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नागरिकता संशोधन बिल में कहीं नहीं है 'उत्पीड़ित अल्पसंख्यक' का जिक्र, फिर BJP इसे क्यों उछाल रही?

News18Hindi
Updated: December 11, 2019, 11:31 AM IST
नागरिकता संशोधन बिल में कहीं नहीं है 'उत्पीड़ित अल्पसंख्यक' का जिक्र, फिर BJP इसे क्यों उछाल रही?
गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश किया.

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) 2019 में समाज को सिर्फ 'communities' यानी 'समुदाय' के तौर पर परिभाषित किया गया है, लेकिन बीजेपी नीत केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में दलीलें देते हुए 'persecuted communities' यानी 'उत्पीड़ित समुदाय' शब्द का इस्तेमाल कर रही है और इस बिल के तहत ऐसे लोगों को भारत आने का एक मौका दे रही है.

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  • Last Updated: December 11, 2019, 11:31 AM IST
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(आदित्य शर्मा)

नई दिल्ली. गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) 2019 को लोकसभा में पेश करते हुए कहा था कि ये बिल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देगा. हालांकि, लोकसभा में सोमवार आधी रात पारित हुआ ये बिल कुछ और ही कहता है. नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB 2019) में कहीं भी 'उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों' को भारतीय नागरिकता देने का जिक्र नहीं है.

भारतीय संविधान के नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act of 1955) के सेक्शन 57 के अनुसार, प्रस्तावित बिल में 6 नए क्लॉज (प्रावधान) जोड़े गए हैं. इसके तहत 'हिंदू, सिख, बुद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन समुदाय का कोई भी व्यक्ति जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान या बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आया हो, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा.'

हालांकि, इस प्रस्तावित बिल के 6 प्रावधान कुछ और कहते हैं. इस बिल में समाज को सिर्फ 'communities' यानी 'समुदाय' के तौर पर परिभाषित किया गया है, लेकिन बीजेपी नीत केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में दलीलें देते हुए 'persecuted communities' यानी 'उत्पीड़ित समुदाय' शब्द का इस्तेमाल कर रही है और इस बिल के तहत ऐसे लोगों को भारत आने का एक मौका दे रही है.


सीनियर एडवोकेट और ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (HRLN) के फाउंडर कोलिन गॉन्जाल्विस ने News18 से बात करते हुए बताया कि हम जिस बिल के बारे में बहस कर रहे हैं और लोकसभा में जो बिल पास किया गया है, दोनों में बड़ा अंतर है.


CAB BILL
पूर्वोत्तर राज्यों में इस बिल का बहुत विरोध हो रहा है.
गॉन्जाल्विस आगे बताते हैं, 'पाकिस्तान में अहमदियों को उत्पीड़ित शरणार्थी माना जाता है. अफगानिस्तान में हजारस उत्पीड़ित शरणार्थी हैं. ये दोनों समुदाय रिफ्यूजी के तौर पर भारत में भी पाए जाते हैं. जान की सुरक्षा और काम की तलाश में ये भारत आ गए और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने इन्हें रिफ्यूजी का दर्जा दे दिया. इसका मतलब ये हुआ कि संयुक्त राष्ट्र ने खुद इन समुदायों को उत्पीड़ित माना है. हालांकि, बीजेपी सबको ये समझाने में जुटी है कि वो अल्पसंख्यकों के बारे में सोच रही है, लेकिन असल में वह सामान्य अल्पसंख्यकों से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को अलग कर रही है.'

कोलिन गॉन्जाल्विस के मुताबिक, बिल के कंटेंट में 'उत्पीड़न' शब्द नहीं होने पर बीजेपी का पक्ष कानूनी रूप से कमजोर हो रहा है. क्योंकि, अगर ऐसा नहीं हुआ तो विपक्षी पार्टियों को सवाल पूछने का मौका मिल जाएगा कि अगर सरकार गैर-मुस्लिमों (जिनका उत्पीड़न नहीं हुआ है) को नागरिकता दे रही है, तो मुस्लिमों को इससे अलग क्यों रखा जा रहा है?


हालांकि, पूर्व अटॉर्नी जनरल और संविधान एक्सपर्ट सोली सोराबजी इस बिल पर अलग राय रखते हैं. News18 से बात करते हुए सोराबजी ने बताया, 'बीजेपी जैसा बता रही है, उस नजर से देखा जाए, तो इस बिल में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है. लोकसभा में लंबी बहस और तर्कों के बाद ही ये बिल पास किया गया है. यही प्रक्रिया राज्यसभा में भी होगी. इस बिल को लेकर क्या दलीलें दी जाती है, ये गौर करने वाली बात होगी.'

(अंग्रेजी में पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) 

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First published: December 11, 2019, 11:21 AM IST
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