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ISI एजेंट के प्यार में पड़कर माधुरी ने की देश से गद्दारी

माधुरी गुप्ता ने ISI के एक एजेंट को भारत-पाक विदेश वार्ता के दस्तावेज लीक कर दिए थे।

माधुरी गुप्ता ने ISI के एक एजेंट को भारत-पाक विदेश वार्ता के दस्तावेज लीक कर दिए थे।

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    नई दिल्ली। देश के साथ गद्दारी से बढ़कर गुनाह शायद कोई दूसरा नहीं होता। अपनी मिट्टी से छल, अपने लोगों के साथ धोखा। माधुरी गुप्ता जो कल तक पाकिस्तान में भारतीय दूतावास में अफसर थी, लेकिन आज उनपर एक गद्दार का ठप्पा लग गया है। पुलिस वाले घंटों पूछताछ कर रहे हैं। माधुरी गुप्ता ने आईएसआई के एक एजेंट को भारत-पाकिस्तान विदेश वार्ता के दस्तावेज लीक कर दिए थे। कल संसद में विदेश राज्य मंत्री परणीत कौर इस पाकिस्तानी जासूस पर बयान देंगी। आखिर क्यों माधुरी गुप्ता आईएसआई का मोहरा बन गईं।

    माधुरी ने हिंदुस्तान की मिट्टी का कर्ज उतारने के बजाय उसने शुरू कर दी सरहद पार के लिए जासूसी। पैसे के लिए नहीं बल्कि अपमान और गुस्से के लिए ताक पर रख दी उसने 25 साल की देश सेवा। 53 साल की माधुरी गुप्ता आईएसआई का एक मोहरा बन गईं।

    कारनामे ऐसे कि केंद्र सरकार हैरान है। ये समझने की कोशिश की जा रही है कि आखिर पाकिस्तान की बेहद बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारतीय दूतावास में इतने गहरे सेंध कैसे मार दी। आईबीएन 7 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक माधुरी गुप्ता ने अपने दिल के हाथों मजबूर होकर एक आईएसआई एजेंट को भारत पाकिस्तान विदेश सचिव वार्ता का एजेंडा लीक कर दिया था।

    पता चला है कि राणा नाम का ये एजेंट ये जानने में दिलचस्पी दिखाता था कि आखिर भारत पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव वार्ता के लिए क्या तैयारी कर रहा है।
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    माधुरी गु्प्ता से पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे
    माधुरी गु्प्ता ने पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं सबसे बड़ा खुलासा ये कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ना केवल भारत की सुरक्षा से संबंधित गुप्त जानकारी हासिल करना चाहती है। बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले बैठक और बातचीत का भारतीय एजेंडा भी वो पहले से ही जान लेना चाहते हैं।

    आखिर माधुरी गुप्ता को भारत-पाक के बीच होने वाली बैठकों की जानकारी मिली कैसे। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियां यही जानने के लिए माधुरी गुप्ता से पूछताछ कर रही हैं। पुलिस को हफ्ते भर की कस्टडी मिली है। समझा जा रहा है कि पूछताछ में माधुरी गुप्ता आसानी से टूट गई उसने ये कबूल लिया कि ISI का एजेंट भारत-पाक वार्ता से जुड़ी जानकारी पूछता था। वार्ता के भारतीय एजेंडे में उसकी खास दिलचस्पी थी। कई अहम जानकारियां ISI को मैंने लीक की हैं।

    माधुरी गुप्ता ने साफ कहा है कि ISI के एजेंट को उसने ये जानकारी पैसे के लिए लीक नहीं कीं। बल्कि अपमान और गुस्से में बदला लेने के लिए उसने देश से गद्दारी तक कर दी। आखिर कैसा अपमान और कैसा गुस्सा कि माधुरी गुप्ता ने देश से डबल क्रॉस किया। इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास में काम करते हुए आईएसआई के एजेंट को जानकारियां लीक करने लगी।
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    कैसे आई माधुरी ISI एजेंट के गिरफ्त में
    आखिर माधुरी गुप्ता आईएसआई के जाल में कैसे फंस गई। माधुरी गुप्ता एक प्रोमोटी अफसर थीं, जांच में उसने बताया है कि उसके सीनियर उसका अपमान करते थे, मजाक उड़ाते थे और आईएसआई एजेंट राणा ने इसी का फायदा उठाते हुए उसे अपने इश्क में गिरफ्तार कर लिया। तो क्या माधुरी पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क में अकेली भारतीय हैं या गद्दारों की लिस्ट में कुछ और नाम भी जुड़ने जा रहे हैं। जांच अधिकारियों की नजर माधुरी के मोबाइल में कैद उन 10 नंबरों पर है जिनसे वो लंबी बातें करती थी।

    माधुरी गुप्ता काफी पढ़ी लिखी है फिर आखिर देश के साथ द्रोह कैसे किया। सूत्रों का कहना है कि धीरे-धीरे अफीम की तरह उसके दिमाग में जहर भरा गया। माधुरी गुप्ता को 1983 में भारतीय विदेश मंत्रालय के असिस्टेंट ग्रेड में नौकरी मिली। प्रोमोशन के बाद पहली विदेश पोस्टिंग- क्वालालंपुर फिर बगदाद और 2007 में इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास के प्रेस एंड इनफर्मेशन विंग में सेकेंड सेक्रेटरी के तौर पर हुई।

    ग्रेड सी से नौकरी शुरू करने वाली माधुरी गुप्ता पीएचडी कर रही थी। करियर अच्छा रहा था। ग्रेड सी से ग्रेड बी में प्रमोट भी हो गई। विदेशी पोस्टिंग्स भी मिलने लगी।

    सूत्रों का कहना है कि माधुरी की तरक्की उसके सहकर्मियों को बर्दाश्त नहीं हुई। पाकिस्तान में पोस्टिंग के दौरान सीनियर्स का बर्ताव भी अच्छा नहीं रहा, अक्सर प्रमोटी कहकर माधुरी का मजाक उड़ाया जाता, ताने मारे जाते। आईएसआई के बेहद शातिर एजेंट राणा ने माधुरी के दिलोदिमाग में पनप रही नफरत सूंघ ली। माधुरी के मन की हालात का राणा ने भरपूर फायदा उठाया और उसने माधुरी को अपने इश्क की जाल में फांस लिया और उससे लेने लगा गुप्त जानकारियां।

    सूत्रों के मुताबिक राणा कई बार पत्रकार के भेष में या वीजा आवेदक बन कर इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के दफ्तर जाता, किसी ना किसी बहाने माधुरी गुप्ता से मिलता, बातें करता, इसके अलावा दोनों ई-मेल पर भी बातें करते। धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ती गईं।

    राणा ने माधुरी को फर्जी ईमेल के जरिए बातचीत करना और जानकारियों को इधर-उधर करने के गुर सिखा दिए। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने माधुरी का कंप्यूटर बरामद कर लिया है और उसके हार्ड डिस्क को जांच के लिए हैदराबाद के सीएफएसएल लैब भेजा जा रहा है।
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    माधुरी गुप्ता के मोबाइल फोन पर पैनी नजर
    माधुरी गुप्ता के मोबाइल फोन पर भी जांच एजेंसियों की पैनी नजर है, सुराग तलाशे जा रहा हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक माधुरी के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इन दोनों मोबाइल के कॉल डीटेल्स से पुलिस ने 10 ऐसे नंबरों की पहचान की है जिनसे माधुरी बार बार और बहुत देर तक बात किया करती थी। ये सभी नंबर भारत के हैं, पुलिस इनकी पहचान कर रही है।

    ये खतरा वाकई में बड़ा है। अपने देश, अपने लोगों, अपनी दुनिया से दूर विदेशी मुल्क के दूतावास में काम करने वाले तन्हा लोग अक्सर दूसरी खुफिया एजेंसियों के जाल में फंस जाते हैं। जो भी हो ये लोग मासूमियत का लबादा ओढ़ कर अपनी गद्दारी से बच नहीं सकते। माधुरी गुप्ता ने देश से गद्दारी की है। लेकिन इस गद्दारी से भारतीय एजेंसियों को सबक लेना चाहिए।

    कई अहम सवाल हैं जिनके जवाब तलाशने का वक्त आ चुका है। पहली बार आईएसआई ने भारतीय दूतावास में सेंध कैसे मारी और किसी को भनक क्यों न लगी। आखिर कड़ी सुरक्षा से घिरे इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास में राणा कैसे माधुरी से गहरा संपर्क बना सका। क्या राणा माधुरी से भारत में मिलता रहा या फिर किसी दूसरे देश में दोनों का रिश्ता परवान चढ़ा।

    जाहिर है जवाब कड़वे होंगे। वक्त आ गया है जब अपनी गलतियां सुधार कर अपने घर की दीवारें और मजबूत की जाएं। सरहद पार से जासूसी की कोशिशें, लालच और पैंतरे तो आने वाले वक्त में भी जारी रहेंगे। जासूसी का बुनियादी सिद्धांत ही यही है। जिस तरह जंग में सब कुछ जायज होता है उसी तरह जासूसी में भी।
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    जम्मू-कश्मीर में एक दंपति पर शक
    वहीं जांच एजेंसियों की नजर में राजौरी का एक दंपति और सेना का एक बड़ा अधिकारी भी है। राजौरी का दंपति माधुरी गुप्ता के साथ लगातार संपर्क में था और माधुरी ने खुफिया जानकारियों वाले कुछ ईमेल इन्हें भी भेजे थे। सेना का अधिकारी इस वजह से एजेंसियों की रडार पर है क्योंकि वो इस दंपति के घर खूब आना जाना करता था।

    माधुरी गुप्ता ने कैसे इस्लामाबाद मिशन में रहकर ISI को खुफिया जानकारी लीक की। क्या भारत में भी माधुरी गुप्ता के लिए ISI का कोई एजेंट था जिसके जरिए वो पाकिस्तान तक खुफिया जानकारी पहुंचा रही थी। दरअसल खुफिया एजेंसियों की नजर माधुरी गुप्ता पर पिछले 4 महीने से थी। जिस दौरान उन्होंने माधुरी गुप्ता के ईमेल और फोन को ट्रैक करना शुरू किया।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक माधुरी गुप्ता गद्दारी मामले के तार जम्मू कश्मीर के राजौरी के एक दंपति और सेना के एक वरिष्ठ अफसर से भी जुड़ रहे हैं। खुफिया एजेंसियों के सर्विलांस के दौरान जम्मू कश्मीर के राजौरी के इस दंपति पर शक हुआ। ये दंपति लगातार माधुरी गुप्ता से फोन और ईमेल के जरिए संपर्क में था। राजौरी दंपति की महिला कई बार पाकिस्तान भी जा चुकी है। जो ईमेल माधुरी गुप्ता और इस दंपति के बीच हुए वो भी माधुरी के खिलाफ सबूतों का हिस्सा हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही जांच एजेंसियां इनसे पूछताछ करेगी।

    जैसे ही खुफिया एजेंसीज को राजौरी के दंपति के साथ माधुरी गुप्ता के लगातार ईमेल और फोन की भनक लगी। उन्होंने इन नंबरों और ईमेल आईडी पर नजर रखनी शुरु कर दी, जानकारों के मुताबिक ISI किसी भारतीय नंबर और शख्स के जरिए माधुरी के कॉन्टैकट में रहना चाहता था ताकि उसपर जल्दी शक ना हो।
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    एक सेना के अफसर भी शक के घेरे में
    यही नहीं इस गद्दारी कांड में सेना के एक बड़े अफसर का नाम भी आ रहा है। पीटीआई के मुताबिक सेना का ये अफसर राजौरी के दंपति का रिश्तेदार है। लेकिन जब उसकी पोस्टिंग इस इलाके में थी तो वो लगातार इनके घर पर जाता था। खुफिया एजेंसीज को तभी इसपर शक हुआ। जिसके बाद इसे भी सर्विलांस पर रखा गया। जांच एजेंसियां सेना के इन अफसर से भी जल्द पूछताछ कर सकती है।

    भारत के इस्लामाबाद दूतावास में काम करने वाली माधुरी गुप्ता से फिलहाल दिल्ली पुलिस का स्पेशल सेल पूछताछ कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी माना है कि मामला गंभीर है। ISI ने इसी साल जासूसी पर होने वाला अपना खर्चा 10 करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ किया है। ये रकम खासकर भारत से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाने के लिए खर्च की जाती है।

    जांच एजेंसियों की मानें तो माधुरी गुप्ता अपनी अगली पोस्टिंग वॉशिंगटन में चाहती थीं। लेकिन पाकिस्तान में दिए गए बयान कुछ दूसरी ही कहानी सुनाते हैं। माधुरी पाकिस्तान को ही अपना घर बताया करती थी और शायद यही वजह है कि वो अपने असली घर भारत से गद्दारी कर बैठीं।

    घर वो होता है जहां आप रहते हैं, अच्छा हो या खराब, पाकिस्तान ही मेरा घर है। माधुरी गुप्ता की इन बातों से साफ है कि पाकिस्तान को लेकर वो क्या सोचने लगी थी। जिस देश में पैदा हुई, जिस देश में पली-बढ़ी उस देश को घर समझने में माधुरी गुप्ता को तकलीफ होने लगी थी। वो भले दो साल से पाकिस्तान में तैनात हो लेकिन भारत उसे अखरने लगा था।
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    माधुरी के खुलासे का अंश
    एजेंसियों की मानें तो पाकिस्तान में ही माधुरी गुप्ता अपनी दुनिया बनाने में लगी थी। उसकी एक और बात चौंकाती है। ‘मैं बहुत थक गई हूं। जब आप भारत में होते हैं तो आराम करने का वक्त ही नहीं मिलता। पाकिस्तान आकर ऐसा लगता है कि मैं घर आ गई हूं।‘

    एजेंसियों की मानें तो माधुरी गुप्ता बहुत आसानी से किसी को भी अपना दोस्त बना लेती थी। बातों में वो किसी से भी कम नहीं थी। कपड़ा हो, हेयर स्टाइल हो या फिर पाकिस्तानी मीडिया। वो हर बारे में सभी से खुलकर बात करती। माधुरी को जानने वालों का कहना है कि वो हमेशा सलीकेदार कपड़ों में रहती।

    माधुरी गुप्ता को तेज रफ्तार में गाड़िय़ां चलाने का बहुत शौक था। वो पाकिस्तान के दोस्तों को अपने तेज रफ्तार ड्राइविंग के किस्से सुनाया करती। लेकिन उसकी ये बातें उस हालात से थोड़ी अलग हैं जिसका अनुभव भारतीय राजनीयिक अक्सर करते हैं।

    पाकिस्तान में भारतीय राजनयिकों की पोस्टिंग को काफी मुश्किल माना जाता है। हर वक्त आप आईएसआई की निगाह में रहते हैं। बाजार भी जाना हो तो बख्तरबंद गाड़ियों में जाइए। घर से निकलना हो तो भी पहरे में। आप समझ सकते हैं ऐसे हालात में माधुरी गुप्ता अगर पाकिस्तान को अपना घर समझ रही थी तो क्यों। उसकी बातों से साफ है कि पाकिस्तान में उसे बेरोकटोक कही भी जाने की आजादी क्यों मिल गई थी।
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    देश से गद्दारी करने वालों की लिस्ट
    भारत से गद्दारी का ये पहला मामला नहीं है। दरअसल जासूसी की दुनिया ही ऐसी होती है कि खुद आपका जासूस भी आपसे दगा कर सकता है। दुनिया भर में भारत के लिए जासूसी करने वाले रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानि रॉ के अफसर भी कई बार पलट जाते हैं। उन्हें भारत के लिए जासूसी करने भेजा जाता है लेकिन वो भारत की ही जानकारी दूसरे देश को देने लगते हैं।

    नॉर्थ ब्लॉक, देश की सबसे इमारतों में से एक यहीं से चलता है देश का वित्त मंत्रालय। बजट हो या फिर तमाम वित्तीय फैसले यहीं पर लिए जाते हैं। जरा सोचिए, इन मजबूत दीवारों में छिपी फाइल की एक फोटो कॉपी दूसरी जगह पर पहुंच जाए तो क्या-क्या हो सकता है। हैरानी की बात नहीं लेकिन ऐसा हो चुका है।

    17 जनवरी 1985 को कुमार नारायण नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया गया। वो वित्त विभाग का पूर्व अफसर था और नौकरी छोड़ने के बाद उसने मरीन इंजन बनाने वाली एक कंपनी ज्वाइन कर ली थी। कहा जाता है कि वित्त मंत्रालय में अहम फैसलों से जुड़ी फाइलों की फोटो कॉपी कराकर वो हर जानकारी अपने कंट्रोलर तक पहुंचा देता था। इस मामले का खुलासा होने के बाद वित्त विभाग के कई अफसरों की गिरफ्तारी हुई।

    पिछले साल जिस न्यूक्लियर सबमरीन अरिहंत ने देश के लोगों का माथा गर्व से ऊंचा कर दिया। वो भी जासूसी से जाल में फंसने से बाल-बाल बची। भारत ने 18 साल तक पूरे खुफिया तरीके से अरिहंत प्रोजेक्ट पर काम किया। लेकिन सुब्बा राव नाम का एक नेवल साइंटिस्ट इस पूरी मेहनत को बर्बाद कर सकता था। उसने इस प्रोजेक्ट की जानकारी पश्चिमी देशों को बेचने की कोशिश की थी। सुब्बा राव की समय रहते गिरफ्तारी के चलते ही दुनिया 18 साल तक इस बात से अनजान रही कि भारत न्यूक्लियर सबमरीन पर काम कर रहा है।

    इसके अलावा भी भारत में कई बार देसी या विदेशी जासूसों को लेकर हड़कंप मच चुका है। भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानि इसरो तो जासूसों के रडार में सबसे ऊपर रहा है। आखिर दुश्मन हो या दोस्त इसरो हर दूसरे देश के लिए चुनौती है।

    देश को ना जाने कितनी सैटेलाइट और लॉचिंग सिस्टम का तोहफा इसरो ने दिया है। लेकिन मालदीव की दो लड़कियों की खूबसूरती के फेर में इसरो के कई अहम प्रोजेक्ट लीक होते-होते बचे। अपनी खूबसूरती के दम पर इन्होंने इसरो के कई वैज्ञानिक पुलिस और यहां तक की सेना के अफसरों तक को साध लिया था। ये दोनों औरतें आईएसआई के लिए जासूसी कर रही थीं।
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    गद्दारों में सबसे बड़ा नाम है रविंदर सिंह का

    भारत के गद्दारों में सबसे बड़ा नाम है रविंदर सिंह का। भारतीय खुफिया एजेंसी के लिए काम करने वाले रविंदर सिंह को एजेंसी से जुड़े अहम दस्तावेज की फोटो खींचते हुए कैमरे पर देखा गया था। जब तक रॉ अपने ही अफसर पर हाथ डाल पाती वो 14 मई 2004 को गायब हो गया। रविंद्र सिंह रॉ में ज्वाइट सेकेट्री स्तर का अफसर था। माना जाता है कि रविंदर सिंह ने रॉ से जुड़ी तमाम जानकारियां अपने अमेरिकी कंट्रोलर तक पहुंचाई थी। कानून की नजर में इस वक्त रविंदर सिंह भगोड़ा है। रविंदर की तरह की कुछ और अफसर जासूसी के फेर में पड़ चुके हैं।

    मई 2008 में बीजिंग में तैनात रॉ के अफसर मनमोहन शर्मा पर जासूसी का आरोप लगा। कहा गया कि चीनी लड़की के प्यार में पड़कर शर्मा ने तमाम खुफिया जानकारी उगल दी। अक्टूबर 2007 में भी रॉ के एक और अफसर रवि नायर को हॉंगकॉंग से वापस बुला लिया गया। रवि नायर पर भी चीन की लड़की के प्यार में खुफिया जानकारी चीन को देने का आरोप लगा।

    वैसे लड़कियों के फेर में जासूसी को मजबूर करने का भारत से जुड़ा सबसे पुराना केस है जवाहरलाल नेहरू के वक्त का। तब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू मॉस्को की यात्रा पर थे और रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी ने उनके साथ गए एक अफसर को ही फंसा लिया था। लड़की के साथ खींची गई फोटो दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा तो उसने ये बात खुद नेहरू से उगल दी।

    जवाहरलाल नेहरू के पास तब विदेश मंत्रालय का भी जिम्मा था। उन्होंने तब ये बात हंसकर उड़ा दी थी। लेकिन बदलते वक्त के साथ जासूसी इतना खतरनाक खेल हो गया है। जिसमें देश की अहम योजनाओं की बर्बादी से लेकर मौत तक सब कुछ है।

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