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राजा के निशाने पर विनोद राय, कहा-2जी मामला सियासी साजिश

राजा के निशाने पर विनोद राय, कहा-2जी मामला सियासी साजिश

अपनी किताब में राजा ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय की रिपोर्ट पर निशाना साधा है.

अपनी किताब में राजा ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय की रिपोर्ट पर निशाना साधा है.

किताब में ए राजा ने दावा किया है कि मनमोहन सिंह को उनके सलाहकारों द्वारा बार-बार गलत सलाह दी गई. राजा को लगता है कि जहां तत्कालीन पीएम ने उनका बचाव किया वहीं उनको ये भी लगता है कि विनोद राय तो किसी बड़ी साजिश के सूत्रधार थे.

  • News18.com
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    2जी मामले पर पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा की किताब प्रकाशित होने वाली है. इस किताब में 2जी मामले से जुड़े कई बड़े खुलासे होंगे. ए राजा ने अपनी किताब में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी  और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय की रिपोर्ट पर निशाना साधा है.

    सीएनएन-न्यूज 18 के कार्यकारी संपादक भूपेंद्र चौबे ने ए राजा कि किताब '2जी सागा अनफोल्ड राजा'  के अनुसार बताया कि किताब में ए राजा ने दावा किया है कि मनमोहन सिंह को उनके सलाहकारों द्वारा बार-बार गलत सलाह दी गई. राजा की दूरसंचार नीति को स्वीकार करने के बावजूद डीएमके नेता को गिरफ्तार कर लिया गया. 15 महीने के लिए जेल भेजकर एक निष्क्रिय पर्यवेक्षक बने रहने का फैसला किया.

    'मामले पर मनमोहन की चुप्पी देश की सामूहिक चुप्पी जैसी थी'
    राजा का दावा है कि इस मामले पर मनमोहन सिंह की चुप्पी हमारे देश की सामूहिक चुप्पी जैसी थी. उन्होंने यह भी कहा कि पीएमओ पर टेलीकॉम लॉबियों का भी प्रभाव था. उन्होंने राय द्वारा दी गई कैग रिपोर्ट के बारे में कहा, "वह ठीक वैसी ही थी, जैसे एक बिल्ली अपनी आंखें बंद करने के बाद कहती है कि ब्रह्मांड अंधकारमय है."



    'यूपीए के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश'
    राजा ने कहा, " यह मेरा दृढ़ विश्वास है कि यूपीए के खिलाफ एक राजनीतिक साजिश थी, जिसकी बंदूक राय के कंधे पर रखकर चलाई गई थी."

    'राय की रिपोर्ट 2जी मामले पर घोटाले का आधार बनी'
    राजा का कहना है कि राय की रिपोर्ट, जो 2जी मामले पर घोटाले का आधार बनी, जो मनमोहन की अगुवाई वाली यूपीए -2 सरकार के खिलाफ गलत तरीके से पेश की गई बेबुनियादी और झूठे आरोपों की श्रृंखला का एक हिस्सा थी.

    'राय की रिपोर्ट केवल कचरा है'
    राजा ने राय को मामले का 'सूत्रधार' बताया, जिसने इस मामले को और अधिक कुटिल बनाया. राजा ने कहा कि उनकी रिपोर्ट केवल कचरा है, जो सर्वसम्मति से कचरे के डिब्बे के लिए उपयुक्त मानी गई. राजा का आरोप है कि पूर्व कैग को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में गवाह के रूप में बुलाया जाना चाहिए था.

    'मनमोहन सिंह को नहीं थी सीबीआई छापे की जानकारी'
    राजा ने किताब में लिखा है कि स्पेक्ट्रम आवंटन के संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री सिंह को सीबीआई छापे के बारे में कुछ पता नहीं था. "22 अक्टूबर 2009 को (सीबीआई ने टेलीकॉम मिनिस्ट्री और कुछ दूरसंचार ऑपरेटरों के कार्यालयों पर छापे के बाद) मैं लगभग 7.00 बजे साउथ ब्लॉक में अपने कार्यालय में प्रधानमंत्री से मिला.  T.K.A. नायर (पीएमओ में तत्कालीन प्रधान सचिव) भी मौजूद थे. लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि जब प्रधानमंत्री सिंह को सीबीआई के छापे के बारे में पता चला तो वो चकित रह गए थे."

    'PMO पत्र में लिखी बातें लॉबी के व्यापारिक हितों से मेल खाती है'
    राजा का दावा है कि यूपीए सरकार में दूरसंचार मंत्री के रूप में, उन्होंने टेलिकॉम लॉबी के खिलाफ सिर्फ स्पेक्ट्रम नीलामी नीति का मसौदा तैयार करने के लिए लड़ाई लड़ी थी. फिर एक दिन उन्हें पीएमओ से एक पत्र मिला, क्योंकि पॉलिसी ड्राफ्ट अंतिम चरण में थी. उस पत्र की सामग्री लॉबी के व्यापारिक हितों से मेल खाती थी.

    मनमोहन के शब्द घायल करने के लिए काफी थे

    मनमोहन सिंह द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द घायल करने के लिए काफी थे'. ए राजा ने लिखा कि पीएमओ के इस पत्र को देखकर मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या वाकई ये पत्र पीएमओ ने तैयार किया है. यह अब भी मेरे लिए एक पहेली है कि पीएम के यह पत्र भेजने का क्या कारण हो सकता है. मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे किसी भी पत्र को पीएम के हस्ताक्षर के साथ नहीं भेजना चाहिए था. पत्र में मनमोहन सिंह द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द उन्हें घायल करने के लिए काफी थे.

    मीडिया की खबरों से प्रभावित हो गए थे मनमोहन

    राजा ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि मनमोहन सिंह ने निजी तौर पर कबूल किया कि मीडिया की खबरों से वो काफी हद तक प्रभावित हो गए थे. राजा ने कहा कि दूरसंचार मंत्रालय के फैसले पर लूप होने के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए. 'मेरी मदद के लिए न तो प्रधानमंत्री आगे आए और न ही वित्तमंत्री'. राजा ने लिखा कि जब प्रशासनिक निकाय (सीवीसी, सीबीआई, जेपीसी, सुप्रीम कोर्ट) ने मेरी बात सुनने से इंकार किया तब मेरी मदद के लिए दुर्भाग्य से न तो प्रधानमंत्री आगे आए और न ही वित्तमंत्री.

    पीएम ने चाय ऑफर की और मैने इस्तीफा सौंप दिया

    पूर्व प्रधानमंत्री ने मुझे चाय ऑफर की और मैने उन्हें इस्तीफा सौंप दिया. मैं 14 नवंबर की शाम चेन्नई से दिल्ली आया था. मैं 9.00 बजे दिल्ली पहुंचा, तब टी.आर. बालू ने मुझे बताया कि मैं अपने पार्टी के नेता की सलाह के अनुसार इस्तीफा दे सकता हूं. मैंने अपने पीए से प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग फिक्स करने के लिए कहा. अपना इस्तीफा तैयार किया. फिर प्रधानमंत्री के आवास पर गया. प्रधानमंत्री उदास और घबराए हुए दिखाई दे रहे थे. उन्होंने मुझे चाय ऑफर की. मैंने उन्हें अपना इस्तीफा पत्र सौंप दिया. उन्होंने पूरी स्थिति के बारे में उदासी भरे शब्दों में बताते हुए कहा कि, सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी और मामले में उनका नाम अनावश्यक रूप से घसीटा जा रहा है. उनकी परेशानी देखकर मैं उनसे कुछ भी नहीं कह सका.

    Tags: 2G scam, A Raja, Dr. manmohan singh

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