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निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में राजनीति से बनाई हाथभर की दूरी… 5-प्वाइंट में पढ़िए, कैसे

निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में राजनीति से बनाई हाथभर की दूरी… 5-प्वाइंट में पढ़िए, कैसे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

Union Budget-2022, Nirmala Sitaraman's Budget Speech : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) ने मंगलवार, 1 फरवरी को बजट भाषण में राजनीति से हाथभर की दूरी बनाकर रखी. बावजूद इसके कि महज 9 दिन बाद ही, 10 फरवरी से 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू होने वाली है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) ने मंगलवार, 1 फरवरी को जब 2022-23 का बजट (Union Budget-2022) पेश किया तो अपने भाषण में राजनीति से हाथभर की दूरी बनाकर रखी. बावजूद इसके कि महज 9 दिन बाद ही, 10 फरवरी से 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू होने वाली है. और ये चुनावी राज्य भी कोई मामूली नहीं हैं. बल्कि इनमें एक तो उत्तर प्रदेश है, जहां की सियासत (UP Politics) पूरे देश को सालों-साल से प्रभावित करती रही है. उसके अलावा पंजाब (Punjab), उत्तराखंड (Uttarakhand), गोवा (Goa) और मणिपुर (Manipur). इन सभी में एक अनुमान के मुताबिक देश की आबादी का लगभग 5वां हिस्सा निवास करता है.

इसके बावजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने करीब 90 मिनट के अपने बजट भाषण (Budget Speech) में ऐसा संकेत लगभग नहीं ही दिया कि उनका बजट चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. हालांकि यह कहना और मानना मुश्किल ही है कि बजट में चुनाव तथा राजनीति (Election and Politics) को ध्यान में नहीं रखा गया है. तो फिर सवाल हो सकता है कि निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने कैसे अपने बजट भाषण (Budget Speech) में इस अहम पहलू को पीछे रखने में सफल हो सकीं. इसका जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं.

परियोजनाओं और आंकड़ों का जिक्र लेकिन जगहों का नहीं 

बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमरण ने, देखा जाए तो चतुराई की. उन्होंने सड़क, बिजली, पानी, घरेलू गैस, शौचालय आदि के आंकड़े गिनाए. नई परियोजनाओं की घोषणा भी की. लेकिन कहीं किसी में भी स्थान-विशेष का जिक्र नहीं किया. जैसे- केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken-Betwa River Link Project) , जो मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के साथ उत्तर प्रदेश (Uttar Pradseh) से भी जुड़ी है. खास तौर पर सूखा और राजनीति से गहरे तक प्रभावित रहे बुंदेलखंड इलाके से. यह परिेयोजना 44,605 करोड़ रुपए की है. इसके लिए बजट में 14,000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है. वित्त मंत्री ने इसका ऐलान करते हुए उत्तर प्रदेश (UP) का नाम लेने से लगभग बचते हुए इसके तमाम फायदे गिना दिए. ऐसा ही उन्होंने अन्य मामलों में भी करने की कोशिश की.

महाभारत के हवाला से आयकर में छूट न बढ़ाने का मामला संभाला 

एक और उदाहरण आयकर में छूट (Income Tax Rebate) का दायरा बढ़ाने से जुड़ा था. यह हमेशा से ऐसा मामला रहा है, जो सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों तरीके से आम लोगों को प्रभावित करता है. खास तौर पर मध्यम आय-वर्ग (Middle Income Group) को. इसमें छूट का दायरा बढ़ाया जाता है, तो इसे लोक-लुभावन करार दिया जाता है. अगर नहीं बढ़ाया जाता तो इस वर्ग को ठग लेने, ठेंगा दिखा देने जैसे विशेषणों के साथ प्रचारित किया जाता है. लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitaraman) की चतुराई ने यहां भी संतुलन बिठा लिया. उन्होंने महाभारत के शांति-पर्व के 72वें अध्याय के 11वें श्लोक का संदर्भ दिया. श्लोक पढ़ने के बजाय इसका अर्थ बताया, ‘राजा (सरकार) को कर-व्यवस्था न्यायसंगत और धर्मानुरूप करनी चाहिए.’ यानी ‘जो लोग कर देने में सक्षम हैं, उनसे कर लिया जा सकता है. जो सक्षम नहीं हैं, राहत की जरूरत उन्हें कहीं अधिक है.’ उन्होंने साथ ही करदाताओं का सहयोग के लिए आभार भी जताया.

नई ट्रेनों की घोषणा की लेकिन बस आंकड़ों में  

रेल-बजट (Rail Budget) वाले हिस्से में वित्त मंत्री ने लोकार्षक 400 वंदेभारत ट्रेनों (Vandebharat Trains) चलाने का ऐलान किया. बताया कि अगले 3 साल में ये ट्रेनें पटरी पर आने वाली हैं. लेकिन किन-किन शहरों के बीच चलेंगी, इसका ब्यौरा नहीं दिया. जबकि पहले के सालों में जब रेल बजट अलग पेश किया जाता था, तो लंबी-चौड़ी सूची होती थी. इसमें बताया जाता था कि कौन सी ट्रेन नई चलाई जाएगी. कहां से कहां तक चलेगी. इससे किस राज्य को कितना फायदा होगा. आदि.

बड़े सुधारों की घोषणा नहीं, ध्यान सिर्फ अर्थव्यवस्था को गति देने पर 

केंद्र सरकार को बीते दिनों विवादित 3 कृषि कानून वापस लेने पड़े थे. इसे ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने बड़े सुधारों की घोषणा नहीं की. मसलन- विनिवेश (Disinvestment), निजीकरण (Privatisation) या संपत्तियों का मौद्रीकरण (Assets Monetization) आदि. उन्होंने न ही इसे लोकलुभावन कदम की तरह पेश किया, जो वे चाहतीं तो कर सकती थीं. लेकिन उन्होंने यहां भी संतुलन साधा. अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) 35% से अधिक तक बढ़ाने आदि जैसे जो कदम सरकार उठाने वाली है, उस पर ज्यादा ध्यान दिया और बजट भाषण (Budget Speech) सुनने वालों का दिलाया भी.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ और सरकार से जुड़े लोग 

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) के अध्यक्ष एनके सिंह कहते हैं, ‘इस बजट का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही है कि सरकार लोकलुभावन चुनावी करतबों से दूर रही. उसने खर्च और निवेश बढ़ाने पर ध्यान दिया. ऐसा होने पर स्वाभाविक रूप से हर क्षेत्र में रोजगार और आमदनी बढ़ेगी.’ वहीं सरकार के एक बड़े अधिकारी भी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘हां, हमने जानबूझकर चुनावी या सियासी संदेश देने से दूरी बनाकर रखी. क्योंकि सरकार के सामने स्पष्ट है कि इस सबका कोई अधिक मतलब नहीं रह गया है.’

Tags: Assembly Elections 2022, Budget, Nirmala Sitaraman

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