Home /News /nation /

एक सचेतन धरती के लिए मिट्टी पर ध्यान देने की जरूरत: सद्गुरु

एक सचेतन धरती के लिए मिट्टी पर ध्यान देने की जरूरत: सद्गुरु

सद्गुरु ने कहा कि पर्यावरण के मुद्दों को चुनाव के मुद्दे बनने चाहिए. सरकारों को उनकी पर्यावरण के मुद्दों की चिंता के लिए चुना जाना चाहिए. फाइल फोटो

सद्गुरु ने कहा कि पर्यावरण के मुद्दों को चुनाव के मुद्दे बनने चाहिए. सरकारों को उनकी पर्यावरण के मुद्दों की चिंता के लिए चुना जाना चाहिए. फाइल फोटो

मिट्टी के गंभीर क्षय का मतलब है संपूर्ण जीवन का क्षय. पिछले तीस सालों में, कीट बायोमास अस्सी प्रतिशत घट गया है. पिछले पचास सालों में, हड्डी वाले जीवों की साठ प्रतिशत आबादी गायब हो गई है. ऐसे तमाम आंकड़े हैं, जो विनाश का संकेत करते हैं. ये हम ही हैं, जिन्होंने पिछली दो पीढ़ियों में इसे अंजाम दिया है. खेती के औद्योगिक स्तर और गैरजिम्मेदार औद्योगिक तरीके जो हमने विकसित किए हैं, उनसे हमने मिट्टी को नुकसान पहुंचाया है.

अधिक पढ़ें ...

    (सद्गुरु)
    हमारा शरीर असल में मिट्टी और पानी है. हमारी मिट्टी और पानी की गुणवत्ता हमारे भोजन, हमारे शरीर और हमारे जीवन की गुणवत्ता को तय करती है. यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हकीकत है कि पिछली दो पीढ़ियों ने, लगभग साठ से अस्सी सालों में हमने इस धरती पर मिट्टी और पानी की गुणवत्ता को गंभीरता से प्रभावित किया है. हमने मिट्टी को, और अपने शरीर को कमजोर बनाया है और हम धीरे-धीरे इसे निर्जीव बना रहे हैं. आपने डायनासोर के लुप्त होने के बारे में सुना होगा लेकिन अब हम मिट्टी के लुप्त होने की बात कर रहे हैं. मिट्टी का सूक्ष्मजीवी जीवन जो ज्यादातर ऊपरी नौ इंच की परत में रहता है, क्षीण हो गया है. अगर मिट्टी में कोई जीवन नहीं रहेगा, तो कोई फसल नहीं उगेगी. इसे दर्शाने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण है कि इस धरती पर हमारे पास कृषि योग्य मिट्टी सिर्फ अस्सी से सौ फसलें ही दे पाएगी – ज्यादा से ज्यादा पैंतालीस से साठ साल, उसके बाद धरती पर गंभीर खाद्य समस्या का आना लाजिमी है.

    मिट्टी के गंभीर क्षय का मतलब है संपूर्ण जीवन का क्षय. पिछले तीस सालों में, कीट बायोमास अस्सी प्रतिशत घट गया है. पिछले पचास सालों में, हड्डी वाले जीवों की साठ प्रतिशत आबादी गायब हो गई है. ऐसे तमामों आंकड़े हैं जो विनाश का संकेत करते हैं. ये हम ही हैं, जिन्होंने पिछली दो पीढ़ियों में इसे अंजाम दिया है. खेती के औद्योगिक स्तर और गैरजिम्मेदार औद्योगिक तरीके जो हमने विकसित किए हैं, उनसे हमने मिट्टी को नुकसान पहुंचाया है. हमें मिट्टी को जीवित, जीवंत और जीवन से भरपूर रखना है. सिर्फ तभी यह हमारे जीवन को और हर दूसरे जीवन को पोषित करेगी.

    पर्यावरण का असली मुद्दा
    मुझसे कई बार पूछा गया है, ‘पिछले सौ सालों में पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया गया है, उसे पलटने के लिए दुनिया को किन तीन मुख्य चीजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए?’ मैं कहता हूँ, ‘तीन चीजें हैं, मिट्टी, मिट्टी, और मिट्टी.’ हम कई अलग-अलग मुद्दों की बात करते हैं. हम कार्बन उत्सर्जन और विभिन्न स्तरों पर प्रदूषण की बात करते हैं. अभी, दुनिया में एक गलतफहमी है जहां शहरी मुद्दों को पर्यावरण के मुद्दों की तरह दर्शाया जा रहा है. अगर प्लास्टिक बैग आपके शहर में चारों ओर फैले हैं, तो यह एक शहरी मुद्दा है, पर्यावरण का नहीं है. इसे नियम-कानून को सख्ती से लागू करने और थोड़ी जागरूकता बढ़ाने से किया जा सकता है.

    अगर हमारी नदियां प्रदूषित हैं तो उसे दो साल में ठीक किया जा सकता है, अगर आप आवश्यक शुद्धिकरण प्लांट लगाते हैं और नियमों को लागू करते हैं. दुनिया में हम अपनी गैरजिम्मेदाराना हरकत पर पर्यावरण मुद्दे का ठप्पा लगा रहे हैं. पर्यावरण का असली मुद्दा मिट्टी है. अगर मिट्टी समृद्ध है तो पानी मौजूद होगा. अगर मिट्टी समृद्ध है और उस पर पर्याप्त वनस्पतियां उगी हैं, तो हवा शुद्ध हो जाएगी.

    हमारे ध्यान को मिट्टी की ओर जाना होगा. इसके एक हिस्से के रूप में, हम ‘कॉन्शस प्लैनेट’ यानी सचेतन धरती अभियान शुरू कर रहे हैं. अभी, ऐसा लगता है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण अमीर और संभ्रांत वर्ग की चर्चा दायरा है. इसे बदलना होगा. हर इंसान को उस खतरे के प्रति जागरूक होना होगा जिसका सामना हम कर रहे हैं.

    पर्यावरण के मुद्दों को चुनाव के मुद्दे बनने चाहिए. सरकारों को उनकी पर्यावरण के मुद्दों की चिंता के लिए चुना जाना चाहिए. सचेतन धरती अभियान के जरिए, हम यह देख रहे हैं कि कैसे सारे लोकतांत्रिक देशों में मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को एक सचेतन धरती की सोच की ओर बढ़ाया जाए और कैसे हम अपनी मिट्टी को संभालें, पुनर्जीवित करें, और पुनः जीवंत बनाएं.

    भारत में पचास सर्वाधिक प्रभावशाली गिने जाने वाले लोगों में, सद्गुरु एक योगी, दिव्यदर्शी, और युगदृष्टा हैं और न्यूयार्क टाइम्स ने उन्हें सबसे प्रचलित लेखक बताया है. 2017 में भारत सरकार ने सद्गुरु को उनके अनूठे और विशिष्ट कार्यों के लिए पद्मविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है.

    (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

    Tags: Earth, Environment, Farming

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर