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आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुईं 88 आतंकी घटनाएं- गृह मंत्रालय ने संसद में पेश किए आंकड़े

News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 3:15 PM IST
आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुईं 88 आतंकी घटनाएं- गृह मंत्रालय ने संसद में पेश किए आंकड़े
गृह मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 2 दिसंबर तक 587 आतंकी हमले हो चुके हैं.

गृह मंत्रालय (Home Ministry) की ओर से लोकसभा (Loksabha) में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 2 दिसंबर तक 587 आतंकी हमले हो चुके हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 329 थी. 2017 में यह कुल आंकड़ा 342 और 2016 में 322 आतंकी हमले हुए थे.

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  • Last Updated: December 3, 2019, 3:15 PM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में 5 अगस्त को आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने के बाद से आतंकी हमलों (Terror Iincidents) में कमी आई है. संसद में आतंकी हमलों से जुड़े सवाल पर गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने आंकड़े पेश किए. रेड्डी ने संसद को बताया, '5 अगस्त 2019 से 27 नवंबर 2019 तक 115 दिनों में 88 ऐसी आतंकी हिंसा की घटनाएं रिकॉर्ड हुईं, जबकि 12 अप्रैल 2019 से 4 अगस्त 2019 तक इस तरह की 116 घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं.'

गृह मंत्रालय की ओर से लोकसभा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 2 दिसंबर तक 587 आतंकी हमले हो चुके हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 329 थी. 2017 में यह कुल आंकड़ा 342 और 2016 में 322 आतंकी हमले हुए थे.

इस साल 86 जवान हुए शहीद
संसद में दी गई लिखित रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में इस साल हुए आतंकी हमलों में 86 जवान शहीद हो चुके हैं, जबकि इस अवधि में पिछले साल 74 जवान शहीद हुए थे.

157 आतंकियों को सेना ने मार गिराया
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि सुरक्षा बलों ने इस साल 2 दिसंबर तक 157 आतंकियों को मार गिराया है, जबकि इस कार्रवाई में अब तक 37 आम लोगों की जान गई है. गृह मंत्रालय ने ये भी बताया कि इस साल अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार आतंकियों ने 84 बार घुसपैठ की कोशिश की है, जिसमें 28 बार वो सफल रहे. आर्टिकल 370 हटाने से पहले 53 बार घुसपैठ की कोशिश हुई थी.

जम्मू-कश्मीर में लगे हैं कई तरह के प्रतिबंध
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बता दें कि आर्टिकल 370 के कई प्रावधान निरस्त करने के बाद से जम्मू-कश्मीर में कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे. खासतौर पर कश्मीर घाटी और मुस्लिम बहुल इलाकों में सुरक्षाबलों की गश्ती बढ़ा दी गई थी. संवेदनशील में इंटरनेट और मोबाइल सर्विस अस्थायी तौर पर बंद कर दी गई थी और कर्फ्यू लगा दिया गया था. यही नहीं, सरकार ने राज्य के मुख्यधारा के अलगाववादी नेताओं को उनके घर पर ही नजरबंद करके रखा था.

समय के साथ-साथ गृह मंत्रालय ने ज्यादातर इलाकों से प्रतिबंध हटा लिए. धीरे-धीरे मोबाइल और इंटरनेट सर्विस भी शुरू कर दी गईं. हालांकि, कश्मीर घाटी में अभी भी मोबाइल सर्विस पर रोक लगी है. वहीं, कुछ अलगाववादी नेताओं को अभी भी नज़रबंद रखा गया है. सरकार का कहना है कि इन्हें जल्द छोड़ दिया जाएगा.


गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला लिया था. सरकार ने आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करते हुए जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस ले लिया था. यही नहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता दी गई थी. 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के नए केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं.

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First published: December 3, 2019, 3:03 PM IST
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