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जेएनयू फीस विवाद: करीब 40% छात्रों के परिवार की सालाना आय ₹ 1,44,000 से भी कम: रिपोर्ट

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Updated: November 18, 2019, 7:53 PM IST
जेएनयू फीस विवाद: करीब 40% छात्रों के परिवार की सालाना आय ₹ 1,44,000 से भी कम: रिपोर्ट
जेएनयू में पिछले कई दिनों से बढ़ी हुई फीस को लेकर विवाद जारी है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University) में फीस वृद्धि को लेकर जो सबसे बड़ा विवाद है वह हॉस्टल मेस (JNU Hostel Mess) की एक बार की सिक्योरिटी फीस को लेकर है जो कि पहले 5,500 थी जिसे बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है.

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  • Last Updated: November 18, 2019, 7:53 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University) के छात्रों का फीस वृद्धि को लेकर लगातार प्रदर्शन जारी है. सोमवार को छात्रों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में विश्वविद्यालय से संसद (Parliament) की तरफ मार्च निकालने की कोशिश की. जेएनयू (JNU) के ये छात्र हॉस्टल मेन्युअल (Hostel Manual) में हुए बदलाव और फीस वृद्धि को लेकर पिछले कई दिनों से मार्च कर रहे हैं.

जेएनयू में हुई इस फीस वृद्धि के बाद से जेएनयू हॉस्टल (JNU Hostel) में जो छात्र अकेले एक कमरे में रहते हैं उन्हें हर माह का 600 रुपये देना होगा जो कि पहले 20 रुपये होता था, वहीं जो छात्र टू सीटर कमरे में रहते हैं उन्हें महीने का 100 रुपये देना होगा जो कि पहले 10 रुपये होता था. हालांकि इस वृद्धि को आंशिक रूप से कम करके 200 और 100 रुपये किया गया था.

इस बात पर छिड़ा है विवाद
वहीं इस फीस वृद्धि को लेकर जो सबसे बड़ा विवाद है वह हॉस्टल मेस (JNU Hostel Mess) की एक बार की सिक्योरिटी फीस को लेकर है जो कि पहले 5,500 थी जिसे बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दिया गया है, वहीं स्टूडेंट्स को मेस सर्विस चार्ज के तौर पर 1700 रुपये भी देने होंगे. जहां इस बात की बहस छिड़ी हुई है कि छात्रों को फीस में इतनी छूट देनी चाहिए या नहीं, असल मुद्दा यह है कि जेएनयू में बड़ी तादाद में छात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं.

बेहद कम है छात्रों के परिवार की सालाना आय
जेएनयू की 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट की मानें तो कुल 1,556 दाखिला लेने वाले छात्रों में से 40 प्रतिशत यानी की करीब 623 छात्र निम्न और मध्यम आय वर्ग समूह से आते हैं, जिनके माता पिता की आय 12,000 प्रति माह से भी कम है. कुल छात्रों में से 684 छात्र ग्रामीण परिवेश से आते हैं.

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मनी कंट्रोल की रिपोर्ट
की मानें तो छात्रों की फीस में हुई इस तरह की वृद्धि इन परिवारों को सीधी चोट पहुंचाएगी. उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए 10,000-11,000 सालाना खर्च करने होंगे. होस्टल फीस के अलावा छात्रों को बिजली और पानी के लिए भी पैसे देने होंगे.

विश्वविद्यालय की कमाई भी कम
वहीं दूसरी तरफ बात यह भी है कि विश्वविद्यालय में होने वाली आय और उसके खर्च में काफी अंतर है. साल 2017-18 में यूनिवर्सिटी की कमाई 383.62 करोड़ थी वहीं खर्च 556.14 करोड़ था. वहीं अकादमिक में सिर्फ 10.99 करोड़ रुपये की आय हुई जबकि सब्सिडी में 352 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

जेएनयू में फीस कम करने का एकमात्र मकसद गरीब तबके के छात्रों को कम फीस में बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध कराना है. जेएनयू में छात्रों की विविधता वहां की सबसे बड़ी ताकत है लेकिन बढ़ी हुई फीस का इस पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा.

 

 

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First published: November 18, 2019, 5:49 PM IST
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