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बदला हुआ रहा इस साल के मानसून का हाल, चक्रवात के बाद होने जा रही विदाई

इस साल मानसून का रुख पिछले सालों की तुलना में काफी बदला हुआ रहा (सांकेतिक तस्वीर)

इस साल मानसून का रुख पिछले सालों की तुलना में काफी बदला हुआ रहा (सांकेतिक तस्वीर)

मौसम के पहले सघन डिप्रेशन के चलते ओडिशा में 24 घंटे के भीतर 400 मिमी बारिश दर्ज की गई, इसी तरह के एक और कम दबाव के सिस्टम के चलते 13 सितंबर को गुजरात में भी उतनी मात्रा में बारिश हुई. इस तरह एक और कब दबाव के सिस्टम की वजह से गुलाब चक्रवात आया जिसकी वजह से आंध्रप्रदेश और दक्षिणी उड़ीसा के तटीय इलाके सराबोर हो गए.

  • News18Hindi
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    इस साल मानसून की विदाई में बस तीन दिन रह गए हैं. इसके बाद चार महीने चलने वाले दक्षिण पश्चिमी मानसून की आधिकारिक विदाई की घोषणा कर दी जाएगी. इससे पहले तक देश में इस साल 850.3 मिमी बारिश हुई जो सामान्य से 2 फीसदी कम थी. जुलाई से लेकर सितंबर 21 तक बाऱिश सामान्य से नीचे थी. भारत भर की कुल बारिश का जोड़ पिछले हफ्ते ही सामान्य स्तर को छू पाया. इसके पीछे मुख्य वजह उत्तरपश्चिम ( 3 जुलाई से अब तक कम वर्षा), और पूर्व एवं उत्तरपूर्वी भारत ( जुलाई से अब तक) में कम वर्षा का होना रहा.

    मध्यभारत में भी पिछले हफ्ते बारिश का स्तर सामान्य पर आया इससे पहले जुलाई से लेकर सितंबर 15 तक यहां पर भी कम वर्षा ही दर्ज की गई थी. कुल बाऱिश की बात की जाए तो 1 जून से 27 सितंबर तक उत्तरपश्चिम में -4 फीसदी, और पूर्व एवं उत्तरपूर्वी भारत में -13 फीसदी वर्षा दर्ज की गई. वही इसके विपरीत दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में वर्षा का सकारात्मक रूप देखने को मिला और यहां पर अब तक सामान्य से 10 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. इस बार केरल में मानसून ने सही वक्त पर दस्तक दी थी और यास चक्रवात के अवशेषों के चलते मध्यभारत में जून में 1 फीसदी ज्यादा बाऱिश दर्ज की गई थी. इसके चलते दक्षिण प्रायद्वीप और, पूर्व, उत्तरपूर्व और भारत के मध्य हिस्सों में जल्दी बारिश शुरू हो गई थी. और जून के अंत तक देश में + 9.6 फीसदी बाऱिश हो चुकी थी. इसके बाद पूरे देश में अगले 23 दिनों तक सूखा रहा, और पूरे देश में मानसून 13 जुलाई तक पहुंचा जो कि अपने नियत समय से 5 दिन पीछे था. तब तक देश भर में जुलाई की कुल बारिश का प्रतिशत -6.8 फीसदी हो चुका था. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगस्त में भी मानसून कमजोर ही रहना था, लेकिन उत्तराखंड, मध्यप्रदेश और झारखंड में बारिश की अति देखने को मिली.

    सितंबर में मानसून ने फिर तेजी पकड़ी और अब तक चार कम दबाव के सिस्टम ने मध्य और उत्तरपश्चिमी क्षेत्र जहां बहुत कम बारिश हुई थी वहां पर कमी को पूरा कर दिया है. मौसम के पहले सघन डिप्रेशन के चलते ओडिशा में 24 घंटे के भीतर 400 मिमी बारिश दर्ज की गई, इसी तरह के एक और कम दबाव के सिस्टम के चलते 13 सितंबर को गुजरात में भी उतनी मात्रा में बारिश हुई. इस तरह एक और कब दबाव के सिस्टम की वजह से गुलाब चक्रवात आया जिसकी वजह से आंध्रप्रदेश और दक्षिणी उड़ीसा के तटीय इलाके सराबोर हो गए.

    बारिश के रुख में बड़ा बदलाव 
    नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा भारत के सबसे ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र माने जाते हैं, यहां पर लगातार 17 हफ्तों तक बाऱिश की कमी देखी गई, यानी 2 जून से लगभग पूरा मौसम. अरुणाचल प्रदेश में मानसून के 14 हफ्ते बाऱिश दर्ज नहीं की गई, वहीं असम और मेघालय में मानसून के 6 हफ्ते सूखे रहे.

    इसी तरह केरल में 12 हफ्ते, जिसमें 11 हफ्ते तो सीधे सीधे 23 जून से 1 सितंबर तक सूखे चले गए. और तो और लक्षद्वीप में भी 15 हफ्ते बाऱिश की कमी दर्ज की गई. उड़ीसा में 10 हफ्ते यानी 7 जुलाई से सितंबर 8 तक, गुजरात और सौराष्ट्र-कच्छ में 12 और 11 हफ्ते मानसून कमजोर रहा.

    वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, सिक्किम, गंगा क्षेत्र का पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना,रायलसीमा और कर्नाटक में पूरे 17 हफ्ते बाऱिश अपने जोरों पर रही इस अतिवर्षा ने पूरे देश की कुल बाऱिश के प्रतिशत को सामान्य की श्रेणी में ला दिया. उत्तराखंड, झारखंढ, तटीय आंध्रा, हरियाणा दिल्ली और चंडीगढ़ ने 16 हफ्तों में से एक या दो हफ्ते बारिश की कमी देखी.

    अत्यंत सूखा अगस्त
    लंबी अवधि की औसत (एलपीए) बाऱिश में -24 कमी के साथ 1901 के बाद छठवीं बार इतना सूखा अगस्त रहा, 2009 के बाद दूसरी बार है जब अगस्त में इतनी कम वर्षा दर्ज की गई. 18 दिनों तक दो सूखी अवधि चली, और 11 अगस्त से 25 तक लगातार 3 हफ्तों तक मानसून कमजोर रहा. मौसम विभाग के मुताबिक इसके पीछे कई वजह जिम्मेदार थी.

    कम दबाव का सिस्टम- यह बारिश के लिए मुख्य वजह होता है और चार सामान्य सिस्टम के बजाए , अगस्त में बंगाल की खाड़ी से तीन सिस्टम में से केवल दो ही बने. इन दो सिस्टम की बदौलत कुछ पूर्ति हो सकी.

    मानसून ट्रफ की स्थिति – कम दबाव का सिस्टम नहीं बनने से, मानसून ट्रफ अगस्त के ज्यादातर दिनों में उत्तर की तरफ रहा, जिसकी वजह से उत्तराखंड, हिमाचर और बिहार के हिस्सो में बारिश ना के बराबर हुई.

    पश्चिमी प्रशांत तूफान – इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, पुणे के क्लाइमेट रिसर्च एंड सर्विस के प्रमुख, डी शिवानंद पाई का कहना है कि इसकी वजह से अगस्त में म्यामांर को पार करके अच्छी बारिश होती है, इसके अवशेष रहते हैं फिर बंगाल की खाड़ी में ये दोबारा प्रवेश करता है जिससे ताजा मौसम का सिस्टम तैयार होता है जो पूर्वी तट के साथ भारत पहुंचता है. इस बार अगस्त में तूफान की सक्रियता कम थी, और बमुश्किल इसके अंश बंगाल की खाड़ी तक पहुंचे. बंगाल की खाड़ी और उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने के बजाए जो तूफान विकसित भी हुए वो उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ गए. कम दबाव के सिस्टम की कमी की वजह से मध्य भारत में बारिश की कमी देखी गई.

    नकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) – मानसून की शुरूआत से ही आईओडी उसके नकारात्मक चरण में था. अध्ययन बताते हैं कि आईओडी के नकारात्मक चरण की वजह से अपतटीय ट्रफ में कम बाऱिश हुई है. अपतटीय ट्रफ आमतौर पर गुजरात और केरल के बीच चलता है, जो अरब सागर से नमी को आकर्षित करता है, जिसकी वजह से गुजरात और तटीय महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल में भारी बारिश होती है. यह अपतटीय ट्रफ इस महीने लगभग नदारद रहा, और बगैर अपतटीय ट्रफ के दक्षिण पश्चिमी मानसूनी हवा जो पश्चिमी तट पर भारी बाऱिश लाती है उनमें उल्लेखनीय स्तर पर कमी दर्ज की गई.

    हवाओं की गड़बड़ी- पूर्व की ओर बढ़ने वाले ये बादल 30-60 दिनों के चक्र के दौरान भूमध्य रेखा के साथ बारिश लाती है. अगस्त में ये हवाएं अफ्रीका के पास मौजूद थी जिसकी वजह से भारत में बादल बनने में मदद नहीं मिल रही थी.

    अनवरत गिरना
    सामान्यतौर पर मानसून की विदाई की तारीख 17 सितंबर है, मौसम विभाग के मुताबिक लेकिन इस साल मानसून 6 अक्टूबर से पहले नहीं जाने वाला है. इस तरह से 1975 के बाद ये दूसरी बार होगा जब मानसून की विदाई में इतनी देर होगी. 2019 में मानसून ने 9 अक्टूबर को विदा ली थी. देश में अब तक सितंबर के महीने में 205.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो 29.3 फीसदी ज्यादा है. गुलाब चक्रवात के चलते आगामी तीन दिन और बारिश होने का अनुमान है. जिसके बाद लगता है कि बची खुची कसर भी पूरी हो जाएगी और जाते जाते मानसून सामान्य होकर जाएगा.

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