाणा स्थित नूंह (Nuh) के एक व्यवसायी की हत्या के तैंतीस साल बाद स्थानीय पुलिस ने इस मामले में आरोपी तीन चोरों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने इन सभी को उत्तर प्रदेश स्थित बुलंदशहर (Bulandshar) से गिरफ्तार किया.साल 1987 में 30 अगस्त को 20 लुटेरों के एक समूह ने नूंह के पुन्हाना निवासी स्वामी राम नाम के एक व्यापारी के घर में धावा बोल दिया था. पेशे से महाजन स्वामी राम उस रात अपने परिवार के सदस्यों के साथ सो रहा था, जब गिरोह छत के रास्ते उसके घर में घुसा और परिवार के सभी सदस्यों को बंधक बना लिया.

पुलिस ने कहा था कि डकैतों ने परिवार के सदस्यों के आभूषण और घर में रखी सारी नकदी लूट ली और उन्हें धमकी दी कि वे पुलिस को घटना की सूचना न दें. जब परिवार के सदस्यों में से एक 32 वर्षीय जगदीश चंद्र ने शोर मचाने की कोशिश की, तो लुटेरों ने उन्हें गोली मार दी थी. पुलिस ने कहा कि जब वे लूटपाट कर भाग रहे थे तो गोलियों की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने घर को घेर लिया और तीन अपराधियों को पकड़ लिया, जबकि अन्य ट्रैक्टर में सवार होकर भागने में सफल रहे.

IPC की धारा 395 (डकैती के लिए सजा), 396 (हत्या के साथ डकैती) और 397 (डकैती या  हत्या करने का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इन सभी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी 30 अगस्त 1987 को पुन्हाना पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था.



नूंह के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरेंद्र बिजारणिया ने कहा कि 22 फरवरी, 2020 को पदभार संभालने के बाद, उन्होंने घोषित अपराधियों और अनसॉल्व केस की  लिस्ट के आधार जांच शुरू की, जिसके बाद उन्हें इस 33 साल पुराने मामले का  पता चला. एसपी ने कहा कि 'यह उस अवधि की सबसे बड़ी डकैती थी और गिरोह के सदस्यों ने लगभग 200 किलोग्राम चांदी, सोना और  50 लाख से अधिक नकदी  लूट लिया था. पीड़ित परिवार उस क्षेत्र का एकमात्र परिवार था जो महाजनी करता था. वह व्यवसायी प्रसिद्ध था और पड़ोसी राज्य यूपी और राजस्थान के लोग भी उससे उधार लेते थे.
पुलिस ने बताया कि मौके से पकड़े गए तीनों अपराधियों को पुलिस के हवाले कर दिया गया और वर्तमान में भोंडसी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. बिजारणिया ने कहा कि मामले की फाइलों को देखने के बाद निरीक्षक अजीत सिंह के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई थी.  बिजरनिया ने कहा, 'इस मामले में शायद ही कोई लीड था, लेकिन सात महीने की कड़ी मेहनत से मामला सुलझ गया.' उन्होंने कहा कि लगभग 20 अपराधियों ने व्यापारी के घर पर हमला किया था. हालांकि पुलिस रिकॉर्ड में गिरोह में केवल 16 लोगों के होने की बात कही गई है.

जेल में बंद लोगों से की पूछताछ
एसपी ने बताया कि 'हमने जांच में शामिल लोगों और जेल में बंद लोगों से पूछताछ की. बुलंदशहर में एक टीम भेजी गई और उन्हें एक गुप्त सूचना मिली कि तीन या अधिक लोग, जो डकैती में शामिल थे और कथित मास्टरमाइंड थे वे सभी अपने-अपने गाँव में रह रहे हैं और अब इलाके के जाने-माने किसान हैं.'

संदिग्धों की पहचान सुतारी गांव के 79 वर्षीय यासीन , सबदलपुर के 68 वर्षीय मंजूर अहमद और बुलंदशहर जिले के कहिरा गांव के 70 वर्षीय बाबू  के रूप में हुई. उनसे अलग-अलग पूछताछ की गई और उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि 10 अपराधियों की पिछले कुछ वर्षों में एक प्राकृतिक मौत हो गई थी और. उनके परिवार के सदस्य उनकी कथित आपराधिक पृष्ठभूमि से अनजान थे. पुलिस ने कहा तीन संदिग्धों ने अपने संबंधित गांवों में जमीन खरीदी थी और खेती शुरू कर दी थी.

बिजारणिया ने सोमवार को कहा कि 'को अदालत में पेश करने के बाद दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया. कहा कि वे पिछले 10 वर्षों से एक दूसरे के संपर्क में नहीं थे और बिना किसी डर के रह रहे थे, यह सोचकर कि पुलिस ने मामला बंद कर दिया है 6 जनवरी, 1988 को, उनमें से 13 को अदालत ने घोषित अपराधी कहा था हालांकि, कई प्रयासों के बावजूद पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला और मामला लंबित रहा.'

यह गिरोह कथित रूप से व्यवसायियों के परिवारों को निशाना बनाता था और उनसे नकदी और आभूषण लूटता था. वे डकैतियों को अंजाम देने के लिए ट्रैक्टर से चलते थे. पुलिस ने कहा कि उन्होंने लूटे गए पैसे से जमीन खरीदी.

'30 साल तक हमने किया संघर्ष'
स्वामी राम के परिवार के सदस्य 53 वर्षीय नरेश सिंगला ने कहा कि जब वह घटना हुई थी तब वह 20 साल का थे. उन्होंने कहा कि 'उस घटना ने हमारे जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया क्योंकि परिवार के पास जो भी पैसा था उसे लूट लिया गया था. हमें उन ग्रामीणों को पैसा वापस करना था जिन्होंने अपने सोने को गिरवी रखकर हमसे पैसे लिए थे. हमारा परिवार इस क्षेत्र के सबसे अमीर लोगों में से एक था और हमें अगले 30 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा.' सिंगला ने कहा कि 'उस समय क्षेत्र की सबसे बड़ी डकैती थी, लेकिन वे अभी भी इस बात से अनजान हैं कि असली मास्टरमाइंड कौन था.'

इन गिरफ्तारियों से पुलिस को अब हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अधिक अनसुलझे आपराधिक मामलों को सुलझाने की उम्मीद है. बिजारणिया ने कहा कि 'हत्या, डकैती और लूट के 100 से अधिक ऐसे मामले हैं जिन्हें सॉल्व करना बाकी है और टीम अब उन पर काम कर रही है.'
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