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सड़क चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट पेड़ काटने के नियम तय कर सकता है

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस कानून को चुनौती दी है.

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उस कानून को चुनौती दी है.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर राष्ट्रीय राजमार्ग 112 पर पेड़ों की कटाई की जानी है. कोर्ट ने कहा कि पेड़ों की लागत को भी परियोजन ...अधिक पढ़ें

पर्यावरण को संतुलित करने के लिए पेड़ों की महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. देश के लिए दुर्भाग्य वाली बात है कि जिनपर पेड़ों को बचाने की जिम्मेदारी है, वही काटने में मदद कर रहे हैं. पेड़ों की महत्ता को हम इस बात से समझ सकते है कि एक व्यक्ति जीवित रहने के लिए एक दिन मे लगभग पांच सौ लीटर शुद्ध ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है, क्योंकि वायु में आक्सीजन की मात्रा लगभग 20% होती है. परंन्तु सांस छोड़ते समय 15% ऑक्सीजन ही बाहर आती है, यानि 5% ऑक्सीजन का हम उपयोग कर लेते हैं. इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं कि पेड़ हमारे जीवन में कितने उपयोगी हैं. सामान्य पेड़ एक दिन मे 230 लीटर ऑक्सीजन देता है.

अब हम समझ सकते हैं कि हमें धरती पर कितने अधिक पेड़ों की जरूरत है. आज के दौर में मानव विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई कर इमारतें व उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं. इनका महत्त्व तबतक कुछ भी नहीं है जबतक पर्यावरण में संतुलन व वायु की गुणवत्ता में कोई कमी ना हो और मनुष्य को जीने के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मूलभूत संसाधन मिलते रहें. पेड़ों से हम लोगों को दवाओं के लिए जड़ी-बूटियां, शहद, लकड़ी, पौष्टिक फल, कागज आदि मिलते हैं. पेड़ों के सभी आयाम मनुष्य के लिए जरूरी हैं. पेड़ मिट्‌टी के कटाव को रोकते हैं, इसकी जड़ें मिट्टी को बांध कर रखती हैं. ये पीने के पानी यानि भूजल के स्तर को बढ़ाने में सहायता करते हैं. पेड़ तापमान को नियंत्रित करने में भी सहायक होते हैं, क्योंकि यह पाया गया है कि जिन स्थानों पर अधिक पेड़ होते हैं, वहां तापमान 3 से 4 डिग्री कम होता है. इससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या से निपटने में सहायता मिलती है.

हाल में पर्यावरण से जुड़ा एक मामला संज्ञान में आया. पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर राष्ट्रीय राजमार्ग 112 को चौड़ा करने और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण करने के लिए 350 से अधिक पेड़ों को काटे जाने का मामला है. पूरा पर्यावरण हर किसी का है. आप पर्यावरण को खत्म नहीं कर सकते है. पश्चिम बंगाल की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुुब्रमण्यम कि पीठ ने सुनवाई करते हुए बुधवार को इस नियम पर हैरानी जताई 100 किलोमीटर तक की सड़क के लिए पर्यावरण के असर के आंकलन की जरूरत नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उन चौड़ीकरण परियोजना के लिए नियम बनाने का प्रयास करेगी, जिसमें पेड़ों को काटे जाने की आवश्यकता पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक समिति ने यह उल्लेख किया कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार 100 किलोमीटर से कम लंबी सड़क परियोजना के लिए किसी भी सरकारी एंजेसी से ईआईए प्राप्त करने की जरूरत नहीं है. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमें यह नियम दिखाइए जो यह कहता है ईआईए क्यों नहीं जरूरी है. यह तर्कसंगत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा पेड़ों के सही मूल्यांकन को उचित ढंग से बनाना चाहिए और उनकी लागत को परियोजना की लागत से जोड़ा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष समिति ने पेड़ों से मूल्यांकन संबंधित एक रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है, जिसके मुताबिक एक पेड़ का मूल्य एक साल में 74,500 रुपए हो सकता है. पेड़ जितना पुराना होता है, उसके मूल्य उतनी ही बढ़ोतरी हो जाती है.

ऐसा पहली बार हुआ है, जब पेड़ों का मूल्यांकन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक 100 साल पुराने एक हैरिटेज वृक्ष की कीमत 1 करोड़ रुपए से अधिक हो जाती है। इस मूल्यांकन को आसान शब्दों मे समझा जाए तो यदि पेड़ की कीमत 74,500 रुपये है तो इसमें आक्सीजन की कीमत 45,000 रुपए है जबकि जैविक खाद की कीमत 20,000 रुपए है. पेड़ों की कीमत उसके द्वारा छोड़ने जाने वाले ऑक्सीजन की लागत और अन्य लाभों पर आधारित है. पीठ ने कहा कि वह पेड़ काटने की जरूरत का चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं के लिए एक नियम तय करने पर विचार करेगी, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो.

Tags: Indian railway, Supreme Court

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