कर्नाटक: बकरीद पर सामूहिक नमाज नहीं, मस्जिदों में केवल 50 लोगों की अनुमति

कर्नाटक: बकरीद पर सामूहिक नमाज नहीं, मस्जिदों में केवल 50 लोगों की अनुमति
दिल्ली में जामा मस्जिद में नमाज के लिए प्रवेश कर रहे एक शख्स का तापमान जांचता सुरक्षाकर्मी (सांकेतिक फोटो, AP)

अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के सचिव ए बी इब्राहिम ने शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा कि नमाज (prayers) के लिए मस्जिदों (mosques) में जाने वाले लोगों को फेस मास्क पहनना होगा और सामाजिक दूरी (Social Distancing) बनाए रखनी होगी.

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बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने एक समय में अधिकतम 50 लोगों के साथ केवल मस्जिदों (Mosques) में ही ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Azha- बकरीद) की नमाज अदा करने की अनुमति देते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) को देखते हुए ईदगाह (Eidgah) और अन्य स्थानों पर सामूहिक नमाज को प्रतिबंधित किया गया है. अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के सचिव ए बी इब्राहिम ने शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा कि नमाज (prayers) के लिए मस्जिदों में जाने वाले लोगों को फेस मास्क पहनना होगा और सामाजिक दूरी (Social Distancing) बनाए रखनी होगी.

अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के सचिव (Minority Welfare and Wakf Department Secretary) ने कहा कि हिलाल समिति (Hilal committee) ने फैसला किया है कि ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद (Bakrid) भी कहा जाता है, 31 जुलाई को उडुपी, दक्षिण कन्नड़ और कोडागु जिलों (Udupi, Dakshina Kannada and Kodagu districts) में मनाई जाएगी, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में यह एक अगस्त को मनाई जाएगी.

मस्जिदों में प्रतिबंध के साथ नमाज की अनुमति, 50 से ज्यादा लोग नहीं ले सकते भाग
आदेश में कहा गया कि बकरीद के दौरान मुसलमान सामूहिक नमाज में भाग लेते हैं, लेकिन कोविड-19 महामारी देखते हुए ईदगाह और अन्य स्थानों पर ऐसे आयोजनों को निषिद्ध कर दिया गया है.
विभाग ने आदेश में कहा कि हालांकि, मस्जिदों में प्रतिबंध के साथ नमाज की अनुमति दी जाएगी जिसमें 50 से अधिक लोगों को एकसाथ भाग नहीं लेना होगा. अधिक लोग होने पर नमाजियों के अलग-अलग समूह बनाए जा सकते हैं.



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अन्य जगहों पर भी सामूहिक नमाज न आयोजित करने का आदेश
आदेश में कहा गया है कि किसी भी अन्य जगहों जैसे हॉल, सामुदायिक भवन और 'शादी महल' में सामूहिक नमाज आयोजित नहीं की जानी चाहिए. कर्नाटक ने मंदिरों, मस्जिदों और अन्य पूजा स्थलों को 8 जून से भक्तों के लिए खोले जाने की अनुमति दे दी थी.
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