पंजाब में आम आदमी पार्टी को नवजोत सिंह सिद्धू जैसे एक बड़े गेम चेंजर की जरूरत

नवजोत सिंह सिद्धू. (फाइल फोटो)

सीएम अमरिंदर (Captain Amarinder) और बादल परिवार (Badal Family) पर निशाना साधने के अलावा सिद्धू 2015 पुलिस फायरिंग का केस भी मजबूती से उठाते रहे हैं. ये ऐसे मामले हैं जिन पर आम आदमी पार्टी भी काम करती रही है. अगर AAP सिद्धू को अपने साथ लेकर आती है तो ये एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (AAP) बीते पांच सालों से पंजाब में मुख्यमंत्री उम्मीदवार (CM Face) के चेहरे के तौर पर एक सिख नेता (Sikh Leader) की तलाश में लगी है. शायद यही कारण था कि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को राज्य में जीत नहीं हासिल हो सकी थी. अब राज्य में पार्टी को दोबारा खड़ा करने में भी ये एक बड़ा चैलेंज है. बीते विधानसभा चुनावों में आप पंजाब में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी.

पंजाब में दोबारा वापसी के लिए आम आदमी पार्टी को एक गेम चेंजर की जरूरत है. पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को अमृतसर में कहा कि एक सिख नेता ही मुख्यमंत्री पद का चेहरा होगा. पार्टी वक्त आने पर नेता का नाम घोषित कर देगी. ऐसा लग रहा है कि AAP अब पिछले चुनाव की गलतियों से सबक ले रही है. 2017 के चुनाव में पार्टी ने अपना सीएम फेस नहीं घोषित किया था. जबकि पंजाब में व्यक्तित्व आधारित वोटिंग का पैटर्न रहा है. अकाली ने प्रकाश सिंह बादल तो कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया था. तब केजरीवाल ने कहा था कि पार्टी के पास मुख्यमंत्री उम्मीदवार होना जरूरी नहीं है क्योंकि पंजाब के लोगों का भरोसा उनमें है.

हालांकि आखिरकार पार्टी ने कहा था कि सीएम उम्मीदवार पंजाब का ही कोई व्यक्ति होगा न कि अरविंद केजरीवाल. अरविंद केजरीवाल ने खुद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बताए जाने की खबरों को अफवाह बताया था. तब पार्टी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने से इसलिए भी किनारा किया था क्योंकि पार्टी में कई उम्मीदवार थे. इनमें भगवंत मान, एचएस फुल्का और सुखपाल सिंह खैरा थे.

इस बार आप की पसंद
इस चुनाव में आप की स्थिति कुछ अलग नहीं है क्योंकि जाट सिख चेहरे की तलाश जारी है. पार्टी के एक प्रमुख चेहरे रहे सुखपाल सिंह खैरा अब कांग्रेस जॉइन कर चुके हैं. फुल्का 2019 में पार्टी से अलग हो चुके हैं. भगवंत मान अभी पार्टी चीफ हैं और पूरे राज्य में पार्टी के इकलौते सांसद भी. लेकिन उनकी लोकप्रियता के बावजूद पार्टी में कइयों का मानना है कि उन्हें सीएम फेस बनाने में रिस्क है. विधायक हरपाल चीमा और पूर्व सांसद प्रोफेसर संधू सिंह जैसे कुछ अन्य चेहरे भी हैं.

गेम चेंजर सिद्धू जैसा होना चाहिए
हालांकि AAP की तरफ से बड़ा गेम चेंजर सिद्धू जैसा होना चाहिए. 2017 में अरविंद केजरीवाल ने पुष्टि की थी कि सिद्धू से बातचीत चल रही है. तब सिद्धू को पार्टी में लाने के काफी प्रयास भी किए गए थे. सिद्धू ने कांग्रेस जॉइन कर ली जहां पर वो अभी अपने सीएम के साथ ही वाकयुद्ध कर रहे हैं. आप ने अब तक खुलासा नहीं किया है कि उसने सिद्धू से बातचीत दोबारा शुरू की है या नहीं.

केजरीवाल ने कहा कि वो सिद्धू का सम्मान करते हैं
सोमवार को केजरीवाल ने कहा कि वो सिद्धू का सम्मान करते हैं. केजरीवाल ने साफ कर दिया कि सिद्धू ने 2017 में उनसे सीएम फेस बनाने की कोई मांग नहीं की थी. आम आदमी पार्टी जानती है कि दिल्ली के बाहर पंजाब ही ऐसा राज्य है जहां पर पार्टी कुछ बड़ा हासिल कर सकती है. 2017 में सिख सीएम फेस न घोषित करने की अपनी ही कमी के कारण उसे बड़ा झटका लगा था. इसके अलावा ग्राउंड पर बेहतर मोमेंटम बन जाने के बावजूद अतिवादी तत्वों से नजदीकियां भी पार्टी को भारी पड़ी थीं.

क्या होगा आगे
वर्तमान लीडरशिप के साथ AAP इस वक्त राज्य में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती दिख रही. कांग्रेस ने कहा है कि AAP ऐसी पार्टी है जो जब राज्य में चुनाव लड़ती है तो जमानत जब्त कराती है. सीएम अमरिंदर और बादल परिवार पर निशाना साधने के अलावा सिद्धू 2015 पुलिस फायरिंग का केस भी मजबूती से उठाते रहे हैं. ये ऐसे मामले हैं जिन पर आम आदमी पार्टी भी काम करती रही है. सोमवार को AAP में पूर्व एसआईटी चीफ कुंवर विजय प्रताप सिंह को शामिल करवाया गया. अगर AAP सिद्धू को अपने साथ लेकर आती है तो ये एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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