एक महीने के भीतर उत्तर प्रदेश ने कैसे किया कोरोना पर नियंत्रण

यूपी में कोरोना संक्रमण को लेकर सीएम योगी का बयान. (फाइल फोटो)

यूपी में कोरोना संक्रमण को लेकर सीएम योगी का बयान. (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मामलों में भारी गिरावट देखने को मिली है और बीते रविवार महज़ 4,844 मामले दर्ज किये गए, इसे मिलाकर अब प्रदेश में कुल सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 85,000 रह गई है. महज़ एक महीने में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने कैसे किया कोरोना पर काबू- एक रिपोर्ट

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बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न राज्यों की बैठक के दौरान, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने उत्तर प्रदेश के लिए चेतावनी जारी की थी. आयोग के सदस्य का अनुमान था कि प्रदेश में रोज़ 1.19 लाख मामले तक आ सकते हैं और उत्तर प्रदेश कोरोना के नए आने वाले मामलों में महाराष्ट्र को पीछे छोड़ सकता है.

इस बैठक में योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे और उस वक्त कोरोना से पीड़ित भी थे. ये अनुमान सही होता सा लग रहा था और उत्तर प्रदेश में अगले दिन रिकॉर्ड 38,055 मामले सामने आए और पूरे प्रदेश भर में सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 2.88 लाख पहुंच गई. यही नहीं जहां प्रदेश की राजधानी में सबसे ज्यादा 5,461 मामले आए वहीं प्रधानमंत्री के क्षेत्र वाराणसी कोरोना के 2,786 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर था. एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज 18 को बताया कि उसी दिन आदित्यनाथ ने साफ कर दिया था कि ये आकलन सही साबित नहीं होना चाहिए, इसलिए सभी लोगों को कमर कसने की ज़रूरत है.

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बीते रविवार जहां 4,844 मामले सामने आए वहीं सक्रिय मामलों की संख्या भी घटकर 85,000 पर पहुंच गई है. खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश शायद उन पहले राज्यों में से हो सकता है जो 1 जून से लॉकडाउन में ढील दे, लेकिन इसके लिए सक्रिय मामले और नए मामलों में लगातार गिरावट आना ज़रूरी होगा. हालांकि यहां प्रदेश के लिए एक चिंता अभी भी बनी हुई है, वो हैं मरने वालों की संख्या, जिसमें एक महीने में कोई खास अंतर देखने को नहीं मिल रहा है.
इस दौरान 30 अप्रैल को कोविड से उबरने के बाद आदित्यनाथ ने कई जिलों का दौरा किया और कोरोना के हालात को समझने के लिए वह बाकी बचे जिलों का अगले हफ्ते दौरा करेंगे. कई अधिकारियों ने न्यूज 18 को बताया कि मुख्यमंत्री के दौरे का स्थानीय प्रशासन पर बहुत फर्क पड़ा और लोगों में ये संदेश भी पहुंचा है कि हालात पर काबू पाने में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जहां दूसरे राज्य रोज़ाना के मामले कम दिखाने के लिए कम कोविड जांच करवा रहे हैं वही उत्तर प्रदेश में जांच की संख्या में बढोतरी की गयी.

प्रदेश भर में रिकॉर्ड 3.17 लाख जांच की गई जिसमें 5000 से भी कम लोग पॉजिटिव पाए गए, यानि पॉजिटिव दर गिरकर 1.5 फीसद पर आ गई है. उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस पर काबू पाने में जांच का दायरा बढ़ाने ने महती भूमिका निभाई है, इसके साथ ही मरीज को ट्रैक करना और उसका इलाज करना भी इसमें शामिल है.

कोरोना पर काबू आंकड़ों की बाजीगरी- विपक्ष



उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए न्यूज18 को बताया कि ये सब आंकड़ों की बाजीगरी है, महामारी ने गांवों पर बुरा असर डाला है, गंगा में तैरती लाशें, प्रयागराज में रेतों में दफन शरीर हकीकत बयान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से प्रदेश के गांवों में लाखों लोगों ने जान गंवाई हैं, लेकिन सभी आंकड़ों को दबा लिया गया है और सरकारी आंकड़ों का कहना है कि महज़ 19.209 लोग ही मारे गए हैं. यही नहीं लल्लू ने जांच मॉडल पर भी सवाल खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि ज्यादातर लोगों का रेपिड एंटीजन टेस्ट करवाया गया है क्योंकि इसमें अधिकांश रिपोर्ट नेगेटिव आती है, जबकि आरटी-पीसीआर ज्यादा भरोसेमंद जांच है.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री अगर राज्य का दौरा कर रहे हैं तो उन्हें एक चक्कर गंगा के किनारे भी लगा लेना चाहिए ताकि उन्हें पता चल सके कि देश की सच्चाई क्या है और उनके अधिकारी उनसे क्या झूठ छिपा रहे हैं. वहीं लल्लू का कहना है कि जनसंख्या के हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश टीकाकरण के मामले में भी सबसे पिछड़ा हुआ है, जितनी वैक्सीन प्रदेश में लगाई गई हैं उतनी इससे कहीं छोटे राज्य राजस्थान में लग चुकी हैं और महाराष्ट्र टीकाकरण के मामले में प्रदेश से आगे निकल चुका है, 23 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में अभी तक 33 लाख लोगों को ही दोनों डोज़ लग पाए हैं.

विपक्ष कर रहा है राजनीति

इसके जवाब में प्रदेश सरकार के नेता इसे विपक्ष का राजनीतिक हथकंडा बता रहे हैं. सत्ता के वरिष्ठ नेता ने न्यूज 18 से बात करते हुए बताया कि चूंकि प्रदेश में 10 महीने बाद ही चुनाव होना है और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पक्ष के पास कोई ठोस मामला नहीं है इसलिए ये कोविड महामारी की आड़ लेकर राजनीति की जा रही है. मुख्यमंत्री के काल में प्रदेश एक भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बना, दूसरी लहर के बाद उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है जहां चुनाव होना है, ऐसे में विपक्ष अपने लिए जमीन तलाशने की नाकाम कोशिश में जुटा हुआ है. कोई भी राज्य अपने यहां होने वाली मौतों को छिपा नहीं सकता है और अस्पतालों में खाली पड़े बिस्तर और ऑक्सीजन इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार ने किस तरह से कोरोना पर नियंत्रण पाया है.

यही नहीं योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार, मृत्युंजय कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपने गोरखपुर में सांसद होने के दौरान के अनुभव का लाभ उठाया जब गोरखनाथ अस्पताल में एन्सिफेलाइटिस से बेकाबू हुए हालातों को संभाला गया था, ठीक उसी तरह से दूसरी लहर के दौरान ही सारे सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए वॉर्ड तैयार कर लिए है गए हैं क्योंकि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों पर असर डाल सकती है. प्रधानमंत्री ने भी मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना की थी.

प्रदेश में अब तक 1.63 करोड़ वैक्सीन लगाई जा चुकी है जिसे आने वाले दिनों  में तेजी से बढ़ाए जाने की योजना पर काम चल रहा है. इसके तहत दूरदराज के गांवों तक वैक्सीन पहुंचाने पर काम चल रहा है और जल्दी ही परिणाम भी आने लगेंगे.

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