लाइव टीवी

Reporter’s Diary: वो 40 घंटे जिनमें उन्नाव के परिवार की उम्मीदों की हुई हजारों बार मौत

News18Hindi
Updated: December 8, 2019, 7:01 PM IST
Reporter’s Diary: वो 40 घंटे जिनमें उन्नाव के परिवार की उम्मीदों की हुई हजारों बार मौत
सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता के पहुंचने के बाद की तस्वीर (News18)

उन्नाव में गैंगरेप पीड़िता (Unnao gangrape) को जलाये जाने के बाद वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाई गई थी. यहां हर कोई उस 23 साल की पीड़िता के बारे में सोच रहा था जो 95% जल चुकी थी. उसका चेहरा नहीं था और त्वचा पिघल गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 8, 2019, 7:01 PM IST
  • Share this:
रुनझुन शर्मा
उन्नाव/ नई दिल्ली. 
उत्तर प्रदेश स्थित उन्नाव में बीते दिनों जलाई गई गैंगरेप पीड़िता (Unnao Gang Rape) को जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित सफदरगंज अस्पताल लाया गया उस वक्त पुलिस, पत्रकार, कैमरापर्सन सब वहां मौजूद थे. किसी को भी बिना सिक्योरिटी जांच के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी. बर्न कैजुअलिटी बिल्डिंग में बाउंसर भी मौजूद थे, जो वहां बेवजह मौजूद लोगों को खदेड़ने के लिए तैयार थे.

हर कोई उस 23 साल की पीड़िता के बारे में सोच रहा था जो 95% जल चुकी थी. उसका चेहरा नहीं था और त्वचा पिघल गई थे. उसका शरीर सिकुड़ कर लगभग काला पड़ चुका था और अब वह गले में लगी एक नली के सहारे सांस ले रही थी.

बीते साल उन्नाव में जब दो लोगों ने उसके साथ रेप किया तो वह अकेली थी. वह उस वक्त भी अकेले थी जब वह गुरुवार की सुबह मामले की सुनवाई के लिए अदालत जा रही थी. इसी दौरान कथित रूप से रेप के दो आरोपियों के साथ पांच लोगों ने उस पर केरोसीन छिड़क कर जला दिया. वह अकेले 1 किलोमीटर दौड़ी जब तक कि उससे मदद के लिए किसी को बुलाने के लिए फोन नहीं मिला.

एक ओर जहां पीड़िता जिन्दगी और मौत की जंग लड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर उसके परिवार के आसपास मीडिया और नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ था. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी चल रहे थे.

उसकी सांस की डोर एक आखिरी उम्मीद पर टिकी
सफदरजंग अस्पताल में बर्न यूनिट राष्ट्रीय राजधानी में सबसे बड़ी है और पेशेंट फ्लो के मामले में दुनिया भर में सबसे बड़ी है. डॉक्टरों को पता है कि पीड़िता को उस समय लाया गया था जब वह 95 फीसदी तक जल चुकी है और उसकी सांस की डोर एक आखिरी उम्मीद पर टिकी है. लेकिन पीड़िता के परिजनों में चार लोगों की पूरी दुनिया उम्मीद पर ही टिकी थी. मां, बहन और भाई जो अस्पताल में ही थे और उन्नाव में मौजूद उसके पिता. उनकी उम्मीद इस बात से जुड़ी थी कि उनकी बेटी लड़ने वाली है.जब वह जिन्दगी और मौत से जूझ रही थी तब दिल्ली आने से पहले उसने लखनऊ के सिविल अस्पताल में मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया. यह बेटी पूरी रात लड़ी. अगले दिन यानी शुक्रवार दोपहर उसके अंगों ने काम करना बंद कर दिया. वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दी गई. उसकी बहन हर्षा (बदला गया नाम) लगातार ICU के भीतर झांकने की कोशिश कर रही थी. वह अपनी बहन को ना देख पाने के दुख के चलते लगातार रो रही थी.

वहीं हर्षा के विपरीत पीड़िता की मां एक दीवार के सहारे खड़ी थीं और अपने अंदर की भावनाओं को दबाए रखा. हर्षा मुझसे बात करने की कोशिश कर ही थी, लेकिन वह जो कह रही थी मैं उसे समझ नहीं पा रही थी. उसका दुख उसके शब्दों को पीछे ढकेल दे रहा था. उसके लिए भी यह काफी कठिन था कि वह ICU के बाहर जाए. मैं भी उसे बाहर नहीं जाने देना चाह रही थी. बाहर पत्रकारों का समुद्र उसके परिवार के बयान का इंतजार कर रहा था.

और अपना चेहरा ढंकने दिया...
लड़की का भाई बात करना चाह रहा था. इसके लिए वह जरूरी अनुमति लेने गया. मैं बाहर आई और बाहर खड़ी मीडिया के साथ समूह में पहुंची जहां बाकी लोग इंतजार कर रहे थे.मैंने उसके गले में पड़ा गमछा हटाया और उसका चेहरा ढंक दिया. मुझे उसकी बहन की पहचान छिपाने के लिए कानून के अनुसार यह काम करना था, लेकिन उसने कुछ कहा नहीं और अपना चेहरा ढंकने दिया.

मैंने पूछा- पूरा देश उसके लिए प्रार्थना कर रहा आपकी बहन के लिए वह कैसी हैं. उसने कहा- वह ठीक हो रही है. मैं अच्छे इलाज के लिए सरकार का शुक्रगुजार हूं.

उसने ऐसा क्यों कहा? क्या वह गुस्सा नहीं था? क्या उससे कहा गया या उस पर दबाव बनाया जाय कि वह सरकारी प्रतिक्रिया से खुश है? मुझे हैरानी हुई लेकिन मैंने आगे कोई जांच नहीं करनी चाही. यह समय नहीं था. अस्पताल से जाने से पहले मैं ने डॉक्टरों से निवेदन किया कि अगर कोई बड़ी बात हो तो मुझे फोन जरूर करें. मुझे न्यूजरूम में जानकारी देनी होगी और रिपोर्ट करने के लिए लाइव होना होगा.

शुक्रवार की आधीरात मुझे मैसेज आया कि 40 घंटे तक लड़ने के बाद लड़की की मौत हो गई. बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर शलभ कुमार ने कहा - हमारी कोशिशों के बावजूद, वह नहीं बची. उसकी स्थिति शाम से ही बिगड़ने लगी थी. 11.10 बजे उसे कार्डियक अरेस्ट हुआ. हमने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन 11.40 बजे उसने दुनिया को अलविदा कह दिया.'

 'हम इसे दफनाएंगे... अब जलाने को कुछ बचा नहीं'
मैं शनिवार सुबह 6 बजे फिर अस्पताल पहुंची. परिवार अब भी ICU के बाहर इंतजार कर रहा था. मॉर्चरी से उनकी बेटी का शव आता जो अब सिर्फ 'बॉडी' थी. हर्षा अब भी रो रही थी. उसके भाई ने मां का थामा था जो अब भी स्तब्ध थीं. यूपी और दिल्ली पुलिस के लोग सिक्योरिटी पर लगे हुए थे जिसका दायर अब मॉर्चरी तक पहुंच चुका था.

पीड़िता के भाई ने मीडिया और अस्पताल को मदद के लिए शुक्रिया कहा. और इसके बाद वह एक आखिरी बार अपनी बहन को घर लेकर वापस जाने लगा. इस दौरान उसने जो कहा वह हमेशा देश के दिमाग में रहेगा- 'हम इसे दफनाएंगे. अब जलाने को कुछ बचा नहीं.'

यह भी पढ़ें: उन्नाव के बाद लखनऊ में नाबालिग किशोरी से रेप, पीड़िता ने खाया जहर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए उन्नाव से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 8, 2019, 2:50 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर