किसान आंदोलन को 50वां दिन पूरे, ट्रैक्‍टर रैली से लेकर 9वें दौर की वार्ता तक, जानें 10 प्रमुख बातें

किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है. (pic- AP)

Farmers Protest: कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान अपनी इस मांग पर अडे हैं कि सरकार इन कानूनों को वापस ले. हालांकि 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच में 9वें दौर की भी वार्ता प्रस्‍तावित है.

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    नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार के 3 कृषि कानूनों (Farm Laws) का विरोध कर रहे किसानों को दिल्‍ली की सीमाओं पर आंदोलन (Farmer Protest) करते हुए गुरुवार को 50 दिन पूरे हो गए हैं. इस दौरान किसान कड़ाके की ठंड का सामना करते हुए आंदोलन स्‍थल पर डटे हुए हैं. किसानों ने इस बीच ट्रैक्‍टर रैली निकाली, सरकार के साथ उनकी 8 दौर की वार्ताएं भी हुईं. हालांकि ये सभी वार्ताएं विफल रहीं. अब किसान 26 जनवरी को अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बना रहे हैं.

    कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान अपनी इस मांग पर अडे हैं कि सरकार इन कानूनों को वापस ले. हालांकि 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच में 9वें दौर की भी वार्ता प्रस्‍तावित है. ऐसे में शुक्रवार को दिन अहम हो सकता है. संभावना है कि 15 जनवरी को किसान और सरकार के बीच कुछ सफल बातचीत हो और उनकी समस्‍या का हल निकल आए.



    किसान आंदोलन की प्रमुख बातें...
    किसान पिछले 50 दिनों से दिल्‍ली की सीमाओं पर डटे हैं. इस दौरान वे लगातार बैठकें करके रणनीति बना रहे हैं. ऐसी ही एक अहम बैठक गुरुवार को भी सिंघु बॉर्डर पर होगी. इसमें किसान आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी.
    किसानों ने 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व नहीं मनाया. आमतौर पर पंजाब में लोहड़ी काफी धूमधाम से मनाई जाती है. इस बार लोहड़ी पर किसानों दिल्‍ली की सीमा पर लकड़ी जलाई और कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं. संयुक्‍त किसान मोर्चा के परमजीत सिंह ने जानकारी दी है कि सिर्फ सिंघु बॉर्डर पर ही करीब एक लाख प्रतियां जलाई गई हैं.
    15 जनवरी को सरकार और किसानों के बीच 9वें दौर की बैठक प्रस्‍तावित है. लेकिन इस बैठक को लेकर असमंजस की स्थिति उत्‍पन्‍न है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के आदेश के बाद सरकार में इस बात पर विचार चल रहा है कि प्रस्तावित बैठक की जाए या नहीं.
    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में किसान आंदोलन को लेकर संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. साथ ही इस समस्‍या के हल के लिए 4 सदस्‍यीय कमेटी गठित की है.
    सरकार और किसानों के बीच नौवें दौर की वार्ता से पहले सरकार इस मसले पर कानूनी राय ले रही है. बुधवार को सरकारी अफसरों और वकीलों के बीच इस पर चर्चा भी हुई है. माना जा रहा है कि सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही सरकार अब मामले में अंतिम निर्णय लेगी.
    कृषि राज्य मंत्री पुरषोत्तम रूपाला ने इस मामले पर कहा है कि सरकार किसान संगठनों के साथ बातचीत जारी रखने के पक्ष में है. उनका कहना है कि सरकार मानती है कि समस्‍या का हल वार्ता से ही निकल पाएगा.
    सरकार ने बुधवार को कहा कि प्रदर्शनकारी किसान संगठनों को उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति की कार्यवाही में भाग लेना चाहिए. दरअसल, प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने कहा है कि वे इस समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे क्योंकि इसके सदस्यों को सरकार समर्थक मानते हैं, हालांकि उन्होंने सरकार के साथ नए दौर की बातचीत की इच्छा जताई है. किसान संगठनों के साथ 15 जनवरी को प्रस्तावित बातचीत के बारे में पूछे जाने पर चौधरी ने कहा, ‘आखिरी निर्णय इस आधार पर किया जाएगा कि किसान संगठनों के नेताओं का क्या कहना है. फिलहाल यह बैठक तय है.'
    पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक के बाद किसान नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित समिति के सदस्य विश्वसनीय नहीं हैं क्योंकि वे लिखते रहे हैं कि कृषि कानून किसानों के हित में है। हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे. एक अन्य किसान नेता दर्शन सिंह ने कहा कि वे किसी समिति के समक्ष पेश नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि संसद को मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए और इसका समाधान करना चाहिए. उन्होंने कहा, 'हम कोई बाहरी समिति नहीं चाहते हैं.
    भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल समूह) के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने किसानों को एक खुले पत्र में स्पष्ट किया है कि ट्रैक्टर मार्च केवल हरियाणा-नई दिल्ली सीमा पर होगा. लाल किले पर ट्रैक्‍टर रैली निकालने का किसानों का कोई इरादा नहीं है. राजेवाल ने उन किसानों को भी अलगाववादी तत्वों से दूर रहने को कहा है जो लाल किले में बाहर ट्रैक्टर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे.
    करीब 40 आंदोलनकारी किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा किसान आंदोंलन के आगे के कदम पर विचार करने के लिए लगातार संगठनों से बात कर रहा है.

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