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स्किन गोरा करने वाली क्रीम का दावा हुआ फेल तो लगेगा 50 लाख का जुर्माना, होगी 5 साल की जेल

News18Hindi
Updated: February 7, 2020, 12:12 PM IST
स्किन गोरा करने वाली क्रीम का दावा हुआ फेल तो लगेगा 50 लाख का जुर्माना, होगी 5 साल की जेल
1954 में आये इस कानून में अब तक 6 महीने या 1 साल की जेल का प्रावधान है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 'बदलते समय और प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल रखने के लिए' संशोधन का प्रस्ताव किया जा रहा है.'

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  • Last Updated: February 7, 2020, 12:12 PM IST
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नई दिल्ली. भारत सरकार ने ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 (Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954) में बदलाव का प्रस्ताव किया है. सरकार द्वारा बनाये गए बिल के ड्राफ्ट में कहा गया है कि स्किन फेयरनेस, बहरापन, शरीर की लंबाई बढ़ाने, बालों का झड़ना, मोटापा और अन्य किस्म के दावे करने वाले विज्ञापन अगर नकली साबित हुए तो ऐसे में 50 लाख रुपये का जुर्माना और पांच साल की जेल का प्रावधान किया जा सकता है.

सरकार का इरादा है कि नकली और लोगों में भ्रम फैलाने वाले विज्ञापनों और दावों पर रोक लग सके ऐसें में यह प्रस्ताव लाया गया है. अक्सर ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें कंपनियों द्वारा किये गए दावे फेल हुए हैं और लोगों ने कंज्यूमर्स कोर्ट का रुख किया है.

ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 2020 के नये ड्राफ्ट में पहली बार ऐसा कोई विज्ञापन पर देने पर 10 लाख का जुर्माना और 2 साल की जेल का प्रवाधान है. अगर इस पर रोक नहीं लगाई जाती है तो जुर्माना बढ़कर 50 लाख हो जाएगा और पांच साल की जेल भी होगी. मौजूदा कानून में पहली बार ऐसा करने पर 6 महीने की जेल में होगी. इसमें जुर्माना लगाने का प्रावधान जरूरी नहीं था. दूसरी बार भी ऐसा करने पर 1 साल की जेल हो सकती है.

45 दिनों के भीतर दे सकते हैं अपनी राय

वर्तमान कानून तावीज़, मंत्र, कवच और किसी भी प्रकार के किसी अन्य आकर्षण के रूप में 'जादू के उपाय' के खिलाफ है जिसमें किसी बीमारी के निदान, इलाज, उपचार या रोकथाम के लिए चमत्कारी शक्तियों के इस्तेमाल करने का आरोप हो.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार,  'बदलते समय और प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल रखने के लिए' संशोधन का प्रस्ताव किया जा रहा है. मंत्रालय ने उक्त मसौदा विधेयक के संबंध में जनता या हितधारकों के सुझावों, टिप्पणियों या आपत्तियों को हल करने का निर्णय लिया है. मंत्रालय के अनुसार, इसे 45 दिनों के भीतर अपनी राय इस प्रस्ताव पर दिया जा सकता है.

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First published: February 7, 2020, 10:22 AM IST
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