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पांच साल में 9 चेतक और चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, जवानों की जा रही जान, नई खरीद की प्रक्रिया भी हुई कुंद

2016 में सुकना मिलेट्री स्टेशन पर चीता की दुर्घटना में सेना ने अपने तीन अधिकारियों को खोया था. (फाइल फोटो)

2016 में सुकना मिलेट्री स्टेशन पर चीता की दुर्घटना में सेना ने अपने तीन अधिकारियों को खोया था. (फाइल फोटो)

2019 में एक चीता हेलीकॉप्टर भूटान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें दो पायलट की जान चली गई थी. जिनमें से एक भारतीय सेना और दूसरा रॉयल भूटान आर्मी का था. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अकेले थल सेना में ही 2017 से अब तक चेतक और चीता हेलीकॉप्टर की छह दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं.

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नई दिल्ली:  थल, जल और वायु सेना के करीब 9 चेतक और चीता हेलीकॉप्टर 2017 से अब तक पिछले पांच सालों में दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, इस हिसाब से औसतन करीब दो दुर्घटना प्रतिवर्ष हुई हैं. फिर भी भारत के पुराने हो रहे बेड़े के बदले विभिन्न प्रकार के आधुनिक हल्के यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (Light Weight Utility Helicopter) को खरीदने की योजना सरकारी खरीद की लंबी प्रक्रिया में उलझी हुई है. अदालत (Court) ने एक जांच शुरू की है जिससे दुर्घटना का सही पता चल सकेगा.

मंगलवार को पटनीटॉप पर एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें दो सेना अधिकारी मेजर रोहित कुमार (35) और मेजर अनुज राजपूत (28) को अपनी जान गंवानी पड़ी. वे लोग अपने रूटीन भ्रमण पर थे. ये चॉपर एक दूसरे चॉपर के साथ जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ इलाके से उधमपुर बेस पर लौट रहा था. पिछले साल फरवरी में सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर जम्मू के रीएसी इलाके में लैंड करते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. उसमें घटना में किसी को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा था.

थल सेना में छह दुर्घटनाएं
2019 में एक चीता हेलीकॉप्टर भूटान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें दो पायलट की जान चली गई थी. जिनमें से एक भारतीय सेना और दूसरा रॉयल भूटान आर्मी का था. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अकेले थल सेना में ही 2017 से अब तक चेतक और चीता हेलीकॉप्टर की छह दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें पांच लोगों की जान जा चुकी है. इसी तरह 2016 में सुकना मिलेट्री स्टेशन पर चीता की दुर्घटना में सेना ने अपने तीन अधिकारियों को खोया था.

नेवी की बात करें तो 2019 में तकनीकी खामी की वजह से चेतक हेलीकॉप्टर के साथ दुर्घटना हुई थी. चॉपर समुद्र में गिर गया था. इसी तरह नेवी का एक और चेतक हेलीकॉप्टर को तमिलनाडु में आइएनएस राजाली में लैंडिंग में मुश्किल हुई थी लेकिन उस दौरान किसी तरह का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था और किसी की जान भी नहीं गई थी.

लैंड करते हुए हेलीकॉप्टर हुआ दुर्घटनाग्रस्त
भारतीय वायुसेना में 2017 से अब तक दो दुर्घटनाएं दर्ज हुई हैं. जिसमें एक चेतक और दूसरी चीता हेलीकॉप्टर के साथ हुई थी. 2018 की मई में जम्मू-कश्मीर के नाथा टॉप पर चीता हेलीकॉप्टर लैंड करते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और इसी साल इलाहाबाद के पास बमरौली में ट्रेनिंग लेने के दौरान एक आपातकालीन लेंडिंग करते वक्त चेतक हेलीकॉप्टर के साथ दुर्घटना हो गई थी. दोनों ही घटना में किसी भी तरह की जानमाल को नुकसान नहीं पहुंचा था.

2017 में लोकसभा में रक्षा मंत्रालय ने जो डाटा उपलब्ध करवाया था उसके मुताबिक भारतीय थल सेना के 2011 से अब तक 21 चॉपर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं. दुर्घटनाओं का इतना बड़ा आंकड़ा एक बार फिर से पुराने हो रहे चेतक और चीता के बेड़े को आधुनिक चॉपर के साथ बदलने की ज़रूरत पर प्रकाश डालता है. लेकिन विभिन्न प्रकार के चॉपर को बदलने की प्रक्रिया घोंघे की रफ्तार से आगे बढ़ रही है.

आधुनिक हेलीकॉप्टर की सख्त ज़रूरत
भारतीय सशस्त्र बलों के पास 1960 और 1970 से चेतक और चीता का बेड़ा है और ये मुख्यतौर पर समुद्र और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रक्षा बलों को सेवाएं दे रहे हैं. विशेषतौर पर निगरानी, रसद पहुंचाने और बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. भारतीय वायु सेना के तीन फ्लाइंग स्कूलों में पायलट के प्रशिक्षण के लिए भी वे मुख्य हेलीकॉप्टर रहे हैं.

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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की वेबसाइट के मुताबिक वह 275 चीता और 350 चेतक का उत्पादन कर चुके हैं. हालांकि ये हेलीकॉप्टर एक दशक से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं और अब इनमें तमाम तरह की दिक्कते आनें लगी हैं.

एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने न्यूज 18 को बताया कि सिंगल इंजन वाले चेतक और चीता में सबसे बड़ी दिक्कत अप्रचलित एवियोनिक्स है यानी इसमें मूविंग मेप डिस्पले की कमी है. जो ज्यादातर आधुनिक हेलीकॉप्टर में मौजूद है. आधुनिक हेलीकॉप्टर में जमीन से निकट आने की चेतावनी सिस्टम, मौसम से जुड़ा रडार मौजूद होता है जो इन पुराने हेलीकॉप्टर में नहीं है. इसमें ऑटो पायलट सिस्टम भी मौजूद नहीं है जो खराब मौसम में नियंत्रण के मामले में गलत संचालन की आशंका को बढ़ा देता है.

दूसरे रक्षा अधिकारी ने बताया कि सैन्य बल वर्तमान में 25 फीसद रेकी और निगरानी हेलीकॉप्टर की कमी से जूझ रहे हैं. अधिकारी का कहना था कि 77 फीसद हेलीकॉप्टर 30 साल से सेवाएं दे रहे हैं वहीं बाकी बचे 50 साल पुराने हो चुके हैं.

खरीद में भारी विलंब
तीनों रक्षा दल को आधुनिक हेलीकॉप्टर की मांग करते हुए करीब 2 दशक बीत चुके हैं, सभी को मिलाकर करीब 498 हेलीकॉप्टर की ज़रूरत है. 2015 में भारत ने रूस के साथ एक अंतर सरकारी समझौते के तहत 200 दो इंजन वाले केमोव 226 टी हेलीकॉप्टर का सौदा किया था, जिसमें से 135 थल सेना के लिए और 65 वायुसेना के लिए थे. इनमें 60 चॉपर को फ्लाई अवे स्थिति के लिए खरीदा जाना था. और बाकी बचे एचएएल और रूस के संयुक्त उत्पादन का हिस्सा थे. रक्षा सूत्रों के मुताबिक परियोजना हेलीकॉप्टर में देशी सामग्री को लेकर रक्षा मंत्रालय की असहमति की वजह से अटकी हुई है क्योंकि रूस इसके लिए कम देशी सामग्री का प्रस्ताव दे रहा है.

वहीं एक अलग से एचएएल की 187 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर बनाने की परियोजना, जिसमें से 126 थलसेना और 61 वायु सेना के लिए हैं, उनमें भी भारी विलंब हो रहा है. और अगले साल के अंत तक पहले 6 चॉपर को शामिल करने की उम्मीद है. थलसेना के लिए लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की योजना को इस साल बेंगलुरु के एयरो इंडिया से प्रारंभिक परिचालन की अनुमति मिली है. लेकिन सशस्त्र बलों ने चॉपर के टेल रोटर सिस्टम में तकनीकी खामी बताई है.

जलसेना ने भी अपने लिए 111 नेवल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है. अपने पुराने चेतक बेड़े को बदलने के लिए वो रणनीतिक साझेदारी के जरिए खरीदारी करने वाले है, जिसमें से 95 भारतीय साझेदार के साथ बनाए जाने हैं. लेकिन इस योजना पर भी अभी खास प्रगति नहीं हुई है.

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