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OPINION: जानवरों से बर्बरता पर 50 रुपये का जुर्माना पुरातन, पेनाल्टी बढ़ाने का फैसला सही कदम

बॉम्बे सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स द्वारा पांच सालों में एकत्र किए गए डाटा के मुताबिक मुंबई में 2011 से 2016 के दरम्यान पशु हिंसा के 19,028 मामले दर्ज किए गए. (File pic)
बॉम्बे सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स द्वारा पांच सालों में एकत्र किए गए डाटा के मुताबिक मुंबई में 2011 से 2016 के दरम्यान पशु हिंसा के 19,028 मामले दर्ज किए गए. (File pic)

Prevention of Cruelty to Animals: हिंदुस्तान में आदिकाल से पशुओं का सांस्कृतिक महत्व रहा है. लोग उन्हें पूजते रहे हैं. ऐसे में ये संवैधानिक जरूरत है कि पशुओं के प्रति दया का भाव रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2021, 5:18 PM IST
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(मणिलाल वल्लीयेत)

एक आदर्श दुनिया में, पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए कानून उनके प्रति सभी तरह की बर्बरता को खत्म कर सकते है. कुत्तों की ब्रीडिंग और खरीददारी नहीं होनी चाहिए. गाय और दूसरे जानवरों की कटाई नहीं होनी चाहिए और पक्षियों को पिजड़े में कैद नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन, कई बार बदलाव चरणों में होता है और भारत सरकार की ओर से पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act), 1960 में प्रस्तावित संशोधन का स्वागत किया जाना चाहिए. इस संशोधन के तहत जानवरों के प्रति बर्बरता दिखाने पर जुर्माने को बढ़ाकर 75 हजार या पशु की कीमत का तीन गुना करने का प्रस्ताव है. जानवर को घायल करने या हत्या पर 5 साल की जेल का भी प्रस्ताव है. पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था.

हाल ही में तमिलनाडु में एक नर हाथी पर जलता हुआ टायर फेंक दिया गया. आग के हवाले करके हाथी की हत्या कर दी गई. इस बीच दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान दो घोड़ों की मौत हो गई. एक साल से भी कम हुआ जब केरल में एक गर्भवती हाथी को विस्फोटक भरा अन्नानास खिलाकर मार डाला गया. हिमाचल प्रदेश में एक गर्भवती गाय दुर्भाग्यवश विस्फोटक भरा पदार्थ खा लेने से घातक रूप से घायल हो गई. इस तरह की जघन्य घटनाएं जानवरों के प्रति इंसान की बर्बरता को प्रदर्शित करती हैं और यह एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में सामान्य है.



इस तरह के अपराध को अंजाम देने वाले लोग मात्र 50 रुपये का जुर्माना देकर छूट जाते रहे हैं, जिसका समाज के साझे व्यवहार में सकारात्मक असर देखने को नहीं मिलता. हालांकि, कानून में दी गई सजा एकमात्र चिंता का विषय नहीं है, दूसरा उसे लागू किया जाना भी है. बॉम्बे सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स द्वारा पांच सालों में एकत्र किए गए डाटा के मुताबिक मुंबई में 2011 से 2016 के दरम्यान पशु हिंसा के 19,028 मामले दर्ज किए गए. इनमें से एक भी मामले में किसी भी व्यक्ति की ना तो गिरफ्तारी हुई और ना ही उसे सजा दी गई. यद्यपि वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 के तहत जंगली जानवरों के साथ हिंसा पर सात साल की जेल की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन, जिम्मेदार व्यक्ति को सजा देने के मामले बहुत कम सामने आए हैं, जबकि पशुओं के प्रति हिंसा के मामले देश भर से रिपोर्ट किए जा रहे हैं.
मौजूदा परिस्थितियों में पशु हिंसा के लिए ना केवल सजा को बढ़ाया जाना महत्वपूर्ण है, बल्कि जन जागरूकता, और संवैधानिक संस्थाओं को सशक्त बनाकर इसका प्रभावी क्रियान्वयन भी महत्वपूर्ण हो जाता है. राज्य स्तर पर एनिमल वेलफेयर बोर्ड और जिला स्तर पर सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स को मजबूत बनाकर भी जानवरों को सुरक्षित किया जा सकता है. साथ ही न्यायिक ट्रेनिंग और पशु संरक्षण कानूनों को कानूनी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर जागरूकता बढ़ाई जा सकती है.


मूल रूप से न्यूज18 पर अंग्रेजी में प्रकाशित इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें.
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