जिस मुद्दे पर फंसे थे फडणवीस, अब महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन के सामने भी वही चुनौती

एक साल पहले शरद पवार ने देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ बाढ़ से हुए नुकसान को मुद्दा बनाया था. अब उद्धव सरकार भी वैसी ही मुश्किलें झेल रही है. (फाइल फोटो)
एक साल पहले शरद पवार ने देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ बाढ़ से हुए नुकसान को मुद्दा बनाया था. अब उद्धव सरकार भी वैसी ही मुश्किलें झेल रही है. (फाइल फोटो)

2019 के मॉनसून (Monsoon) के दौरान बारिश (Rain) और बाढ़ (Flood) की वजह से महाराष्ट्र के कई इलाकों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई थीं. तब शरद पवार (Sharad Pawar) ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 5:49 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) का सत्ताधारी गठबंधन (Ruling Alliance) महाअघाड़ी इस वक्त कुछ वैसी ही मुश्किलों का सामना कर रहा है जैसी एक साल पहले देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) झेल रहे थे. दरअसल 2019 के मॉनसून के दौरान बारिश और बाढ़ की वजह से महाराष्ट्र के कई इलाकों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई थीं. तब राज्य के मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फडणवीस ने सर्वाधिक प्रभावित कोल्हापुर और सांगली जिलों का दौरा किया. उन्होंने लोगों को आश्वासन तो दिए लेकिन जनता के मन में यह बात अटक कर रह गई. जब विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार शुरू हुए तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार ने मुद्दे को भुनाया था.

जब पवार ने मोड़ी चुनाव प्रचार की धारा
चुनाव प्रचार के दौरान सतारा में शरद पवार ने एक जबरदस्त भाषण दिया था. जिसने बारिश और बाढ़ से बेहाल किसानों के मन को छू लिया. माना जाता है कि इन जिलों की कुछ सीटों पर बीजेपी को नुकसान हुआ था और एनसीपी फायदा उठाने में कामयाब रही थी. लेकिन ठीक एक साल बाद राज्य के हालात फिर कुछ वैसे ही हैं. राज्य के सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी गठबंधन के खिलाफ लोगों में रोष है. कारण वही है बारिश और बाढ़.

सत्ताधारी गठबंधन की चुनौतियां
टाइम्स नाउ पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ की वजह से सोलापुर और उसके आस-पास के जिलों में पैदा हुईं मुश्किलों ने सत्ताधारी गठबंधन को चिंता में डाल दिया है. तीनों पार्टियों (कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी) के बड़े नेता बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार दौरे कर रहे हैं.



सीएम उद्धव को लेकर नाराजगी
एक साल पहले जैसे देवेंद्र फडणवीस किसानों का गुस्सा झेल रहे हैं, ठीक वैसा ही गुस्सा किसानों में इस वक्त उद्धव ठाकरे को लेकर भी है. सीएम ने किसानों की मदद का आश्वासन दिया है साथ ही कुछ किसानों को मुआवजे के चेक भी वितरित किए. कहा जा रहा है कि सोलापुर के सांगवी जिले के किसान इस बात को लेकर भी नाराज हैं कि सीएम उद्धव गांव से दूर एक पुल से निरीक्षण कर वापस लौट गए. हालांकि मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत की.

पवार ने भी किया प्रभावित इलाकों का दौरा
प्रभावित इलाकों का दौरा करने वालों में खुद शरद पवार भी शामिल हैं. उन्होंने भी भरोसा दिलाया है कि ये किसानों की ही सरकार है और उनका पूरा खयाल रखेगी. इस दौरान शरद पवार ने कोविड-19 से बुरी तरह जूझने की वजह से राज्य की खस्ता हालत की तरफ भी ध्यान दिलाया. उन्होंने राहत कार्यों के लिए केंद्र से भी मदद की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में मदद पहुंचाने के लिए राज्य सरकार को लोन भी लेना पड़ सकता है.

फडणवीस भी गए प्रभावित इलाकों में
इस बीच राज्य में नेता प्रतिपक्ष और बिहार में चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रचार अभियान से ब्रेक लेकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का तीन दिवसीय दौरान किया है. शरद पवार को सीधा संदेश देने के प्रयास में देवेंद्र फडणवीस ने अपने दौरे की शुरुआत बारामती से की. यह शरद पवार का संसदीय क्षेत्र है. गौरतलब है कि देवेंद्र फडणवीस लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए राज्य सरकार से फंड जारी करने की मांग करते रहे हैं. बीजेपी किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार से फंड मांगने की बात पर भी सवाल उठाती रही है.

कैसे चैलेंज से पार पाएगा सत्ताधारी गठबंधन
2019 की बाढ़ को राज्य में बीजेपी की लोकप्रियता घटाने वाली घटना के तौर पर भी देखा जाता है. आज सत्ताधारी गठबंधन भी तकरीबन उसी मुश्किल दौर से गुजर रहा है. कोविड-19 से भी महाराष्ट्र देश में सर्वाधिक प्रभावित राज्य रहा है. महामारी के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार का अच्छा-खासा फंड खर्च हुआ है. और यही वजह है कि किसानों की समस्या सत्ताधारी गठबंधन के लिए और मुश्किलों भरी बन चुकी है.
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