पाकिस्तानी सेना की मदद से 'आकाओं' के संपर्क में हैं आतंकी, भारतीय सेना ने किया पर्दाफाश

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Updated: September 9, 2019, 6:30 PM IST
पाकिस्तानी सेना की मदद से 'आकाओं' के संपर्क में हैं आतंकी, भारतीय सेना ने किया पर्दाफाश
भारतीय सेना लगातार मुस्तैदी से सीमा और उस पार की गतिविधियों पर अपनी गड़ाए हुए है. भारतीय सेना की इसी सतर्कता के चलते पाकिस्तानी सेना की साज़िशों के पोल लगातार खुल रही है.

भारतीय सेना (Indian Army) लगातार मुस्तैदी से सीमा और उस पार की गतिविधियों पर अपनी नजर गड़ाए हुए है. भारतीय सेना की इसी सतर्कता के चलते पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) की साज़िशों के पोल लगातार खुल रही है.

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  • Last Updated: September 9, 2019, 6:30 PM IST
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(संदीप बोल)

जम्मू-कश्मीर. भारतीय सेना (Indian Army) लगातार मुस्तैदी से सीमा और उस पार की गतिविधियों पर अपनी नजर गड़ाए हुए है. भारतीय सेना की इसी सतर्कता के चलते पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) की साज़िशों के पोल लगातार खुल रही है. धारा 370 के हटने के बाद से अपंग हुए आतंकी आका और उनके गुर्गों तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान की सेना कई तरकीब निकाल रही है. ऐसी ही एक तरकीब का पर्दाफाश हुआ है. कश्मीर (Kashmir) के गुरेज के दूसरी ओर पीओके में एक ऐसे ही ट्रांसमिशन टावर को इंटरसेप्ट किया गया है जिसके जरिए आतंकी तंजीमे कश्मीर में अपने आतंकियों से संपर्क करने के कोशिश कर रहे हैं.

न्यूज़18 इंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक़ पीओके (PoK) के तौबत इलाके में एक VHF ट्रांसमिशन टावर को ट्रेस किया गया है इसे अल जेहाद रेडियो (Al-Jehad Radio) के नाम से भी जाना जाता है. जिसके जरिए न सिर्फ मुजाहिद तराना ब्रॉडकास्ट किया जा रहा है बल्कि इन्हीं तरानों के बीच आतंकी तंजीमे आतंकियों को पैग़ाम भेजने की कोशिश भी कर रहे हैं.

VHF ट्रांसमिशन की हक़ीक़त

VHF यानी वेरी हाई फ़्रीक्वेंसी अमूमन इस तरह की फ़्रीक्वेंसी का सेना ही इस्तेमाल करती है. पाकिस्तान की सेना आतंकियों को ये फ़्रीक्वेंसी मुहैया कराकर कश्मीर में आतंकियों को पैग़ाम भेजने का काम कर रही है. इस फ़्रीक्वेंसी को पकड़ने के लिए किसी हाईटेक रिसीवर की जरूरत नहीं पड़ती. मोटोरोला रेडियो सेट और VHF सेट से ये आसानी से रिसीव की जा सकती है. दरअसल इस तरह की फ़्रीक्वेंसी को पाकिस्तान लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है. इसके जरिए साल के आठ महीने यानी मार्च से लेकर अक्टूबर तक आतंकियों से संपर्क करने और जेहाद से जुड़ी तकरीरें ब्रॉडकास्ट की जा रही थी.

एयरस्ट्राइक के डर से कर दिया था बंद
पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा की गई बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान ने डर की वजह से अपने सभी इस तरह के स्टेशन और आतंकी लॉन्च पैड को बंद कर दिया था. ये VHF स्टेशन भी इस साल मार्च में नहीं खुला. पिछले महीने यानी अगस्त की 12 तारीख़ से इस स्टेशन को फिर से एक्टिव किया गया है जोकि सर्दियों में बर्फबारी से पहले यानी अक्टूबर में फिर से बंद हो जाएगा. इसके जरिए लगातार तकरीरे और मुजाहिद तराने ब्रॉडकास्ट किए जा रहे हैं. इस रेडियो को सिर्फ ब्रॉडकास्ट ही नहीं वन-टू-वन मोड में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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डीकोड हुए आतंकियों के कॉल साइन
लगातार मिल रहे इस तरह के ट्रांसमिशन से हरकत में आई सेना ने जब इसकी पड़ताल की तो जो चौंकाने वाले सच का खुलासा हुआ. बाक़ायदा इस स्टेशन की थर्मल इंमेजर के जरिए इसकी लोकेशन भी ट्रैक की गई है. और जो भी मुजाहिद तराना ब्रॉडकास्ट किया जा रहा था उससे नई साज़िश का पता चला. दरअसल धारा 370 हटने के बाद से कश्मीर में इंटरनेट और फ़ोन पर पाबंदी के चलते आतंकी आका अपने गुर्गों तक संदेश नहीं पहुंचा पा रहे थे तो उसके लिए नया रास्ता अपनाया. वो इस VHF ट्रांसमिशन टावर के जरिए मुजाहिद तरानों और उनके बीच से कॉल साइन कोड के जरिए आतंकियों को मैसेज भेजने की भी कोशिश की जा रही है. ज़्यादातर कश्मीर में मौजूद लश्कर, जैश और अल बद्र के आतंकियों को संदेश भेजने के लिए इस VHF टावर का इस्तेमाल किया जाता है. सूत्रों के मुताबिक़ बाक़ायदा आतंकी तंजीमों के लिए अलग-अलग कोड भी बनाए गए है.

पाक सेना ने जारी किए थे निर्देश
न्यूज़18 इंडिया ने 28 अगस्त को रिपोर्ट किया था कि कैसे पाकिस्तान की सेना रेडियो के जरिए जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की फ़िराक़ में है. ख़ुफ़िया रिपोर्ट में इस बात का ख़ुलासा हुआ था कि पाकिस्तान की सेना ने अपने सिग्नल कोर को ये निर्देश दिए थे कि जितने भी पीओके में रेडियो स्टेशन को एलओसी के पास रीलोकेट करेन, नए रेडियो स्टेशन खोलने और बंद पड़े रेडियो स्टेशन को फिर से चालू करने की बात कही थी. ये VHF ट्रांसमिशन टावर उसी के तहत फिर से शुरू किया गया है.

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First published: September 9, 2019, 6:12 PM IST
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