शताब्‍दी से उतारने के आरोपों पर रेलवे ने बताया- पावर कार में चढ़ रहे थे बुजुर्ग

मामले की जांच पड़ताल के बाद अब रेलवे ने स्‍पष्‍टीकरण दिया है. रेलवे के मुताबिक मीडिया में आए घटना से जुड़े तथ्य भ्रामक है बुजुर्ग गलती से पावर कार में चढ़ गए थे जहां से उन्हें उनके कोच में भेजा गया था.

News18Hindi
Updated: July 7, 2019, 11:25 PM IST
शताब्‍दी से उतारने के आरोपों पर रेलवे ने बताया- पावर कार में चढ़ रहे थे बुजुर्ग
मामले की जांच पड़ताल के बाद अब रेलवे ने स्‍पष्‍टीकरण दिया है. रेलवे के मुताबिक मीडिया में आए घटना से जुड़े तथ्य भ्रामक है बुजुर्ग गलती से पावर कार में चढ़ गए थे जहां से उन्हें उनके कोच में भेजा गया था.
News18Hindi
Updated: July 7, 2019, 11:25 PM IST
कानपुर से नई दिल्‍ली के बीच रोज चलने वाली रिवर्स शताब्‍दी एक्‍सप्रेस (12033) में एक बुजुर्ग को कथित तौर पर टीटीई द्वारा उतारे जाने के मामले में रेलवे ने जांच के बाद सपष्टीकरण दिया है. रेलवे ने जांच के बाद बताया है कि बुजुर्ग ट्रेन के पावर कार (जनरेटर कक्ष) में चढ़ रहे थे, इसी के चलते उन्हें अपने कोच में जाकर बैठने के लिए कहा गया था.

मीडिया में आई ख़बरों में बुजुर्ग ने आरोप लगाया था कि उन्हें टीटीई और सुरक्षा कर्मियों ने उनकी वेशभूषा के कारण ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया. बता दें कि यह मामला बीते गुरुवार का है. अब मामले की जांच पड़ताल के बाद रेलवे ने स्पष्टीकरण जारी किया है. मीडिया के जरिए सामने आए घटना से जुड़े तथ्यों को रेलवे ने भ्रामक बताकर खारिज कर दिया है.

रेलवे ने कराई मामले की जांच
मामला तूल पकड़ने के बाद रेलवे ने मामले की जांच कराई थी. जांच के निष्‍कर्ष के आधार पर रेलवे ने बताया कि शताब्‍दी ट्रेन का इटावा पहुंचने का समय सुबह 7:15 बजे है. शताब्‍दी का इटावा स्‍टेशन पर 2 मिनट का स्‍टॉपेज है. गुरुवार के दिन ट्रेन इटावा स्‍टेशन पर 7:40 बजे पहुंची. रेलवे में शिकायत करने वाले बुजुर्ग ट्रेन के पावर कार के पास पहुंचे और उसमें चढ़ने की कोशिश करने लगे.

ये देखकर आरपीएफ के स्‍टॉफ ने उन्‍हें अपने कोच में जाने के लिए कहा. लेकिन यात्री की उम्र अधिक थी और स्टॉपेज सिर्फ 2 मिनट का था जिसके चलते उनके कोच में चढ़ने से पहले गाड़ी छूट गई. रेलवे ने बुजुर्ग से इस बात की पुष्टि अफसरों से फोन पर बातचीत में भी की है. रेलवे ने कहा कि बुजुर्ग को दूसरे ट्रेन से भेजने का प्रयास किया गया, लेकिन वे सड़क मार्ग से चले गए.

रेलवे द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट


रेलवे ने कहा कि प्राथमिक जांच में पाया गया कि शिकायत करने वाले बुजुर्ग समय से अपने निर्धारित कोच तक नहीं पहुंच पाए थे. उनसे उनकी वेभभूषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया. न ही भारतीय रेलवे में वेशभूषा के आधार पर किसी से भेदभाव किया जाता है. विभाग हर टिकट धारक को समान सम्‍मान देने की कोशिश करता है.
Loading...

ये भी पढ़ें: दीपावली से पहले इन ट्रेनों में नहीं मिल रहा कंफर्म टिकट!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 7, 2019, 10:41 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...