अयोध्या: दीपोत्सव स्थल के बगल में 20 दिन से पानी से जूझ रहे 70 परिवार, सड़क पर रहने को मजबूर

अयोध्या: दीपोत्सव स्थल के बगल में 20 दिन से पानी से जूझ रहे 70 परिवार, सड़क पर रहने को मजबूर
अयोध्या में पानी भरने से जूझ रहे झुग्गियों में रहने वाले 70 परिवार

अयोध्या (Ayodhya) में जिस जगह सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में शानदार दीपोत्सव कार्यक्रम होता है. उसी जगह के ठीक बगल में करीब 70 गरीब परिवार ऐसे हैं,जिनके घर में पानी घुसा है और वो सड़क पर रह रहे हैं.

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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में नगर निगम की बेरुखी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भारी पड़ती दिख रही है. यहां पिछले 20 दिनों से बाढ़ और बारिश का पानी 70 से ज्यादा झुग्गियों में घुसा हुआ है. परेशान लोग सड़क पर जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि यह स्थल अयोध्या के चर्चित दीपोत्सव स्थल के पास है.

लगभग 20 दिन से कई परिवार बाढ़ और बारिश के पानी के बीच में जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं और सड़क के किनारे भोजन बनाकर वही सो रहे हैं. प्रशासनिक की उदासीनता का आलम ये है कि सूचना के बाद भी किसी भी तरीके की कोई भी सरकारी मदद इनके पास नहीं पहुंची. न ही किसी जिम्मेदार ने इनकी कोई सुध ली.

...मगर इनका कल नहीं आया



कैमरे पर नगर निगम का न तो कोई कर्मचारी या महापौर बोलने को तैयार हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी. हालांकि महापौर कहते हैं कि कल तक व्यवस्था की जाएगी लेकिन 20 दिन बीत जाने के बाद अभी तक कल नहीं आया.
बस्ती में संक्रामक रोग फैलने का बढ़ा खतरा

आपको बताते चलें कि जहां बाढ़ की त्रासदी से निपटने के लिए मुख्यमंत्री लगातार सक्रिय हैं और समय-समय पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के जिला अधिकारियों के संपर्क में हैं. राहत कार्य तेजी के साथ चलाने के दिशा निर्देश दिए हैं. लेकिन मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में रहने वाली अयोध्या में 70 से ज्यादा बाढ़ प्रभावित परिवार परेशान हैं. जिम्मेदारों की मौन चुप्पी और अनदेखी से अब संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी इन परिवारों पर मंडरा रहा है.

सूचना सभी को, सुध कोई नहीं ले रहा: पीड़ित परिवार

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जीवन-यापन करने वाले लोगों ने बताया कि लगभग 20 दिन से राम कथा पार्क के ठीक सामने क्षेत्र में पानी है, जिसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों और नगर निगम के लोगों को दी गई लेकिन किसी ने सुध नहीं लिया है. अब बच्चों को ले करके हम लोग रोड के किनारे हैं और वहीं पर भोजन कर रहे हैं. हमारा सारा सामान डूब चुका है लॉक डाउन की वजह से आर्थिक तंगी बनी हुई है और ऐसे में अब घर में पानी भरा है तो मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे हैं. परिवार के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा है.
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