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योर मनी: कैसे करें रिटायरमेंट की प्लानिंग

योर मनी: कैसे करें रिटायरमेंट की प्लानिंग

बजट 2015 में, रिटायरमेंट प्लानिंग पर काफी जोर दिया गया। एनपीएस जैसे रिटायरमेंट इंस्ट्रूमेंट को आकर्षक बनाने के लिए कुछ एहम बदलाव भी किए गए।

बजट 2015 में, रिटायरमेंट प्लानिंग पर काफी जोर दिया गया। एनपीएस जैसे रिटायरमेंट इंस्ट्रूमेंट को आकर्षक बनाने के लिए कुछ एहम बदलाव भी किए गए।

बजट 2015 में, रिटायरमेंट प्लानिंग पर काफी जोर दिया गया। एनपीएस जैसे रिटायरमेंट इंस्ट्रूमेंट को आकर्षक बनाने के लिए कुछ एहम बदलाव भी किए गए।

    नई दिल्ली। बजट 2015 में, रिटायरमेंट प्लानिंग पर काफी जोर दिया गया। एनपीएस जैसे रिटायरमेंट इंस्ट्रूमेंट को आकर्षक बनाने के लिए कुछ एहम बदलाव भी किए गए। लेकिन इसके एलावा भी बाजार में कई तरह के रिटारयमेंट इंस्ट्रूमेंट के विकल्प मौजूद हैं। तो अब कैसी हो आपकी रिटारमेंट की प्लानिंग इसी पर चर्चा के लिए हमारे साथ हैं रूंगटा सिक्योरिटीज के चीफ फाइनेंशियल प्लानर हर्षवर्धन रूंगटा।

    हर्षवर्धन रूंगटा ने बताया कि रिटायरमेंट प्रोडक्ट के प्रोसेस 3 स्टेज में पूरे होते हैं। इनमें से पहला स्टेज होता है एक्युमुलेशन पीरियड जो पैसे जमा करने की अवधि होती है। दूसरा स्टेज होता है, वेस्टिंग डेट जो रिटायरमेंट की तारीख होती है। तीसरा स्टेज होता है डिस्ट्रीब्यूशन पीरियड जो रिटायरमेंट के बाद की अवधि होती है। निवेश से रेगुलर इनकम डिस्ट्रीब्यूशन पीरियड में होती है।

    हर्षवर्धन रूंगटा के मुताबिक पेंशन पॉलिसी या एनपीएस के स्ट्रक्चर में अंतर नहीं होता। रिटायरमेंट प्रोडक्ट में वेस्टिंग डेट पर जमा रकम में से कुछ रकम एकमुश्त निकालने की सुविधा होती है। बची रकम से एन्युटी खरीदने की जरूरत होती है। हर्षवर्धन रूंगटा ने बताया कि लाइफ इंश्योरेंस पेंशन पॉलिसी में 1/3 रकम निकालने का विकल्प होता है। वहीं एनपीएस में 60 साल की उम्र में 60 फीसदी रकम निकालने का विकल्प होता। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट प्रोडक्ट में इक्विटी में अधिकतम निवेश 40 फीसदी तक ही होता है।

    हर्षवर्धन रूंगटा ने बताया कि म्युचुअस फंड के रिटायरमेंट प्लानमें 5 साल के बाद पूरी रकम निकालने की सुविधा होती है। इनमें पेंशन पॉलिसी और एनपीएस जैसी बंदिश नहीं होती। हां, इनमें 5 साल के पहले रकम निकालने पर एक्जिट लोड लागू होता है।

    हर्षवर्धन रूंगटा ने कहा कि रिटायरमेंट प्लान जितनी जल्दी शुरुआत करें, उतना ही अच्छा होता है। इससे हमें पावर ऑफ कंपाउंडिंग का बेहतर फायदा मिलता है और रिटायरमेंट के वक्त एक बड़ा फंड जमा हो जाता है।

    Tags: Budget 2015, New Delhi

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