लॉकडाउन के 6 महीने, ज्यादा टेस्ट लेकिन कोविड-19 संकट का अंत अभी दूर : वैज्ञानिक

भारत में कोविड-19 से अब तक कुल 91,149 मौतें हुई हैं.
भारत में कोविड-19 से अब तक कुल 91,149 मौतें हुई हैं.

6 Months Since Lockdown: कोरोना वायरस (Coronavirus) से बुरी तरह प्रभावित देशों में भारत, अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है. लॉकडाउन की घोषणा के समय भारत में करीब 500 से कुछ ज्यादा मामले थे जबकि अब 57 लाख केस हो चुके हैं.

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नई दिल्ली. 500 मामलों से लेकर 57 लाख तक. वैज्ञानिकों ने कहा कि देशव्यापी तालाबंदी के छह महीने बाद, कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) के मोर्चे पर अधिक परीक्षण और विकास के साथ यह वैश्विक महामारी भारत की लंबाई और चौड़ाई में तेजी से फैल रही है. यह बीमारी कब नियंत्रित होगी, इस पर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है. 24 मार्च को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संक्रमण की चेन को तोड़ने का एकमात्र तरीका बताते हुए, पूरे देश के लिए 21 दिनों की तालाबंदी (Nationawide Lockdown) की घोषणा की. उस समय, SARS-CoV-2 वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 500 से थोड़ी ज्यादा थी और इससे मरने वालों की संख्या 12 थी.

छह महीने बाद, कोरोना वायरस (Coronavirus) से बुरी तरह प्रभावित देशों में भारत, अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है जहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन में 86 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद संक्रमितों का आंकड़ा 57.32 लाख हो गया है. भारत में कोविड-19 से अब तक कुल 91,149 मौतें हुई हैं. जैसे-जैसे कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है, आम आदमी को भी आरटी-पीसीआर टेस्ट और उससे कुछ सस्ते लेकिन कम विश्वसनीय रैपिड एंटीजन टेस्ट की जटिलताओं के बारे में पता चल रहा है. अमेरिका के रहने वाले अर्थशास्त्री और महामारी विज्ञानी रामनयन लक्ष्मीनारायण ने कहा कि वैश्विक महामारी जैसे फैल रही है उसमें एक छिपी हुई महामारी भी है. उन्होंने कहा कि संक्रमण ग्रामीण भारत सहित देश के सभी हिस्सों में व्यापक रूप से फैल रहा है, हालांकि यह उन जगहों पर कम दिख रहा है जहां परीक्षण कम हो रहे हैं या फिर अपर्याप्त हैं.

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धीमी गति से फैल रहा संक्रमण
वाशिंगटन में सेंटर फॉर डिसीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के निदेशक ने पीटीआई को बताया अगर केवल आरटीपीसीआर टेस्ट में इजाफा होता है तो हम संभवतः यूपी और बिहार जैसे राज्यों में संक्रमण के मामलों कुछ वृद्धि देखेंगे. अभी, देश के कई हिस्सों में हमारे पास एक छिपी हुई महामारी है, जिसमें स्वास्थ्य प्रणाली कमजोर है. लक्ष्मीनारायण ने कहा कि जहां संक्रमण धीमी गति से फैल रहा है, अगर लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से नियंत्रण में नहीं है.

एक- दो महीने में कम हो सकते हैं केस
हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि अगले महीने या दो महीने में मामलों की संख्या कम होने लगेगी क्योंकि भारत की जनसंख्या इम्यूनिटी के कुछ अर्थों को प्राप्त कर सकती है. चूंकि आबादी की पर्याप्त संख्या संक्रमित है और बीमारी से उबर रही है, इसलिए उनके वायरस फैलने की संभावना नहीं हैं. सरकार और व्यक्तियों दोनों द्वारा बरती जा रही सावधानियों को देखते हुए, महामारी धीमी हो गई है. इसका मतलब यह होगा कि मामलों में कमी आने से पहले थोड़ी देर के लिए निरंतर कम या अधिक मामले सामने आएंगे.




शहरी क्षेत्रों से देश के बाकी हिस्सों में फैल रहा संक्रमण
प्रतिरक्षा विज्ञानी सत्यजीत रथ ने आगाह करते हुए कहा कि भारत अब भी समुदायों के बीच संक्रमण फैलाने वाले चरण में मौजूद है. नयी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रतिरक्षाविज्ञान संस्थान (एनआईआई) के वैज्ञानिक रथ ने कहा, ‘‘...यह महामारी अब घने जनसंख्या घनत्व वाले शहरी क्षेत्रों से देश के शेष हिस्से में फैल रही है. ’’ उन्होंने कहा कि वायरस संक्रमण का प्रसार वास्तव में कभी भी नियंत्रण में नहीं रहा.

रथ ने कहा, ‘‘शुरूआत में लंबे लॉकडाउन लागू किये जाने से संक्रमण के बड़े पैमाने पर फैलने में कुछ देर की गई. लेकिन नियंत्रण की कभी संभावना नहीं रही. इसलिए हम संक्रमण की संख्या में निश्चित तौर पर वृद्धि देखने जा रहे हैं.’’

प्रतिरक्षा विज्ञानी विनीता बल ने रथ के विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि भारत सरकार ने विश्व के अन्य हिस्सों के अनुभव से ज्यादा कुछ नहीं सीखा और कड़ा लॉकडाउन लागू कर दिया जो लंबे समय तक विस्तारित किया गया.

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महामारी से निपटने की तैयारियां बहुत खराब थीं
पुणे के भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान से ताल्लुक रखने वाली प्रतिरक्षा विज्ञानी ने कहा, ‘‘देश के नेतृत्व में दूरदृष्टि का अभाव है और वह गरीबों की जमीनी हकीकत नहीं भांप सके, या फिर उनकी परवाह नहीं की.’’ बल ने कहा, ‘‘दशकों तक जन स्वास्थ्य ढांचे की बहुत ज्यादा अनदेखी किये जाने के कारण महामारी से निपटने की हमारी तैयारियां बहुत खराब थी. लॉकडाउन लागू करने के पीछे यही एकमात्र तर्कसंगत वजह रही होगी. ’’

वहीं, लक्ष्मीनारायण ने इससे अलग विचार प्रकट किये. उन्होंने कहा कि नियंत्रण करने की रणनीति के बारे में कई सकारात्मक चीजें हैं जिनमें भारत द्वारा खतरे की शीघ्र पहचान और शुरूआत में ही लॉकडाउन लागू करना भी शामिल है, हालांकि क्रियान्वयन एवं योजना कहीं बेहतर हो सकती थी.

उन्होंने कहा कि महामारी के शुरूआती दिनों में शीघ्र जांच के अभाव की कीमत देश को चुकानी पड़ी. बेहतर और कहीं अधिक विस्तृत जांच शुरूआत में होने पर, जिसके लिये भारत सक्षम भी था, लॉकडाउन राष्ट्रव्यापी लागू किये जाने के बजाय, लक्षित क्षेत्रों तक सीमित रखा जा सकता था.

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कड़े लॉकडाउन से पैदा हुईं समस्याएं
रथ ने कहा कि शुरूआत में ही कड़े लॉकडाउन लागू कर दिये जाने से कहीं अधिक समस्याएं पैदा हुई, बजाय समाधान निकलने के. उन्होंने कहा कि इसने कुछ हद तक बड़े पैमाने पर संक्रमण में देर की लेकिन इसने आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचाया और स्वास्थ्य प्रणाली को बाधित कर दिया. बल ने इस बात का जिक्र किया कि भारत स्वास्थ्य ढांचे को लंबे समय तक नजरअंदाज किये जाने की कीमत चुका रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘बुनियादी ढांचा तैयार करने, उसका उन्नयन करने की पिछले छह महीने में गंभीर कोशिशें की गईं लेकिन वह अब भी पर्याप्त नहीं है. ’’

कोविड-19 के टीके के बारे में विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में कम कम से कम आठ टीके विकसित किये जा रहे हैं, जिनमें से दो दूसरे चरण के परीक्षण में प्रवेश कर चुके हैं.
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