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पंजाब में इस बार कांग्रेस को भगवान भी नहीं बचा सकते: केजरीवाल

पंजाब में इस बार कांग्रेस को भगवान भी नहीं बचा सकते: केजरीवाल

File Photo: PTI

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पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने कमर कस ली है. पार्टी को सत्ता दिलाने के लिए खुद अरविंद केजरीवाल ने चुनावी प्रचार की कमान संभाल रखी है.

    पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने कमर कस ली है. पार्टी को सत्ता दिलाने के लिए खुद अरविंद केजरीवाल ने चुनावी प्रचार की कमान संभाल रखी है. इस बार पंजाब में 'आप' की रणनीति और प्रचार सहित कई मसलों पर केजरीवाल ने सीएनएन न्‍यूज18 से खुलकर बातचीत की.

    सवाल- राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस के मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार कैप्‍टन अमरिंदर सिंह होने जा रहे हैं. आपको नहीं लगता कि इससे कांग्रेस में नहीं ऊर्जा आने जा रही है और कांग्रेस मजबूत होगी?

    जवाब- अरविंद केजरीवाल चुनाव के कुछ दिन पहले कांग्रेस को कैप्‍टन अमरिंदर सिंह को मुख्‍यमंत्री पद का प्रत्‍याशी घोषित करने इसकी जरूरत क्‍या थी? ऐसा क्‍या हो गया कि कांग्रेस को मुख्‍यमंत्री पद का प्रत्‍याशी घोषित करना पड़ा? कारण यह है कि कांग्रेस बुरी तरह हारने जा रही है. इसलिए कांग्रेस ने सोचा कि यदि वह एक मुख्‍यमंत्री का प्रत्‍याशी घोषित कर देगी तो उसके स्थिति में सुधार होगा. लेकिन पंजाब की जनता ने अपना इरादा तय कर लिया है. कैप्‍टन अमरिंदर को मुख्‍यमंत्री पद का प्रत्‍याशी घोषित करने की बात भूल जाएं. यदि वे खुद को प्रधानमंत्री का उम्‍मदीवार भी घोषित कर दें तो कुछ बदलने वाला नहीं है. यहां तक कि भगवान भी कांग्रेस को नहीं बचा सकते. कांग्रेस को कोई नहीं बचा सकता. आपने रोड शो के दौरान देखा कि कैप्‍टन साहब अपने ही चुनाव क्षेत्र में हार रहे हैं. कहां के सीएम, कैसे सीएम? कैप्‍टन पटियाला और लाम्‍बी दोनों जगह से हार रहे हैं और बुरी तरह हार रहे हैं. इससे कोई लाभ नहीं होने जा रहा है.

    सवाल- आप राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं और निश्‍चित रूप से आप कहेंगे कि कैप्‍टन हार रहे हैं, लेकिन पटियाला से उनके हारने की अपेक्षा नहीं है?
    जवाब- नहीं, लोग ऐसा कह रहे हैं. आप वहां थे. आपने लोगों से बात की है. तो जनता ने बोला आपको आम आदमी को वोट दे रही है.

    सवाल- 'आप' के लिए अंदर खाने एक मजबूत लहर है, मानता हूं लेकिन पटियाला कैप्‍टन का गृह क्षेत्र है?
    जवाब- था. इस बार लोग बदलाव चाहते हैं. हर कोई कांग्रेस-अकाली-भाजपा से बदलाव चाहता है. पंजाब को ड्रग्‍स की ओर धकेलने वाली मौजूदा राजनीतिक व्‍यवस्‍था से बदलाव चाहता है.

    सवाल- जब पंजाब में ड्रग्‍स बेचा जा रहा था तो कैप्‍टन कहां थे? पिछले दस साल से कैप्‍टन क्‍या कर रहे थे? लोग कहते हैं कि ड्रग्‍स उन्‍हीं के कार्यकाल से बिकना शुरू हुआ था. तीन साल पहले जब मजीठिया को सीबीआई गिरफ्तार करने ही वाली थी, तभी मजीठिया को बचाने के लिए कैप्‍टन ने सोनिया गांधी से संपर्क साधा था. इसके बदले में कैप्‍टन के खिलाफ जितने भी मामले से उन्‍हें वापस ले लिया गया था. लोग इससे थक चुके हैं. इसके पहले उनके पास कोई विकल्‍प नहीं था. अब वे साफ-सफाई करेंगे और जनता के बीच से ही अच्‍छा विकल्‍प उभरा है. लोग उन्‍हें वोट देंगे.

    सवाल- जब कैप्‍टन लाम्बी से प्रकाश सिंह बादल को चुनौती दे रहे हैं तो आपने कहा कि यह एक पहले से फि‍क्‍स मैच है, क्‍योंकि यह सत्‍ता के खिलाफ मतों को विभाजित करेगा. इसके पहले आपने यह भी कहा था कि यह फि‍क्‍स मैच है, क्‍योंकि वह कभी भी बड़े नेता से नहीं भिड़े. आप यह दोनों कैसे कह सकते हैं?

    केजरीवाल- नहीं, नहीं मैं कह रहा हूं कि यदि उन्‍हें वास्‍तव में लड़ना है तो उन्‍हें पटियाला छोड़ देना चाहिए था. भगवंत मान एक सीट से लड़ रहे हैं. जरनैल सिंह एक सीट से लड़ रहे हैं, लेकिन कैप्‍टन पटियाला और लाम्‍बी भी लड़ रहे हैं. एक अखबार ने उनसे पूछा था कि वह दो सीटों से क्‍यों लड़ रहे हैं? जबाव में उन्‍होंने कहा था कि वह पटियाला से जीत के लिए लड़ रहे हैं-- इसका मतलब है कि वह लाम्‍बी से जीतने के लिए नहीं लड़ रहे हैं. यह बात कैप्‍टन ने खुद स्‍वीकार की है.

    सवाल- अमरिंदर सिंह को मुख्‍यमंत्री पद का प्रत्‍याशी घोषित कर क्‍या कांग्रेस ने आपका एक हथियार नहीं चुरा लिया है? क्‍योंकि आप हमेशा यह कहते रहे हैं कि कांग्रेस के मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार सिद्धू होंगे और इसका कांग्रेस ने वादा किया है. इसलिए यह सवाल तो खत्‍म हो गया?

    जवाब- उन्‍हें हमारे सारे हथियार चुरा लेने दें, इसके बावजूद कांग्रेस जीतने नहीं जा रही है. जनता ने अपना मन बना लिया है. लोग इस पुरानी राजनीति से किनारा करना चाहते हैं. लोग एक नया पंजाब बनाना चाहते हैं. अपनी उम्‍मीदों और सपनों का पंजाब बनाना चाहते हैं. कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा सभी का चरित्र समान है और सभी की दोस्‍ती समान है. सभी एक दूसरे से मिले हुए हैं. मजीठिया कैप्‍टन के रिश्तेदार हैं. ये सारे मिले हुए हैं. जनता उनकी राजनीति समाप्‍त करना चाहती है.

    सवाल- आपका क्‍या? आप ने तो यहां मुख्‍यमंत्री के चेहरे की घोषणा भी नहीं की है. ऐसा क्‍यों है कि आपने यहां मुख्‍यमंत्री पद के प्रत्‍याशी की घोषणा नहीं की है, जबकि गोवा में कर चुके हैं ?

    जवाब- यह चुनाव के बाद तय किया जाएगा. सभी विधायक एक साथ बैठेंगे और तय करेंगे.

    सवाल- क्‍या कारण है कि आपने तय नहीं किया है?

    जवाब- अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग रणनीति है.

    सवाल- हमें चार नाम सुनने को मिल रहे हैं- जरनैल सिंह, भगवंत मान, एच.एस. फूल्का और हिम्‍मत सिंह शेरगिल?

    जवाब- विधायक तय करेंगे.

    सवाल- क्‍या यह आपकी पार्टी के चुनाव प्रचार का एक मुद्दा नहीं था, जिसने आपको बैकफुट पर कर दिया है? आप मुख्‍यमंत्री के चेहरे के तौर पर किसी को नहीं पेश कर रहे हैं. क्‍या यह एक राजनीतिक जोखिम नहीं है?

    जवाब- लोग हमसे यह नहीं पूछ रहे हैं कि कौन मुख्‍यमंत्री बनेगा? इसमें केवल मीडिया की रुचि है, लोग खुश हैं. हमलोगों ने ईमानदारी के साथ दिल्ली में काम किया है. वे पंजाब में भी ऐसा ही चाहते हैं.

    सवाल- आपने अपने सभी भाषणों में कहा है कि आपकी पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में जो भी वादे किए हैं उन्‍हें पूरा करने की गारंटी देते हैं. क्‍या यह नहीं दर्शाता कि पंजाब में नेतृत्‍व का अभाव है?

    जवाब- जनता को मुझ पर भरोसा है. लोग यह मानते हैं, केजरीवाल कट्टर ईमानदार है, उसे दुनिया की कोई भी ताकत खरीद नहीं सकती. इसके अलावा एक दूसरा कारण भी है. लोग मानते हैं कि केजरीवाल जो कहता है वह करता है, अपनी बात से मुकर नहीं जाता, झूठ नहीं बोलता है. यही कारण है कि घोषणापत्र की बातों की मैंने गारंटी दी है.

    सवाल- आप पंजाब में किसी मजबूत चेहरे को क्‍यों नहीं प्रोजेक्‍ट करते हैं सर?

    जवाब- अब पार्टी महसूस करती है कि यह चुनावों के बाद तय किया जाना चाहिए. विधायकों को निर्णय लेने दें.

    सवाल- उस बयान के बाद जिसमें आपने कहा है कि दोनों पार्टियों से नोट लो लेकिन आम आदमी पार्टी को वोट दो के बयान के बाद आप चुनाव आयोग से भिड़ गए हैं. रोकने पर आपने प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए फि‍र से ट़वीट कर दिया है. क्‍या इस तरह से आप एक संस्‍था पर हमला बोल रहे हैं ?

    जवाब- मैं किसी संस्‍था पर हमला नहीं बोल रहा हूं. मैं उन्‍हें उनकी जिम्‍मेदारियों की याद दिला रहा हूं. पंजाब में हर कोई जानेगा कि पैसे बांटे जा रहे हैं. चुनाव आयोग कहां है? क्‍या चुनाव आयोग सो रहा है? क्‍या वे देख नहीं सकते कि पैसे बांटे जा रहे हैं? चुनाव आयोग उनसे कुछ नहीं कह रहा है. मैं कह रहा हूं कि कोई भी पैसे बांटने के लिए आए आप उनके पैसे ले लो लेकिन वोट हमें दो. मैंने इसमें गलत बात क्‍या कही है? चुनाव आयोग मुझे यह कहने से मना कर रहा है. चुनाव आयोग मुझसे यह कहवाना चाहता है क्‍या कि जो तुम्‍हें नोट दे उसे तुम वोट दो?

    चुनाव आयोग इन दलों के साथ मिल गया है. आप यह बताएं कि मैंने इसमें गलत क्‍या कहा है? मैंने कहा है कि पैसे दोनों पार्टियों से लेना लेकिन मुझे वोट देना. हम लोगों ने दिल्ली में ऐसा किया है. लोगों ने भाजपा, कांग्रेस से पैसे लिए लेकिन वोट हमारे लिए किया. अगर यही चीज एक या दो और चुनाव में हो जाए तो पार्टियां पैसे बांटना बंद कर देंगी. मैं चुनाव आयोग का काम कर रहा हूं. मैं रिश्‍वतखोरी खत्‍म कर रहा हूं. चुनाव आयोग मुझे रोककर रिश्वतखोरी को बढ़ावा दे रहा है. चुनाव आयोग ने मुझे धमकी दी है कि अगर आपने इसे दोहराया तो हमलोग आपका चुनाव चिन्‍ह वापस ले लेंगे. पैसे और शराब बांटे जा रहे हैं लेकिन उनके चिन्‍ह नहीं वापस लिए जा रहे हैं. वे लोग हमारे चिन्‍ह वापस लेंगे.

    चुनाव आयोग को अपने कर्तव्‍य का पालन करना चाहिए. चुनाव आयोग जिस तरह से व्‍यवहार कर रहा है.... उसने चुनाव की घोषणा पांच को क्‍यों की ? इसलिए कि मोदी जी को तीन को बोलना था. इसलिए आप चुनाव की घोषणा मोदीजी के अनुसार करेंगे? पंजाब और गोवा में चुनाव एक ही दिन क्‍यों हो रहे हैं? पूरा देश इसका कारण जानता है. चुनाव आयोग अब स्‍वतंत्र है क्‍या? चुनाव आयोग देश की जनता के लिए है, दो-तीन लोगों के लिए नहीं. वे जो सत्‍ता में बैठे हुए हैं वे इसका आदर नहीं करेंगे तो इस देश की जनता अपनी आवाज उठाएगी.

    सवाल- सर, लेकिन आप एक निर्वाचित मुख्‍यमंत्री हैं. आपसे कुछ खास नियमों के अनुसार काम करने की अपेक्षा की जाती है?

    जवाब- मुझे बताएं, मैंने किन मानदंडों का उल्‍लंघन किया है? हमलोग किसी हिंसा में लिप्‍त नहीं हैं. अगर कुछ गलत हो रहा है तो संविधान के दायरे में रहते हुए उसके विरोध में आवाज उठाना मेरा कर्तव्‍य है. कुछ गलत हो रहा है तो मैं अपनी आवाज उठाऊंगा.

    सवाल- उनकी आपसे और सम्‍मान दर्शाने की अपेक्षा है.

    जवाब- सम्‍मान हासिल करना होता है. अगर आपकी करनी सम्‍मान के लायक नहीं है तो हम सम्‍मान कैसे करेंगे? जब टीएन शेषन थे, लिंगदोह साहब वहां थे, सबने उनका सम्‍मान किया. अब कोई भी चुनाव आयोग का सम्‍मान नहीं करता.

    सवाल- सर, आप चुनाव आयोग के खिलाफ बहुत बड़ा आरोप लगा रहे हैं.

    जवाब- मैं ऐसा पिछले 10 दिनों से कह रहा हूं. यह पहली बार नहीं है. आप यह नहीं देख रहे है कि तिथियों की घोषणा सही नहीं हैं. दिल्ली चुनाव के समय भी ऐसा ही हुआ था. 10 जनवरी को मोदीजी ने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था.... और तभी चुनाव आयोग ने चुनाव की तिथियों की घोषणा की थी. इस तरह अब चुनाव की तिथियों की घोषणा मोदीजी के भाषणों के कार्यक्रम के अनुसार तय होगी? क्‍या चुनाव आयोग की स्‍वायत्‍तता यही है? इसका मतलब तिथियां प्रधानमंत्री कार्यालय से तय होगी, चुनाव आयोग से नहीं.

    सवाल- उपमुख्‍यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने आप पर दो आरोप लगाए हैं. उन्‍होंने कहा है कि आप बाहरी हैं और आप उग्रवादियों से जुड़े हुए हैं.

    जवाब- सुखबीर बादल कह रहे हैं कि जो भी प्रवासी भारतीय आ रहे हैं वे सभी चरमपंथी हैं. ऐसा कैसे हो सकता है? जब प्रवासी भारतीयों से भरा विमान पहुंचा तो उन्‍होंने कहा कि वे लोग चमरपंथियों को ला रहे हैं. क्‍या सभी पंजाबी प्रवासी चरमपंथी हैं? सभी ने मजबूरी में पंजाब छोड़ा था क्‍योंकि बादल और कैप्‍टन ने मिलकर पंजाब को इतना बर्बाद कर दिया कि उनके पास कोई विकल्‍प नहीं बचा. अब वे पंजाब की प्रगति में मदद करने के लिए लौट रहे हैं तो उन्‍हें चरमपंथी कहा जा रहा है. यह शर्मनाक है!

    सवाल- कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने आपको चापलूस और घिनौना आदमी कहा है?

    जवाब- उन्‍हें वैसा कहने दीजिए. बुजुर्ग हैं, गाली देते हैं तो नमस्‍कार - कोई बात नहीं.

    सवाल- ऐसी खबरें हैं कि कांग्रेस हिंदुओं के बीच खुद को मजबूत कर रही है. क्‍या इससे आपको परेशानी है?

    जवाब- नहीं यह सही नहीं है. मुझे यह नहीं मालूम है कि किसने आपसे ऐसा कहा है कि कांग्रेस मजबूत कर रही है. मीडिया कांग्रेस का ज्‍यादा मजाक उड़ाती है. मीडिया हमें कम ताना मारती है. जनता के बीच कांग्रेस है ही नहीं.

    सवाल- क्‍या आप पूरी तरह से आश्‍वस्‍त हैं कि कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई खतरा नहीं है?

    जवाब- आप इसे समझें कि हमारी लड़ाई कांग्रेस के खिलाफ नहीं है, हमारी लड़ाई भ्रष्‍टाचार और ड्रग्‍स में लिप्‍त लोगों के खिलाफ है. लोग आप में उम्‍मीद की एक नई किरण देख रहे हैं.

    एक बात समझें- पंजाब में चुनाव दलों और नेताओं के हाथ से निकल गया है. ये केजरीवाल की पहुंच से, कैप्‍टन की पहुंच से, बादलों की पहुंच से, भगवंत सिंह मान की पहुंच से बाहर है. यह चुनाव अब जनता लड़ रही है. यह उम्‍मीदों का चुनाव है.

    सवाल- आपकी पार्टी को पंजाब में कठिन दौर से गुजरना पड़ा है, ऐसा नहीं है क्‍या? आपको दो सांसदों को निलंबित करना पड़ा है. आपको सुच्‍चा सिंह छोटेपुर को निलंबित करना पड़ा है. क्‍या पीछे देखने पर आपको ऐसा लगता है कि इसका लोगों पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ा? आपके लिए उभरना, फि‍र से अपनी छवि बनाना और लोगों के दिमाग में उम्‍मीद जगाना मुश्किल हो गया?

    जवाब- ऊपर-नीचे होता रहता है.

    सवाल- क्‍या आप चाहते थे कि चीजें अलग हों?

    जवाब- हो सकता है, कुछ चीजें दूसरे ढंग से की जा सकती थीं. मैं अब किसी खास घटना पर टिप्‍पणी नहीं कर सकता.

    सवाल- अगर त्रिशंकु विधानसभा होती है तो क्‍या आप किसी दल को समर्थन करेंगे या समर्थन लेंगे?

    जवाब- कौन सी रिपोर्ट यह कह रही है?

    सवाल- ऐसी कुछ रिपेार्ट हैं. कुछ जनमत सर्वेक्षण है.

    जवाब- कौन सी रिपोर्ट ?

    सवाल- मुझे ठीक से याद नहीं आ रहा कि वह कौन सी रिपोर्ट थी.

    जवाब- सभी गलत है. आप भी जानते हैं.

    सवाल- मालवा में आप की लहर है, लेकिन माझा में ?

    जवाब- यह आप के लिए लहर नहीं है. यह उम्‍मीद के लिए लहर है. कृपया इसे समझने की कोशिश करें. यह उम्‍मीद बहुत मजबूत है. आपने जैसा पूछा क्‍या कांग्रेस वैसा एक हफ्ते में खुद को मजबूत कर सकती है? क्‍या कांग्रेस उम्‍मीद है? नहीं. यह एक उम्‍मीद का चुनाव है. लोगों ने अपना मन बना लिया है. अब यह उलट नहीं सकता. यह उम्‍मीद का चुनाव है. लोग निर्णयकारी फैसला देंगे. या तो कांग्रेस के लिए या आप के लिए.

    सवाल- अगर त्रिशंकु विधानसभा बनी तो सर?

    जवाब- यह एक काल्‍पनिक सवाल है.

    सवाल- इस तरह आप निश्चित रूप से अभी कोई वादा करना नहीं चाहते?

    जवाब- नहीं...नहीं, मैं वादा करता हूं. किसी भी दल के साथ कोई तालमेल नहीं होगा. लेकिन मैं कह रहा हूं कि सवाल काल्‍पनिक है. गठबंधन को कोई सवाल ही नहीं है.

    सवाल- आपकी पार्टी का अगला कदम क्‍या होगा?

    जवाब- लोग तय करेंगे. पंजाब के मामले में भी लोग तय करेंगे. जहां भी लोग हमें चाहेंगे हमलोग वहां से लड़ेंगे.

    सवाल- आपके ट्विटर हैंडल की बात करें तो गणतंत्र दिवस पर आपने कहा कि प्रधानमंत्री ने सीबीआई को आपके विभाग में छापेमारी करने और कागजात जब्‍त करने को कहा था?

    जवाब- वे 20 जनवरी को आए. वे हमारे फि‍डबैक यूनिट की सारी फाइलें ले गए. यह मुझे बताएं- क्‍या यह गणतंत्र है? क्‍या यह संघीय ढांचा है. हर दिन सीबीआई हमारे एक विभाग की फाइलें ले जाती है. मोदी जी इतने नकारात्‍मक क्‍यों हैं? वह हमारे पीछे क्‍यों पड़े हैं?

    सवाल- आपका प्रधानमंत्री के साथ विरोधी रिश्‍ता रहा है. क्‍या उनमें आपको कुछ सकारात्‍मक नजर आता है?

    जवाब- ( कुछ पल सोचने के बाद) मतलब अगर वह अगर ठान लें न कि इसको छोड़ना नहीं, बदला लेना है तो छोड़ते नहीं उसको. मतलब बहुत बदला लेने वाले हैं. बहुत ज्‍यादा प्रतिशोधी हैं.

    सवाल- क्‍या यह सकारात्‍मक चीज है?

    जवाब- ' पता नहीं, मैं इसके बारे में कुछ नहीं सोच सकता. क्‍या आप कोई सुझाव दे सकते हैं.

    सवाल- आप सवाल मुझ पर डाल रहे हैं. सवाल पर सवाल कोई जवाब नहीं है?

    जवाब- उन्‍होंने गत दो वर्षों में कुछ भी सकारात्‍मक किया इस बारे में कुछ भी नहीं सोच सकता.

    सवाल- कुछ भी नहीं ?

    जवाब- मैं ऐसा कुछ भी नहीं सोच सकता.

    सवाल- मेरा आखिरी सवाल, पंजाब आपके लिए कितना महत्‍वपूर्ण है?

    जवाब- आपने केवल ट्वीट किया है. पंजाब के लोगों ने हमें चुना है. अरविंद केजरीवाल महत्‍वपूर्ण नहीं हैं. आम आदमी पार्टी महत्‍वपूर्ण नहीं है. हमलोग जो भी कर रहे हैं यह राज्‍य के लिए है, देश के लिए है. आपने जो सवाल किया है, वह हमलोगों के लिए कितना महत्‍वपूर्ण है? तो हमलोगों के लिए देश का हर हिस्‍सा महत्‍वपूर्ण है. हमलोग अपनी पसंद से नहीं मजबूरी में राजनीति में आए हैं. जहां भी लोग हमें चाहते हैं, हम लोग कड़ी मेहनत करेंगे. यह हमारा कर्तव्‍य है. शेष भगवान पर है.​

    Tags: Aam aadmi party, Arvind kejriwal

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