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पाकिस्तान में महाशिवरात्रि पर गूंजेंगे हर-हर महादेव के जयकारे, कटासराज जाएंगे 88 श्रद्धालु

महाशवरात्रि पर्व से पहले कटासराज में देश-विदेश से आने वाली हिंदू संगतों के स्वागत की पूरी तैयारियां कर ली गई हैं. (फोटो: Shutterstock)

महाशवरात्रि पर्व से पहले कटासराज में देश-विदेश से आने वाली हिंदू संगतों के स्वागत की पूरी तैयारियां कर ली गई हैं. (फोटो: Shutterstock)

Mahashivratri 2021: पाकिस्तान के सिंध प्रांत (Sindh) के चकवाल जिले में कटासराज शिव मंदिर करीब 900 साल पुराना है. इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के मध्य करवाया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2021, 3:03 PM IST
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चंडीगढ़. पाकिस्तान (Pakistan) में हिंदुओं के पवित्र स्थल कटासराज (Katasraj) में महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के पर्व को मनाने के लिए श्रद्धालुओं का जत्था 9 मार्च को अटारी बॉर्डर से रवाना होगा. केंद्रीय सनातन धर्म सभा उत्तरी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रताप बजाज (Shivpratap Bajaj) ने बताया कि इस बार इस जत्थे में 88 श्रद्धालु शामिल होंगे.

ये सभी श्रद्धालु 8 मार्च को अमृतसर के दुर्ग्याणा मंदिर पहुंचेंगे. 9 मार्च को जत्था वाघा-अटारी बॉर्डर से लाहौर के लिए रवाना होगा और 10 मार्च को विश्व प्रसिद्ध मंदिर कटासराज पहुंचेगा. 11 मार्च को कटासराज के अमृत कुंड में पवित्र स्नान करने के बाद मंदिर में दीपमालाएं प्रज्वलित कर महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. यह जत्था 13 मार्च को लव समाधि और पुराने शाही किले के दर्शनों के बाद 14 मार्च को भारत वापिस लौट आएगा.

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महाशवरात्रि पर्व से पहले कटासराज में देश-विदेश से आने वाली हिंदू संगतों के स्वागत की पूरी तैयारियां कर ली गई हैं. एक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के डिप्टी सेक्रेटरी फराज अब्बास का कहना है कि पवित्र सरोवर का पानी साफ कर दिया गया है और सुरक्षा के सारे बंदोबस्त भी पूरे कर लिए गए हैं. इस साल 11 मार्च दिन गुरुवार को महाशिवरात्री का पर्व मनाया जाना है.

क्या है मान्यता
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चकवाल जिले में कटासराज शिव मंदिर करीब 900 साल पुराना है. इस मंदिर का निर्माण छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के मध्य करवाया गया था. मान्यता है कि जब देवी मां जब सती हुईं थीं. भगवान शिव की आंखों से निकले आंसू एक पहाड़ी पर गिरे थे. उनसे ही यहां पर एक जल सरोवर का निर्माण हुआ था. इस जल सरोवर की लंबाई 150 फुट और चौड़ाई 90 फुट है. यह मंदिर महाभारत काल (त्रेतायुग) में भी था. मंदिर से जुड़ी पांडवों की कई कथाएं प्रसिद्ध हैं. इसी सरोवर पर महाभारत काल में यक्ष और पांडवों का वाद-संवाद हुआ था.
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