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2018 से अब तक जम्मू कश्मीर में मारे गए 638 आतंकी, 116 नागरिकों की भी हुई मौत: गृह मंत्रालय

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर निगरानी के दौरान भारतीय सेना के जवान. (पीटीआई सांकेतिक तस्वीर)

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर निगरानी के दौरान भारतीय सेना के जवान. (पीटीआई सांकेतिक तस्वीर)

मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने 42 संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया है और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की पहली अनुसूची में उनके नाम सूचीबद्ध किए हैं.

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नई दिल्ली. भारत सरकार ने 42 संगठनों को आतंकी संगठन (Terrorist Organization) करार दिया है. इन संगठनों के नाम यूएपीए एक्ट (UAPA Act) की पहली अनुसूची में डाले गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी. इसके साथ ही मंत्रालय ने 2018 से जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) और देश के अन्य हिस्सों में मारे गए नागरिकों और आतंकियों का भी आंकड़ा जारी किया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि देश में बड़े पैमाने पर सीमा पार से आतंकवाद प्रायोजित किया जा रहा है. मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने 42 संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया है और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967) की पहली अनुसूची में उनके नाम सूचीबद्ध किए हैं.

सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 2018 में देश के अन्य हिस्सों में 03 लोगों की मौत हुई. जबकि 2019, 2020 और 15 फरवरी 2021 तक देश के अन्य हिस्सों में कोई आतंकवादी मारा गया न ही कोई आम नागरिक मारा गया. वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2018 में 257 आतंकियों को मारा गया जबकि 39 नागरिकों की मौत हुई. वहीं 2019 में 157 आतंकियों को मार गिराया गया जबकि इस साल भी 39 नागरिकों की मौत हुई. वहीं 2020 में 221 आतंकियों को ढेर किया गया जबकि 37 नागरिकों की मौत हुई. वहीं 15 फरवरी 2021 तक 3 आतंकियों को मार गिराया गया और 1 नागरिक की मौत हुई.

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देश में 230 लोगों को दी गई अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा
वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि देश में 230 लोगों को सीआरपीएफ और सीआईएसएफ जैसे केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों द्वारा ‘जेड प्लस’, ‘जेड’ और ‘वाई’ श्रेणियों के तहत सुरक्षा प्रदान की जा रही है. रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा प्राप्त लोगों की केंद्रीय सूची में शामिल व्यक्तियों के समक्ष जोखिम के बारे में केंद्रीय एजेंसियों के आकलन के आधार पर उन्हें सुक्षा दी जाती है तथा इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है. इस तरह की समीक्षा के आधार पर सुरक्षा कवर जारी रखने, वापस लेने या संशोधित करने का फैसला होता है.’’

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मंत्री ने बताया कि मौजूदा में 230 लोगों के नाम इस केंद्रीय सूची में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि आमतौर पर इन लोगों की सुरक्षा पर होने वाले खर्च का वहन सरकार द्वारा किया जाता है. हालांकि उन्होंने इस बात का ब्यौरा नहीं दिया कि ऐसे लोगों की सुरक्षा पर कुल कितनी राशि व्यय होती है.
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