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पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों से AFSPA हटाने का निर्णय इरोम चानू शर्मिला को अच्छा लगा, लेकिन उनका एक फैसला उनके ही लोगों को खराब क्यों लगा था, जानिए

केंद्र सरकार ने असम, सहित पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों से AFSPA हटाने का निर्णय लिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

केंद्र सरकार ने असम, सहित पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों से AFSPA हटाने का निर्णय लिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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नई दिल्ली. इरोम चानू शर्मिला (Irom Chanu Sharmila) को देश ही नहीं दुनिया जानती है. वे ‘मणिपुर की आयरन लेडी’ (Iron Lady Of Manipur) कहलाती हैं. यानी फौलादी इरादों और हौसलों वाली महिला. मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ (Amnesty International) ने 2013 में उन्हें ‘प्रिज़नर ऑफ कंसाइंस’ (Prisoner of Conscience) का तमगा दिया है. मतलब ऐसा जो अपनी अंतरात्मा की आवाज का कैदी हो, उसके हिसाब से चलता हो. उनके काम ही ऐसे रहे कि उन्हें इस तरह के विशेषण दिए गए. उन्होंने 16 साल तक अपने गृह राज्य मणिपुर के लोगों के लिए भूखे-प्यासे संघर्ष किया. ताकि उन्हें विवादित एएफएसपीए (AFSPA) से मुक्ति मिल सके. ऐसे में, अब जबकि केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि वह मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों से एएफएसपीए हटा रही है, तो इरोम चानू शर्मिला (Irom Chanu Sharmila) को इससे अच्छा लगना स्वाभाविक है. लेकिन इसी संदर्भ में उस वक्त का जिक्र भी प्रासंगिक हो जाता है, जब इरोम का अपना एक फैसला उनके ही लोगों को अच्छा नहीं लगा था. जानते हैं, उसके बारे में और साथ में यह भी कि इरोम इस वक्त आखिर कहां हैं, क्या कर रही हैं.

वह 1 घटना और 16 साल का झकझोर देने वाला संघर्ष
मणिपुर में एक जगह है मैलोम, जो इरोम चानू शर्मिला से गहरा ताल्लुक रखती है. इसी जगह, 2 नवंबर 2000 की तारीख को असम राइफल्स के जवानों ने कथित तौर पर 10 लोगों को मार दिया था. ये लोग बस अड्‌डे पर खड़े अपनी गाड़ी का इंतजार कर रहे थे. लेकिन सुरक्षा बल के जवानों ने उग्रवादी समझकर इन पर गोलियां चला दीं. मारे गए लोगों में एक 62 साल की महिला लीसंगबम इबेटोंबी और 18 साल का लड़का सिनम चंद्रमणि भी थे. सिनम तो 1988 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार जीतने वालों में शामिल रहा था. जाहिर है, इस घटना ने हर संवेदनशील मन को झकझोरा. इनमें 28 साल की इरोम चानू शर्मिला (Irom Chanu Sharmila) भी थीं. कवि हृदय और गांधी को पढ़ने वाली इरोम से चुप नहीं रहा गया. उन्होंने 3 दिन बाद यानी 5 नवंबर से मैलोम में ही भूख हड़ताल शुरू कर दी. ऐलान किया कि जब तक मणिपुर सहित समूचे पूर्वोत्तर से एएफएसपीए (AFSPA) हटा नहीं दिया जाता, वे भूखी-प्यासी रहेंगी. अपने बाल भी नहीं बनाएंगी. इस ऐलान के साथ ही सरकार में हड़कंप मच गया. उन्हें आत्महत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. जबरन नाक में नली डालकर तरल पदार्थ दिए जाने लगे. फिर यह सिलसिला 2016 तक यूं ही चलता रहा. लेकिन न इरोम चानू शर्मिला टस से मस हुईं, न एएफएसपीए ही हटा.  

और फिर वह मोड़, जब लोगों की नाराजगी उनके संघर्ष पर भारी पड़ी

Tags: AFSPA, Hindi news, Manipur

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