एक साल में अनाथ हो गए 3621 मासूम, 30 हजार से ज्यादा बच्चों को मदद की दरकार: NCPCR

कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मार्च 2020 से प्रभावित बच्चों का डेटा अपलोड करने के लिए कहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मार्च 2020 से प्रभावित बच्चों का डेटा अपलोड करने के लिए कहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Coronavirus Impact: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को दिए हलफनामे में आयोग ने बताया कि देश में 3 हजार 621 बच्चे अनाथ हो गए थे, जबकि 26 हजार 176 बच्चों ने अपने किसी एक पालक को खो दिया. इस दौरान ऐसे बच्चों की संख्या 274 रही, जिन्हें उनके करीबियों ने छोड़ दिया था.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) ने महज एक साल में ही लाखों घर उजाड़ दिए. राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (NCPCR) के आंकड़े बताते हैं कि बीते साल 1 अप्रैल से लेकर इस साल 5 जून तक देश में तीन हजार से ज्यादा बच्चे अनाथ हुए. ऐसे बच्चों की संख्या 26 हजार से ज्यादा है, जिन्होंने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया. आयोग ने बताया है कि 30 हजार से ज्यादा बच्चों को देखभाल की जरूरत है.

आयोग ने अदालत से अपील की है कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आदेश दिए जाएं कि बच्चों से जुड़ी गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक ना करें. इससे बच्चों के साथ तस्करी, उत्पीड़न जैसी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि, आयोग ने यह साफ किया है कि एफिडेविट में दर्ज आंकड़ों में पैरेंट्स की मौत के कारण कोविड-19 के आलावा अन्य भी हो सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में आयोग ने बताया कि देश में 3 हजार 621 बच्चे अनाथ हो गए. जबकि, 26 हजार 176 बच्चों ने अपने किसी एक पालक को खो दिया. इस दौरान ऐसे बच्चों की संख्या 274 रही, जिन्हें उनके करीबियों ने छोड़ दिया था. आयोग ने अदालत को जानकारी दी थी कि 30 हजार 71 बच्चों को 'देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है.' इनमें से लड़कों की संख्या 15 हजार 620 है. वहीं, लड़कियां 14 हजार 447 हैं. इस समूह में 4 ट्रांसजेंडर हैं.

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8-13 आयुवर्ग और महाराष्ट्र में आंकड़े ज्यादा

आयोग ने जानकारी दी है कि इनमें 8-13 आयुवर्ग के बच्चों का आंकड़ा 11 हजार 815 पर है. यह किसी भी अन्य आयुवर्ग की तुलना में सबसे ज्यादा है. वहीं, 4-7 साल के 5 हजार 107 बच्चे प्रभावित हैं. महाराष्ट्र में 7 हजार 84 बच्चों को 'देखभाल और सुरक्षा की जरूरत' है. उत्तर प्रदेश में यह संख्या 3 हजार 172 है. जबकि, राजस्थान में 2 हजार 482 है. हरियाणा में 2 हजार 438, मध्य प्रदेश में 2 हजार 243 और केरल में 2 हजार 2 बच्चे प्रभावित हैं.




सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे डेटा अपलोड करने के आदेश

28 मई को बच्चों की देखरेख को लेकर शुरू हुए सुओ मोटो मामले की सुनवाई के दौरान यह डेटा अपलोड करने के लिए कहा गया था. कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मार्च 2020 से प्रभावित बच्चों का डेटा अपलोड करने के लिए कहा था. इसके तहत आयोग ने 31 मई को कोर्ट में 29 मई तक प्राप्त डेटा के अनुसार एक हलफनामा दायर किया था. इस मामले में सुधारे हुए आंकड़ों के साथ जारी यह दूसरा एफिडेविट है.

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