'शाप' मुक्त हुआ मैसूर का वाडियार राजवंश, 400 साल बाद राजा के घर जन्मा बेटा

मैसूर के वाडियार राजवंश को 400 साल पुराने एक शाप से मुक्ति मिल गई है. बुधवार रात करीब 9:30 बजे शाही परिवार के उत्तराधिकारी युदवीर श्रीकंठ दत्ता चामराजा की पत्नी त्रिशिका ने एक बेटे को जन्म दिया है. इस राजवंश को शाप था कि राजगद्दी के उत्तराधिकारी या राजा के घर कभी बेटे का जन्म नहीं होगा.

News18Hindi
Updated: December 8, 2017, 9:08 AM IST
'शाप' मुक्त हुआ मैसूर का वाडियार राजवंश, 400 साल बाद राजा के घर जन्मा बेटा
वाडियार राजवंश में 400 साल बाद हुआ वारिस का जन्म.
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Updated: December 8, 2017, 9:08 AM IST
मैसूर के वाडियार राजवंश को 400 साल पुराने एक कथित 'शाप' से मुक्ति मिल गई है. बुधवार रात करीब 9:30 बजे शाही परिवार के उत्तराधिकारी यदुवीर श्रीकंठ दत्ता चामराजा की पत्नी त्रिशिका ने एक बेटे को जन्म दिया है. इस राजवंश पर कथित रूप से शाप था कि राजगद्दी के उत्तराधिकारी या राजा के घर कभी बेटे का जन्म नहीं होगा.

यदुवीर और त्रिशिका की शादी पिछले साल जून में हुई थी. त्रिशिका डुंगरपुर की राजकुमारी हैं. वहीं यदुवीर मैसूर के दिवंगत महाराज श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वाडियार और रानी प्रमोदा देवी के दत्तक पुत्र हैं.

इस राजवंश में पिछले 400 सालों में किसी रानी ने बेटे को जन्म नहीं दिया है. लिहाजा अब तक राजा-रानी को उत्तराधिकारी के तौर पर अपने किसी रिश्तेदार के बेटे को गोद लेना पड़ता था.

कैसे मिला था 'शाप'

मान्यता है कि 1612 में दक्षिण में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद वाडियार राजा के आदेश पर यहां की धनसंपत्ति लूट ली गई. हार के बाद विजयनगर की तात्कालीन रानी अलमेलम्मा एकांतवास में थीं, लेकिन उनके पास काफी हीरे-जवाहरात और गहने थे.

वाडियार ने महारानी के पास दूत भेजकर उन्हें गहने सौंप देने के लिए कहा क्योंकि वे गहने और हीरे-जवाहरात अब वाडियार की शाही संपत्ति का हिस्सा बन चुके थे. लेकिन महारानी ने गहने देने से इनकार कर दिया जिसके बाद वाडियार की सेना खजाने पर जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश करने लगी.

ऐसा बताया जाता है कि इससे आहत रानी अलमेलम्मा ने वाडियार राजा को शाप दिया कि जिस तरह उनका घर उजाड़ा गया है उसी तरह उनका देश वीरान हो जाएगा. उन्होंने शाप दिया कि इस वंश के राजा की गोद हमेशा सूनी रहेगी. इसके बाद महारानी ने कावेरी नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली.

तब से अब तक इस राजघराने में किसी राजा के दत्तक पुत्र को ही राजगद्दी मिलती रही है. यह इतने सालों में पहली बार है कि राजगद्दी के उत्तराधिकारी के घर बेटा पैदा हुआ है.
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