कहीं बच्ची के रोने पर तो कहीं दहेज के लिए, 72 घंटे में देश भर से आए तीन तलाक के 6 मामले

News18Hindi
Updated: August 24, 2019, 11:50 AM IST
कहीं बच्ची के रोने पर तो कहीं दहेज के लिए, 72 घंटे में देश भर से आए तीन तलाक के 6 मामले
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 The Muslim Women (Protection of Marriage Rights) Bill 2019 के जरिये एक साथ तीन बार तलाक बोलकर वैवाहिक संबंध खत्म करने की प्रथा पर वैधानिक रोक लगायी गयी है.

'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019' The 'Muslim Women (Protection of Marriage Rights) Bill 2019' के जरिये एक साथ तीन बार तलाक बोलकर वैवाहिक संबंध खत्म करने की प्रथा पर वैधानिक रोक लगायी गयी है.

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संसद (Parliament) से तीन तलाक (Triple Talaq)के खिलाफ कानून पास हो जाने के बाद भी इसका सिलसिला थम नहीं रहा है. बीते 72 घंटे में तीन तलाक के कई ऐसे मामले आए हैं जो चौंकाने वाले हैं. राजस्थान के कोटा जिले में दो महिलाएं तीन तलाक की प्रतिबंधित प्रथा का एक ही दिन शिकार बन गई. उनके पतियों ने कथित तौर पर एक ही बार में तीन तलाक कहकर उन्हें तलाक दे दिया.

कोटा के वक्फ नगर की निवासी अनीसा खान ने गुरुवार को आरोप लगाया कि भरतपुर जिले के रहने वाले उसके पति उस्मान ने उसे तलाक दे दिया क्योंकि वह अपने माता-पिता से और दहेज नहीं ला पायी थी और उसे ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया.

कोटा के पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव को दी अपनी शिकायत में खान ने कहा कि उसके पति ने दहेज मांगने और उसकी पिटायी करने के बाद उसे तलाक दे दिया. एसएचओ ताराचंद बंसीवाल ने बताया कि एसपी के निर्देश पर उस्मान के खिलाफ दादाबाड़ी पुलिस थाने में मुस्लिम महिला कानून (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण), 2019 की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की जांच शुरू हो गई है.

दूसरे मामले में, 55 वर्षीय महिला रेहाना ने आरोप लगाया कि कोटा प्रशासन के कोटा कमांड एरिया डेवलेपमेंट परियोजना के पूर्व कर्मचारी उसके पति सरवार अंसारी ने तीन बार तलाक कहकर उसे तलाक दे दिया. महिला की शिकायत पर पुलिस ने कुन्हाड़ी पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की है और मामले की जांच कर रही है.

अकोला का पहला मामला

वहीं महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ एक साथ तीन तलाक देने के संबंध में मामला दर्ज कराया है. पुलिस निरीक्षक गजानन शेल्का ने बताया कि यह मामला गुरुवार को महिला ने अकोला जिले के बालापुर पुलिस थाने में अपने पति और उसके चार संबंधियों के खिलाफ दर्ज कराया था. यह मामला मुस्लिम महिला (विवाह सुरक्षा अधिकार) अधिनियम, 2019 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि अकोला जिले में दर्ज तीन तलाक का यह पहला मामला है.

महिला शिकायतकर्ता के अनुसार उसका पति मोहम्मद जफर मोहम्मद तस्लीम और उनके संबंधी उसके साथ खराब व्यवहार कर रहे थे और उसे अपने मायके लौट जाने पर मजबूर कर रहे थे. इस दंपति की शादी 2013 में हुई थी और उनके तीन बच्चे हैं. 21 अगस्त को दोनों पक्ष यह मामला सुलझाने के लिए जमा हुए लेकिन उनके बीच विवाद पैदा हो गए.
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शिकायत के अनुसार इसके बाद तस्लीम ने अपनी पत्नी से एक साथ तीन तलाक कह दिया. पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

फोन पर दिया तलाक

दूसरी ओर गुजरात के सूरत में फोन पर अपनी पत्नी को कथित तौर पर तलाक देने के लिए एक मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ नये तीन तलाक कानून के तहत गुरुवार को मामला दर्ज किया गया. पुलिस उपायुक्त पन्ना मोमाया ने बताया कि संसद में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के पारित होने के बाद गुजरात में इस कानून के तहत दर्ज होने वाला यह पहला मामला है.

महिला की शिकायत के अनुसार उसका पति मोहम्मद उर्फ वसीम पठान और उसकी मां पिछले डेढ़ वर्ष से उसके साथ बुरा बर्ताव कर रहे थे. उसने बताया कि झगड़े के बाद जून में पठान उसे उसके माता-पिता के घर ले गया और उसे वहां छोड़ दिया. महिला ने आरोप लगाया कि उसी रात उसने (पठान) उसे फोन किया और तीन बार तलाक बोल दिया.

तलाक देकर घर से निकल गया

वहीं मध्यप्रदेश के श्योपुर निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ पत्नी को कथित तौर पर तीन तलाक देने के लिए नये कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह जानकारी पुलिस ने बुधवार को दी थी. पुलिस ने 35 वर्षीय इरफान के खिलाफ उसकी पत्नी 35 वर्षीय लीरजबीन की ओर से प्राप्त शिकायत के आधार पर मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत मामला दर्ज कर लिया. दम्पति के सात बच्चे हैं. अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.

शिकायतकर्ता के अनुसार इरफान ने उसे सोमवार को सड़क पर चलने के दौरान किसी बात को लेकर हुई बहस के बाद तीन तलाक दे दिया. इससे व्यथित होकर लीरजबीन अपने सात बच्चों के साथ मंगलवार को श्योपुर जिले के पुलिस अधीक्षक नगेन्द्र सिंह के कार्यालय में शिकायत करने गई, जिसके बाद उसके शौहर के खिलाफ श्योपुर कोतवाली पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया.

श्योपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पी एल कुर्वे ने बुधवार को बताया, 'एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसके पति इरफान ने उसको तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया है. इस मामले में पुलिस ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.' उन्होंने कहा कि अब तक आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है.

बच्ची के रोने पर दे दिया तलाक

कुर्वे ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है. राज्य के ही बड़वानी जिले में 21 वर्षीय महिला ने यह आरोप लगाते हुए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है कि उसकी एक साल की बीमार बच्ची के देर रात रोने से नींद में खलल पड़ने पर शौहर ने उसे तीन तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया है.

पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि के सेंधवा कस्बे में मायके में रह रही उज्मा अंसारी (21) ने अपने इंदौर निवासी पति अकबर और ससुराल वालों के खिलाफ इस आशय की शिकायत की है. उज्मा और अकबर (25) की शादी दो साल पहले हुई थी.

विवाहिता ने सेंधवा के पुलिस थाने में दर्ज शिकायत में कहा, 'मेरी बच्ची की तबीयत चार अगस्त को ठीक नहीं थी. वह रात में उठकर रोने लगी. इससे मेरे पति की नींद खुल गयी. वह मुझे बच्ची को मार डालने को कहने लगे. इस बात पर हम दोनों की बहस सुनकर मेरे ससुर और जेठ हमारे कमरे में आ गये. फिर इन सभी ने मेरे साथ मारपीट की तथा मेरी बेटी को पलंग से नीचे फेंक दिया.'

शिकायत में कहा गया, 'मेरे पति ने इन सबकी (ससुराल वालों की) उपस्थिति में तीन बार तलाक बोल दिया और मेरी मां को फोन कर कहा कि वह मुझे ले जायें. मुझे और मेरी बच्ची को घर से बाहर निकाल दिया गया.' 21 वर्षीय महिला ने शिकायत में अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना और बेटी पैदा होने पर मारपीट करने के आरोप भी लगाये हैं.

इंदौर पुलिस के पास पहुंचा मामला

बड़वानी के पुलिस अधीक्षक डीआर टेनीवार ने को बताया, 'चूंकि महिला के आरोपों से जुड़ा तमाम घटनाक्रम इंदौर का है. इसलिये हमने उसकी शिकायत को जांच के लिये इंदौर पुलिस को भेज दिया है.' उधर, इंदौर के रावजी बाजार पुलिस थाने के प्रभारी सुनील गुप्ता ने कहा, 'महिला की शिकायत हालांकि हमारे पास अब तक नहीं पहुंची है. लेकिन हम उससे संपर्क कर मामले की वस्तुस्थिति जांचेंगे. इसके आधार पर उचित कदम उठायेंगे.' महिला के आरोपों पर उसके पति की प्रतिक्रिया फिलहाल नहीं मिल सकी है.

गौरतलब है कि 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019' के जरिये एक साथ तीन बार तलाक बोलकर वैवाहिक संबंध खत्म करने की प्रथा पर वैधानिक रोक लगायी गयी है. यह विधेयक पिछले महीने संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी से कानून में तब्दील हो चुका है. इस कानून में मुजरिम के लिये तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है.

यह भी पढ़ें:  Triple Talaq कानून पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

भाषा इनपुट के साथ

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First published: August 24, 2019, 11:12 AM IST
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