'यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए परामर्श ही है एकमात्र रास्ता'

'यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए परामर्श ही है एकमात्र रास्ता'
पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ खान का मानना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए परामर्श ही है एकमात्र रास्ता है. (सांकेतिक तस्वीर)

आरिफ खान ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय में छात्र नेता के तौर पर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. आरिफ चार बार संसद के सदस्य और इंदिरा गांधी तथा वीपी सिंह के कार्यकाल में मंत्री रहे.

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66 साल के आरिफ मोहम्मद खान मुस्लिम महिलाओं के लिए समान अधिकारों और मुस्लिम समाज को विकसित तथा आधुनिक करने, मौलवियों के चुंगुल से निकालने और रुढ़िवादिता से बाहर करने के लिए लगातार आवाज उठाते आए हैं. वह बिना डरे, मुखर होकर अपनी आवाज उठाते हैं. 1986 में सुप्रीम कोर्ट ने जब तलाकशुदा शाह बानो के पक्ष में फैसला सुनाया था, तब राजीव गांधी सरकार इस फैसले के पक्ष में नया कानून लेकर आई थी और विरोध में आरिफ मोहम्मद खान ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था.

आरिफ खान ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय में छात्र नेता के तौर पर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. आरिफ चार बार संसद के सदस्य और इंदिरा गांधी तथा वीपी सिंह के कार्यकाल में मंत्री रहे. लोकसभा में शाह बानो के पक्ष में उन्होंने जो प्रगतिशील विचार रखे और जो तथ्य पेश किए उसके लिए उनकी काफी सराहना हुई थी.

आरिफ खान मुस्लिमों से समय के साथ आगे बढ़ने और प्रगतिशील बनने का आग्रह करते आए हैं. अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने जब तीन तलाक के खिलाफ फैसला सुनाया था, उससे पहले खान इस प्रथा को समाप्त करने की वकालत कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद खान ने इंडिया स्पेंड नाम की वेबसाइट को एक इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए परामर्श को एकमात्र रास्ता बताया.



यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए सबसे करनी होगी बात



यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर आरिफ खान ने कहा, "धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र में, कानून समानता के लिए बनते हैं, जहां सभी नागरिकों के समान अधिकार एवं दायित्व होते हैं. इसका यह भी अर्थ है कि न तो कानून लोगों को उनकी धार्मिक प्रथाओं को पालन करने से रोकेगा और न ही राज्य लोगों को किसी विशेष धर्म का पालन करने के लिए मजबूर करेगा. एक यूनिफॉर्म सिविल कोड केवल परामर्श से ही आ सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि विभिन्न धर्मों के लोगों को एक विशेष तरीके से शादी करनी होगी. यह आएगा, जैसा कि गुरु गोलवलकर ने ऑर्गनाइजर (राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ की पत्रिका) को दिए एक इंटरव्यू में कहा, भारत की संवेदनशीलता और विविधता को ध्यान में रखना होगा. आखिरकार, हिन्दू कोड बिल शास्त्रों का उत्पाद नहीं है, इसे विभिन्न धर्मों से लिया गया है. उदाहरण के लिए, प्रॉपर्टी में बेटी का हिस्सा और मेहर मुस्लिम लॉ से लिया गया है. हिन्दू कोड बिल के प्रावधान जैन और ईसाइयों पर भी लागू होते हैं, और वे अपनी पहचान बनाए रखते हैं."

आरिफ खान ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत की दिशा में आगे बढ़ेगी

गौरतलब है कि तीन तलाक प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए मोदी सरकार पूरा जोर लगा रही है. सरकार इस पर एक बिल लेकर आई है जो तीन तलाक पर पूरी तरह रोक लगाता है. सरकार के पिछले कार्यकाल से ही माना जा रहा है कि तीन तलाक पर प्रतिबंध के बाद सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ेगी.

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