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विपक्ष ने CJI दीपक मिश्रा पर लगाए थे ये 5 आरोप


Updated: April 23, 2018, 10:46 AM IST
विपक्ष ने CJI दीपक मिश्रा पर लगाए थे ये 5 आरोप
विपक्ष ने सीजेआई पर महाभियोग लाने के लिए उप-राष्ट्रपति को जो नोटिस भेजा था, उसमें 5 कारणों का उल्लेख किया गया था.

विपक्ष ने सीजेआई पर महाभियोग लाने के लिए उप-राष्ट्रपति को जो नोटिस भेजा था, उसमें 5 कारणों का उल्लेख किया गया था.

  • Last Updated: April 23, 2018, 10:46 AM IST
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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने वाला प्रस्ताव खारिज कर दिया है.  दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति को नोटिस दिया था. विपक्ष के प्रस्ताव पर 64 राज्यसभा सांसदों ने साइन किए थे. विपक्ष ने सीजेआई पर महाभियोग लाने के लिए उप-राष्ट्रपति को जो नोटिस भेजा था, उसमें 5 कारणों का उल्लेख किया गया था.

सीजेआई पर महाभियोग लाने के लिए विपक्ष ने दिए ये 5 कारण

-विपक्ष ने सीजेआई के खिलाफ पहला आरोप खराब आचरण का लगाया है. कांग्रेस का आरोप है कि सीजेआई दीपक मिश्रा का व्यवहार उनके पद के मुताबिक नहीं है.

-विपक्ष ने सीजेआई पर दूसरा आरोप प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट से फायदा उठाने का लगाया है. विपक्ष का आरोप है कि सीजेआई दीपक मिश्रा ने इस मामले में दाखिल सभी याचिकाओं को प्रशासनिक और न्यायिक परिपेक्ष्य में प्रभावित किया.

 -विपक्ष ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर में मनमाने तरीके से बदलाव करने का आरोप लगाया है. विपक्ष का कहना है कि सीजेआई ने कई अहम केसों को दूसरे बेंच से बिना कोई वाजिब कारण बताए दूसरे बेंच में शिफ्ट कर दिया.

-विपक्ष ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर अहम केसों के बंटवारे में भेदभाव का आरोप भी लगाया है. दरअसल, सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज बीएच लोया का केस सीजेआई ने सीनियर जजों के होते हुए जूनियर जज अरुण मिश्रा की बेंच को दे दिया था.

-विपक्ष ने सीजेआई पर पांचवा आरोप जमीन अधिग्रहण का लगाया है. विपक्ष के मुताबिक, जस्टिस दीपक मिश्रा ने 1985 में एडवोकेट रहते हुए फर्जी एफिडेविट दिखाकर जमीन का अधिग्रहण किया था. एडीएम के आवंटन रद्द करने के बावजूद ऐसा किया गया था. हालांकि, साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने जमीन सरेंडर कर दी थी.
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भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और संविधान के जानकारों से चर्चा के बाद उपराष्ट्रपति ने ये फैसला लिया. जानकारी के मुताबिक, सीजेआई के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार पाए गए, जिसके बाद प्रस्ताव खारिज किया गया.

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First published: April 23, 2018, 10:41 AM IST
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