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4 साल की बच्ची ने खाया ब्लीचिंग पाउडर, 8 Kg हुआ वजन, लार निगलना भी मुश्किल

ब्लीचिंग पाउडर खाने से बीमार हुई बच्ची, लार तक नहीं निगल पा रही.  (सांकेतिक फोटो)

ब्लीचिंग पाउडर खाने से बीमार हुई बच्ची, लार तक नहीं निगल पा रही. (सांकेतिक फोटो)

तमिलनाडु में एक सरकारी बाल अस्पताल में भर्ती चार साल की इसाकियाम्मल का वजन बढ़कर 8 किग्रा हो गया है. जब उसका वजन 12 किग्रा से अधिक हो जाएगा तब डॉक्‍टर्स आगे का उपचार कर सकेंगे. दरअसल गलती से उसने ब्लिचिंग पाउडर खाया था. इससे आहार नलिका सिकुड़ गई और वह लार तक निगल नहीं पाती.

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    चेन्नई . तमिलनाडु में एक सरकारी बाल अस्पताल में भर्ती चार साल की इसाकियाम्मल बार-बार एक ही सवाल पूछ रही कि वह चॉकलेट कब खाएगी लेकिन उसके इस सवाल का जवाब न तो फिलहाल उसके माता-पिता और न ही डॉक्टरों के पास है. इस उम्र में मिठाई और चॉकलेट बच्चों के बेहद प्रिय होते हैं लेकिन इस बच्ची के लिए यह अभी दूसरी दुनिया की चीज हो गई है. चार महीने पहले बच्ची ने कुछ ऐसा खा लिया, जिसके बाद उसके माता-पिता उसे लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि बच्ची ने ब्लिचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) खा लिया था. इसके बाद खाना-पीना तो दूर की बात उसके लिये अपना लार तक निगलना मुश्किल हो गया है.

    तमिलनाडु के छोटे से कस्बे शेनकोटा से आने वाली बच्ची एक साधारण परिवार से है और उसके माता-पिता ने एग्मोर के बाल स्वास्थ्य एवं अस्पताल संस्थान (आईसीएच) में आने से पहले कई सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाए. बच्ची इस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है. कुछ महीने पहले हुई इस घटना के बारे में सीताराज और उनकी पत्नी प्रेमा बताते हैं कि वे लोग काम के लिए बाहर गए थे और उनके एक पड़ोसी ने उन्हें फोनकर बताया कि उनकी बच्ची ब्लिचिंग पाउडर खाने के बाद बीमार पड़ गई है.

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    उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘हम अपनी बच्ची को देखकर डर गए थे. उसके होंठ सूज गए थे और वहां खून के धब्बे भी थे और इसके बाद से वह, स्वास्थ्य संबंधी कई दिक़्क़तों का सामना करने लगी.’’ घटना से पहले बच्ची का वजन 12 किलोग्राम था, लेकिन उसके बाद उसका वजन घटकर छह किलो तक पहुँच गया क्योंकि वह कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ है. डॉक्टर उसे ट्यूब के माध्यम से दूध और पौष्टिक पदार्थ दे रहे हैं. दंपति ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि बच्ची के हाथ ‘ब्लिचिंग पाउडर’ कहां से लगा क्योंकि उन्होंने न तो उसे खरीदा था और न ही घर में जमा कर रखा था.

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    आईसीएच के निदेशक और अधीक्षक डॉक्टर इलिलारसी ने बताया कि बच्ची की आहार नलिका असमान्य रूप से संकुचित हो गई है. उन्होंने बताया कि बच्ची में कुछ सुधार देखने को मिला है क्योंकि उसका वजन अब आठ किलोग्राम तक हो गया है. आगे के विकल्प के बारे में वह कहते हैं कि अभी और वजन बढ़ने, कम से कम 12 किलोग्राम का होने और बाद में बाल रोग सर्जन के निर्णयों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया होगी.

    सीताराज, निर्माण संबंधी एक कार्यस्थल पर सहायक है और प्रेमा बीड़ी बनाने के काम में है और समय-समय पर ये दूसरे काम भी कर लेते हैं. हालांकि, अस्पताल में रहने की वजह से इनकी आय का जरिया ख़त्म हो गया है. कुछ दिन पहले अस्पताल के दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री एम सुब्रह्मण्यम ने अधिकारियों को दंपति को अस्पताल में रहने के दौरान खाना मुहैया कराने के लिए कहा और उन्होंने अपने सरकारी आवास में विधायक हॉस्टल परिसर की चाभी भी उन्हें सौंपी. इन सब के बीच बच्ची अब भी इस बात को समझ नहीं पा रही कि ‘पाउडर’ खाने के बाद उसे क्या हो गया और अब वह क्यों कुछ नहीं खा पा रही.

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