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छात्रों को शरण देने वाले प्रोफेसर के परिवार में भय का माहौल, कहा- हम JNU में नहीं रहेंगे

News18Hindi
Updated: January 6, 2020, 8:26 PM IST
छात्रों को शरण देने वाले प्रोफेसर के परिवार में भय का माहौल, कहा- हम JNU में नहीं रहेंगे
पत्नी सुनीता के साथ प्रोफेसर शिव प्रकाश

JNU में उर्दू पढ़ाने वाले प्रोफेसर शिव प्रकाश ने एक छात्र को अपने घर में पनाह दी. अब उनका परिवार डरा हुआ है.

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  • Last Updated: January 6, 2020, 8:26 PM IST
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एरम आगा
नई दिल्ली. 
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में रविवार शाम जब हिंसा का दौर शुरू हुआ तो वहां मौजूद लोगों ने एक दूसरे की मदद की लेकिन अब उनके लिए भी माहौल ठीक नहीं लग रहा है. विश्वविद्यालय में उर्दू पढ़ाने वाले प्रोफेसर शिव प्रकाश ने यूनिवर्सिटी से ही फारसी पढ़ने वाले छात्र गालिब की मदद की. इस दौरान नकाबपोश लोगों की भीड़ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रही थी. छात्रों और प्रोफेसरों पर हमला कर रही थी.

प्रकाश ने बताया कि ट्रांजिट हाउस के करीब उनकी मुलाकात गालिब से हुई जब वह हमलावर भीड़ से बचने की कोशिश कर रहा था. उन्होंने बताया कि कुछ डरे हुए छात्र सेल्फ डिफेंस में पेपर स्प्रे का इस्तेमाल कर रहे थे.उन्होंने बताया अन्य लोगों ने प्रोफेसरों के घर गए और शरण मांगी.

प्रकाश की पत्नी सुनीता देवी ने कहा कि 'नकाबपोश गुंडे कैंपस के अंदर आ गए थे. सभी के चेहरे ढके थे.' उन्होंने कहा कि 'रविवार को शाम 7:30 बजे के आसपास अचानक बहुत शोर हुआ और ऐसा लगा कि जल्द ही दंगा हो सकता है.'

'भीड़ दरवाजे के करीब आई और खटकाया'
सुनीता ने बताया कि 'भीड़ दरवाजे के करीब आई और खटकाया. इस दौरान वह अपने दो बच्चों और पति के साथ कमरे में थीं.' सुनीता ने दावा किया,  'उनमें से एक ने कहा, ये तो प्रोफेसर का घर है, हम यहां कुछ नहीं करेंगे. इसके बाद, वे चले गए.'

उन्होंने बताया कि 'कल रात मेरे घर पर भीड़ आई थी. मेरे पति बेडरूम में थे. वह गालिब को घर ले आए और एक अन्य छात्र और था जिसे मैं नहीं जानती थी. हमने उसे बाथरूम में छुपा दिया. मैंने उन्हें फोन पर अपने माता-पिता से बात करते हुए सुना. वह कैंपस में असुरक्षित महसूस कर रहा था और उसके परिवार के सदस्य फोन करते रहे. जब भीड़ ने दरवाजा पीटा तो मैंने उसे अंदर भेज दिया.'प्रकाश 2005 से कैंपस में रह रहे हैं और पिछले छह साल से वह विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा था. देवी ने कहा, "मैं सुबह 6:30 बजे सोई थी और सुबह से कुछ नहीं खाया. मैं इतना डर ​​गई हूं कि अब मुझे बस कैंपस छोड़ना है. हम अब यहां सुरक्षित नहीं हैं.'

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First published: January 6, 2020, 8:18 PM IST
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