देश में मौजूदा और पूर्व सांसद-विधायकों के खिलाफ चल रहे 4442 मुकदमे, यूपी में सर्वाधिक

देश में मौजूदा और पूर्व सांसद-विधायकों के खिलाफ चल रहे 4442 मुकदमे, यूपी में सर्वाधिक
सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट में सामने आई बात.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सौंपी गई रिपोर्ट में सामने आई बात. रिपोर्ट से पता चलता है कि कुल 4,442 ऐसे मामले लंबित हैं, इनमें से 2,556 मामलों में वर्तमान सांसद-विधायक आरोपी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 11:51 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सभी हाईकोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार देश में नेताओं के खिलाफ 4,442 आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. इनमें से 2,556 ऐसे मामलों में वर्तमान सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ मुकदमे लंबित हैं. संसद और विधान सभाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निबटारे के लिए दायर याचिकाओं पर न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को ऐसे लंबित मामलों का विवरण पेश करने का निर्देश दिया था.

इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने सभी उच्च न्यायालयों से मिले विवरण को संकलित करके अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है, 'सभी उच्च न्यायालयों द्वारा दी गयी रिपोर्ट से पता चलता है कि कुल 4,442 ऐसे मामले लंबित हैं, इनमें से 2,556 मामलों में वर्तमान सांसद-विधायक आरोपी हैं. इनमें से 352 मामलों की सुनवाई उच्च अदालतों के स्थगन आदेश की वजह से रुकी है.'

न्यायालय में पेश 25 पेज के हलफनामे में कहा गया है कि इन 2,556 में निर्वाचित प्रतिनिधि आरोपी हैं. इन मामलों में संलिप्त प्रतिनिधियों की संख्या मामलों से ज्यादा है क्योंकि एक मामले में एक से ज्यादा ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं जबकि यही प्रतिनिधि एक से अधिक मामलों में आरोपी है. भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश पर यह रिपोर्ट दाखिल की गई. हंसारिया ने अपने हलफनामे में राज्यों के अनुसार भी मामलों की सूची पेश की है जिनमें उच्चतर अदालतों के स्थगन आदेशों की वजह से मुकदमों की सुनवाई रुक गयी है.



रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालय ने 352 मामलों की सुनवाई पर रोक लगायी है. 413 मामले ऐसे अपराधों से संबंधित हैं जिनमें उम्र कैद की सजा का प्रावधान है. इनमें से 174 मामलों में पीठासीन निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस चार्ट में सबसे ऊपर उप्र है जहां विधि निर्माताओं के खिलाफ 1,217 मामले लंबित हैं और इनमें से 446 ऐसे मामलों में वर्तमान विधि निर्माता शामिल हैं. इसी तरह, बिहार में 531 मामलों मे से 256 मामलों में वर्तमान विधि निर्माता आरोपी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनेक मामले भ्रष्टाचार निरोधक कानून, धनशोधन रोकथाम कानून, शस्त्र कानून, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से रोकथाम कानून और भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत दर्ज हैं.
न्याय मित्र ने इन नेताओं से संबंधित मुकदमों के तेजी से निबटारे के लिए न्यायालय को कई सुझाव भी दिये हैं. इनमें सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालत गठित करने का सुझाव शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च न्यायालयों को ऐसे मामलों की प्रगति की निगरानी करनी चाहिए. हलफनामे में सुझाव दिया गया है कि प्रत्येक उच्च न्यायालय को राज्य में लंबित ऐसे मामलों की प्रगति की निगरानी और शीर्ष अदालत के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ‘सांसद/विधायकों के लिए विशेष अदालत नाम से अपने यहां ‘स्वत:’ मामला दर्ज करना चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज