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पाकिस्तान छोड़ भारत आना चाहते हैं पड़ोसी, नागरिकता के लिए मची होड़; जानें संसद में क्या बोली सरकार

पाकिस्तान छोड़ भारत आना चाहते हैं पड़ोसी, नागरिकता के लिए मची होड़; जानें संसद में क्या बोली सरकार

 केंद्र ने 2018 और 2021 के बीच इन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समूहों से भारतीय नागरिकता के लिए 8,244 आवेदन प्राप्त किए हैं   (फाइल फोटो)

केंद्र ने 2018 और 2021 के बीच इन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समूहों से भारतीय नागरिकता के लिए 8,244 आवेदन प्राप्त किए हैं (फाइल फोटो)

Pakistani Applied for Indian Citizenship: अफगानिस्तान के 1,152 आवेदन हैं, जबकि 428 किसी भी देश के नागरिक नहीं हैं, अमेरिका और श्रीलंका से 223 आवेदन आए हैं और नेपाल और बांग्लादेश से क्रमशः 189 और 161 आवेदन लंबित हैं. मंत्री ने संसद को बताया कि चीन से भी करीब 10 आवेदन लंबित हैं.

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    नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) के करीब 7,306 लोगों ने 14 दिसंबर 2021 तक भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) के लिए आवेदन किया है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बुधवार को यह जानकारी दी. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, तय समय तक भारतीय नागरिकता के लिए प्राप्त 10,635 आवेदनों में से लगभग 70 प्रतिशत पाकिस्तानी नागरिक हैं. राय सांसद अब्दुल वहाब के एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे, जिन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए वर्तमान आवेदकों का विवरण मांगा था, जिसमें उनकी वर्तमान नागरिकता का डेटा भी शामिल था.

    राय ने आगे कहा कि अफगानिस्तान, श्रीलंका, संयुक्त राज्य अमेरिका, नेपाल और बांग्लादेश सहित अन्य देशों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन लंबित हैं. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के 1,152 आवेदन हैं, जबकि 428 किसी भी देश के नागरिक नहीं हैं, अमेरिका और श्रीलंका से 223 आवेदन आए हैं और नेपाल और बांग्लादेश से क्रमशः 189 और 161 आवेदन लंबित हैं. मंत्री ने संसद को बताया कि चीन से भी करीब 10 आवेदन लंबित हैं.

    सरकार ने 2018-2021 तक प्राप्त नागरिकता आवेदनों का दिया ब्यौरा
    तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के राज्यसभा सांसद के केशव राव ने 2018 और 2021 के बीच पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समूहों – हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध – से भारत को प्राप्त कुल आवेदनों के बारे में जानना चाहा. उन्होंने यह भी पूछा कि भारत द्वारा कितने लोगों को नागरिकता दी गई.

    राय ने कहा कि केंद्र ने 2018 और 2021 के बीच इन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समूहों से भारतीय नागरिकता के लिए 8,244 आवेदन प्राप्त किए हैं और उनमें से 3,117 को नागरिकता दी है. इस महीने की शुरुआत में, राय ने लोकसभा में बताया था कि पिछले सात वर्षों में 30 सितंबर, 2021 तक 8.5 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी. उन्होंने कहा कि इस साल 20 सितंबर तक 1,11,287 व्यक्तियों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी.

    भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act) पेश किया और यह कानून 10 जनवरी, 2020 को लागू हुआ था. इस अधिनियम के तहत, अल्पसंख्यक समूहों और बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोग, जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हैं, वे भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. केंद्र ने सीएए के तहत नियमों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया है और इसे तैयार करने के लिए जनवरी 2022 तक का समय मांगा है.

    Tags: Indian Citizenship, Nityanand Rai, Pakistan

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