दुनिया में 58% युवा महिलाएं ऑनलाइन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का करती हैं सामना: रिपोर्ट

सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां मिलीं (सांकेतिक फोटो)
सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां मिलीं (सांकेतिक फोटो)

इस सर्वेक्षण (Survey) में हिस्सा लेने वाली 58 फीसदी लड़कियों और महिलाओं ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram), ट्विटर (Twitter), व्हाट्सऐप (Whatsapp) और टिकटॉक (TikTok) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Social Media Platform) पर ऑनलाइन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार (Abuse) का सामना करना पड़ा है.

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नई दिल्ली. दुनिया के 22 देशों में किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण (Global Survey) में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन हिंसा (Online Violence) और दुर्व्यवहार का शिकार (Victim of Abuse) होने वाली बड़ी आबादी में लड़कियों और युवा महिलाओं (Girls and young women) की संख्या काफी ज्यादा है. यह सर्वेक्षण ब्रिटेन के संगठन ‘प्लान इंटरनेशनल’ (Plan International) ने किया है और इसका शीर्षक ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स गर्ल्स रिपोर्ट’ (State of the World Girls Report) यानी दुनिया में लड़कियों की स्थिति है. भारत, ब्राजील (Brazil), नाइजीरिया (Nigeria), स्पेन (Spain), ऑस्ट्रेलिया (Australia), जापान (Japan), थाईलैंड (Thailand) और अमेरिका (America) समेत 22 देशों की 15-25 वर्ष की 14,000 किशोरियों और महिलाओं ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया.

इस सर्वेक्षण (Survey) में हिस्सा लेने वाली 58 फीसदी लड़कियों और महिलाओं ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram), ट्विटर (Twitter), व्हाट्सऐप (Whatsapp) और टिकटॉक (TikTok) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Social Media Platform) पर ऑनलाइन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार (Abuse) का सामना करना पड़ा है. प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों के लिए समान था. यह सर्वेक्षण 11 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Girl's Day) से पहले जारी हुआ है.





ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47% को यौन हिंसा की धमकी
सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करने वाली लड़कियों में से 47 फीसदी को शारीरिक और यौन हिंसा की धमकियां मिलीं जबकि 59 फीसदी को दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा. सर्वेक्षण के मुताबिक, अल्पसंख्यक और एलजीबीटीक्यू समुदायों से ताल्लुक रखनेवाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें उनकी पहचान की वजह से निशाना बनाया गया.

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प्लान इंटरनेशनल की मुख्य कार्यकारी एन-बिरगिट अलब्रेस्टन ने कहा, ‘‘लड़कियों को उत्पीड़न के जरिए चुप कराया जा रहा है. लैंगिक समानता और एलजीबीटी समेत अन्य मुद्दों पर बोलने वाले कार्यकर्ताओं को भी प्राय: निशाना बनाया जाता है. ऐसे लोगों और उनके परिवार को धमकियां मिलती हैं.’’
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