90 फीसदी मामलों में कोरोना जानलेवा नहीं, रेमडेसिविर जादुई दवा नहीं- डॉ. गुलेरिया

डॉ. गुलेरिया ने की बात. (File Pic)

डॉ. गुलेरिया ने की बात. (File Pic)

देश के शीर्ष डॉक्टरों ने रविवार को इस महामारी से बचने और अन्य उपायों पर चर्चा की. देश के चार बड़े डॉक्टरों ने इस बीमारी पर क्या कहा और बचाव के लिए क्या सुझाव दिए आइए जानते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 26, 2021, 12:13 AM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी (Coronavirus) की दूसरी लहर ने भारत में कोहराम मचा रखा है. हर रोज इस जानलेवा बीमारी के लाखों मरीज मिल रहे हैं. अस्पताल कोरोना संक्रमितों की संख्या से भरे हुए हैं. इस बीच देश के शीर्ष डॉक्टरों ने रविवार को इस महामारी से बचने और अन्य उपायों पर चर्चा की. देश के चार बड़े डॉक्टरों ने इस बीमारी पर क्या कहा और बचाव के लिए क्या सुझाव दिए आइए जानते हैं.

एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि 

कोविड ज्यादातर मामलो में एक माइल्ड संक्रमण है. ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवा की कालाबाजारी से लोगों में पैनिक है. रेमेडिसिवर कोई जादुई दवा नहीं है, सामान्य संक्रमण में ये फायदेमंद नहीं है. गुलेरिया ने ये भी कहा कि 85-90 फीसदी मामलों में कोविड संक्रमण जानलेवा नहीं है. इसमें सिर्फ सर्दी,खांसी, या बदन दर्द होता है.

ऐसे मामलों का उपचार घर पर हो सकता है और इसमें ऑक्सीजन या रेमेडिसिवर को जरूरत नहीं है. वहीं 10-15 मरीजों को ही ऑक्सीजन और 5 परसेंट मरीजों को वेंटीलेटर की जरूरत है. उन्होंने कहा कि, रेमडेसिविर इंजेक्शन न जान बचाने और ना ही हॉस्पिटल में कम दिन में छुट्टी दिलाने में कारगर है. उल्टा माइल्ड लक्षण के मामले में ये नुकसान पहुंचा सकती है. दिल्ली एम्स निदेशक गुलेरिया ने ये भी कहा कि जिन मरीजों का ऑक्सीजन 94 से ज्यादा है उन्हें ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं है. ऐसे मरीजों को ऑक्सीजन गंभीर मरीजों के लिए छोड़ देना चाहिये.
मेदांता के निदेशक डॉ. नरेश त्रेहान

मेदांता हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ नरेश त्रेहान ने कहा कि जैसे ही किसी को कोरोना हो उन्हें सबसे पहले अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये. उन्होंने कहा कि सभी डॉक्टरों को कोविड प्रोटोकॉल के हिसाब से दवाइयां पता है. कोशिश करना चाहिए कि मरीज भीड़ भाड़ वाली जगह से दूर रहे.

दिल्ली एम्स के मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ नवनीत



एम्‍स के डॉ नवनीत विज ने कहा कि हमें अपने स्वास्थ्यकर्मियों को बचाना चाहिए. इन्हीं की बदौलत हम लोगों की जान बचा पाते हैं. स्वास्थ्यकर्मियों को बचाने के लिए हमें संक्रमण की चेन को तोड़ना होगा. संक्रमण का चेन तोड़ना समाज मे सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए कोविड के अनुसार सबको सुरक्षित व्यवहार करना होगा.



DGHS के सुनील कुमार का कहना था कि पिछले साल हमने कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीरो से शुरू की थी. लेकिन सरकार ने इसमें बहुत काम किया है. पिछले साल देश में सिर्फ कोरोना का एक टेस्टिंग सेन्टर था जो कि अब एक साल बाद 2500 हो गया है. आज हम देश मे कई लाख टेस्ट कर रहे हैं. डॉ सुनील ने कहा कि वैक्सीन को लेकर डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि वैक्सीन का बहुत मामूली साइड इफ़ेक्ट है.
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