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    कोरोना मरीजों के लिए ICU बेड के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची AAP सरकार

    कोविड मरीजों के लिये आईसीयू बेड आरक्षित रखने पर रोक के खिलाफ आप सरकार की न्यायालय में अपील (File Photo)
    कोविड मरीजों के लिये आईसीयू बेड आरक्षित रखने पर रोक के खिलाफ आप सरकार की न्यायालय में अपील (File Photo)

    COVID-19 Case in Delhi: दिल्‍ली हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश की पीठ ने 22 सितंबर को दिल्ली सरकार के 13 सितंबर के फैसले पर रोक लगा दी थी. पीठ ने कहा था कि 33 बड़े निजी अस्पतालों को 80 प्रतिशत आईसीयू बेड कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित करने के लिए कहना अन्य मरीजों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 6, 2020, 4:31 PM IST
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    नई दिल्ली. आप सरकार (Aap Government) ने निजी अस्पतालों (Private Hospitals) में 80 प्रतिशत आईसीयू बेड (ICU Bed) कोविड-19 (COVID-19) मरीजों के लिए आरक्षित करने के अपने फैसले पर रोक लगाने के दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के आदेश को सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) में चुनौती दी है. उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश की पीठ ने 22 सितंबर को दिल्ली सरकार के 13 सितंबर के फैसले पर रोक लगा दी थी. पीठ ने कहा था कि 33 बड़े निजी अस्पतालों को 80 प्रतिशत आईसीयू बेड कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित करने के लिए कहना अन्य मरीजों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा.

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वोच्च अदालत का रुख किया है. केजरीवाल ने कहा, 'दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी अस्पतालों में आईसीयू बेड बढ़ाने के हमारे आदेश पर रोक लगा दी है. कल उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की. हम आशा करते हैं कि उच्चतम न्यायालय गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए रोक को हटा देगा.' सरकार ने एकल न्यायाधीश के आदेश को उच्च न्यायालय में एक खंडपीठ के समक्ष पहले ही चुनौती दे रखी है और उसे 27 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

    दिल्ली सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुये उच्च न्यायालय ने सख्ती के साथ सवाल किया था कि क्या गैर कोविड-19 के मरीजों को जीने का अधिकार है या नहीं. उच्च न्यायालय ने कहा था कि पहली नजर में सरकार का आदेश मनमानीपूर्ण, अनुचित और संविधान मे नागरिकों को प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन करता है. दिल्ली सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुये अदालत ने कहा था, 'क्यों अन्य मरीजों को जीने का अधिकार है या नहीं या अब सरकार यह कहती है कि सिर्फ कोविड-19 के मरीजों को ही जीने का अधिकार है. मरीज वहां छुट्टियां मनाने नहीं जा रहे. वह आपातस्थिति में ही जाता है.'




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    अदालत ने अपनी तल्ख टिप्पणियों में कहा, 'आप (दिल्ली सरकार) इन दोनों (कोविड-19 और गैर कोविड-19) के बीच भेदभाव क्यों करते हैं? आप आईसीयू का बेड कोविड-19 मरीज के लिये खाली क्यों रखते हैं और दूसरा जिसे जरूरत है वह मर सकता है? अगर एक व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ता है और आप कह रहे हैं कि उसे सड़क पर ही मर जाना चाहिए.' इसके बाद, आप सरकार ने इस आदेश के खिलाफ खंडपीठ में अपील दायर की. इस बीच, कोविड-19 की स्थिति, विशेषकर दिल्ली में, बहुत खराब हो गयी. दिल्ली में बुधवार को एक दिन में 6,800 से ज्यादा कोविड-19 संक्रमित मरीज निकले और मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी बढ़ते प्रदूषण और त्योहार के मौसम के बीच कोरोना वायरस की तीसरी लहर का सामना कर रही है.
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