भीमा कोरेगांव केस: पार्किंसन से पीड़ित 83 वर्षीय स्टेन स्वामी ने मांगी स्ट्रॉ और सिपर, NIA ने जवाब के लिए मांगा 20 दिन का वक्त

फादर स्टेन स्वामी की फाइल फोटो
फादर स्टेन स्वामी की फाइल फोटो

भीमा-कोरेगांव मामले (Bhima Koregaon Case) में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 83 वर्षीय ट्राइबल राइट्स एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी (Father Stan Swamy) को गिरफ्तार किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 4:03 PM IST
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मुंबई. भीमा कोरेगांव मामले (Bhima Koregaon Case)  में गिरफ्तार किए गए 83 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी (Father Stain Swamy) ने एक स्ट्रॉ और सिपर कप का इस्तेमाल करने के लिए अदालत का रुख किया है. स्वामी पार्किंसंस से पीड़ित हैं. इस रोग में रोजाना की दिनचर्या जैसे पीने-खाने की दिक्कत होती है. कुछ मामलों में रोगी को निगलने में भी दिक्कत होती है. कोर्ट के समक्ष आवेदन में उन्होंने कहा  'मैं एक ग्लास भी नहीं थाम सकता क्योंकि मेरे हाथ पार्किंसंस के कारण हिलते रहते हैं.'

तलोजा सेंट्रल जेल में बंद किए गए स्वामी फिलहाल जेल के अस्पताल में भर्ती हैं. 8 अक्टूबर को रांची स्थित से स्वामी को गिरफ्तार करने वाली एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने एक स्ट्रॉ इस्तेमाल करने के अनुरोध पर जवाब देने के लिए 20 दिन का समय मांगा है.

अब इस मामले की सुनवाई 26 नवंबर को होगी. एनआईए वर्ष 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में झारखंड में आदिवासियों के अधिकारों के लिए सक्रिय फादर स्टेन स्वामी को आठ अक्टूबर को गिरफ्तार कर मुंबई ले गई थी.



 गिरफ्तार किये गये वह 16 वें व्यक्ति हैं स्टेन
इसके बाद 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई में अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया क्योंकि जांच एजेंसी ने उनकी हिरासत नहीं मांगी. स्वामी से पुणे पुलिस और एनआईए पहले दो बार पूछताछ कर चुकी है. एनआईए अधिकारियों के मुताबिक स्वामी के प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) से कथित संबंधों को लेकर गिरफ्तार किया गया. इस मामले में गिरफ्तार किये गये वह 16 वें व्यक्ति हैं.

आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और ‘गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून’ (यूएपीए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. उल्लेखनीय है कि पुणे के पास कोरेगांव भीमा में एक युद्ध स्मारक के पास एक जनवरी 2018 को हिंसा भड़क गई थी.इसके एक दिन पहले ही पुणे शहर में हुए एल्गार परिषद सम्मेलन के दौरान कथित तौर पर उकसाने वाले भाषण दिये गये थे. एनआईए अधिकारियों ने कहा है कि जांच में यह स्थापित हुआ है कि स्वामी भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलिप्त थे.

क्या हैं NIA के आरोप?
एनआईए ने यह भी आरोप लगाया है कि वह समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिये 'षड्यंत्रकारियों' --सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, अरूण फरेरा,वर्णन गोंजाल्वेस, हनी बाबू, शोमा सेन, महेश राउत, वरवर राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बदे के संपर्क में थे. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि स्वामी ने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिये एक सहयोगी के मार्फत धन भी प्राप्त किया था.

अधिकारियों ने दावा किया कि इसके अलावा वह भाकपा (माओवादी) के मुखौटा संगठन ‘परसेक्युटेड प्रीजनर्स सोलीडैरिटी कमेटी’ (पीपीएससी) के संयोजक भी हैं. उन्होंने बताया कि स्वामी के पास से भाकपा (माओवादी) से जुड़े साहित्य, दुष्प्रचार सामग्री तथा संचार से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए थे जो समूह के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिये थे.
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