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टिहरी से छोड़ा पानी तो तबाही, नहीं छोड़ा तो तबाही

News18India
Updated: September 23, 2010, 4:44 AM IST

टिहरी झील में 820 मीटर से ज्यादा पानी जमा होने से 45 गांवों के करीब पचास हजार लोगों को घरबार छोड़ना पड़ा रहा है।

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  • Last Updated: September 23, 2010, 4:44 AM IST
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देहरादून। टिहरी बांध को लेकर उत्तराखंड सरकार और केंद्र के बीच ठन गई है। टिहरी झील में 820 मीटर से ज्यादा पानी जमा होने से 45 गांवों के करीब पचास हजार लोगों को घरबार छोड़ना पड़ा रहा है। वहीं बांध प्रशासन अपने कोटेश्वर बांध को बचाने के लिए कम मात्रा में पानी छोड़ रहा है। बावजूद इसके कोटेश्वर बांध अब टूटने के कगार पर पहुंच गया है। अब राज्य सरकार ने केंद्र की टिहरी बांध मैनेजमेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाही का मन बना लिया है।
उत्तराखंड में भारी बारिश ने एशिया के सबसे बांध टिहरी बांध मैनेजमेंट के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। अगर वो पानी नहीं छोड़ते हैं तो टिहरी के 45 से ज्यादा गांव डूब जाएंगे। अगर पानी छोड़ते हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बाढ़ की चपेट में तो आएगा ही साथ ही ढाई हजार करोड़ रुपए की लागत से बन रहा कोटेश्वर बांध भी पानी की भेंट चढ़ जाएगा। इधर राज्य सरकार और केंद्र में भी ठन गई है। असल में टिहरी बांध केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है। राज्य सरकार के मुताबिक बांध प्रशासन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे 820 मीटर से ज्यादा पानी नहीं रोकेंगे, लेकिन टिहरी बांध में पानी का लेवल 831 तक पहुंच गया है। इससे राज्य में करीब 50 हजार लोगों के विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। अब नाराज राज्य सरकार टिहरी बांध प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाही करने जा रही है।
टिहरी बांध से एक हजार क्यूसेक पानी रोजाना छोड़ा जा रहा है, जिसके चलते कोटेश्वर बांध से पहले दस किलोमीटर लंबी झील बन गई है। जो अब तक 120 करोड़ रुपये की चपत कोटेश्वर बांध को लगा चुकी है। झील का पानी बांध के पावर हॉउस में घुसकर तबाही मचा रहा है और अब अगर और पानी टिहरी बांध से छोड़ा जायेगा तो वो कोटेश्वर बांध को अपने साथ बहा कर ले जायेगा। चूंकि टिहरी बांध मैनेजमेंट केंद्र की संस्था है। लिहाजा राज्य में बांध को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। लेकिन इस राजनीति के चलते नुकसान टिहरी की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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First published: September 23, 2010, 4:44 AM IST
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