Home /News /nation /

PM मोदी को एक्सपर्ट्स ने लिखी चिट्ठीः कठुआ-उन्नाव मामलों में उनके बयान पर जताई निराशा

PM मोदी को एक्सपर्ट्स ने लिखी चिट्ठीः कठुआ-उन्नाव मामलों में उनके बयान पर जताई निराशा

फाइल फोटो

फाइल फोटो

खत पर भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, लंदन, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, आयरलैंड, कनाडा और कुछ अन्य देशों के 637 शिक्षाविदों ने हस्ताक्षर किए हैं.

  • News18.com
  • Last Updated :
    भारत और विदेश के 600 से अधिक शिक्षाविदों और विद्वानों ने कठुआ और उन्नाव में हुई घटनाओं पर अपनी नाराजगी और पीड़ा को व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम खुला खत लिखा है.

    पांच दिन पहले प्रधानमंत्री को 49 पूर्व नौकरशाहों ने भी ओपन लेटर लिखा था. उनका समर्थन करते हुए शिक्षाविदों ने लिखा कि इन हिंसाओं में सत्ताधारी पार्टी के समर्थन से इनकार नहीं किया जा सकता.

    इस खत पर भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, लंदन, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, आयरलैंड, कनाडा और कुछ अन्य देशों के 637 शिक्षाविदों ने हस्ताक्षर किए हैं.

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले सप्ताह कठुआ गैंगरेप और उन्नाव रेप मामले में देरी से बयान देते हुए कहा था कि अपराधी को नहीं बख्शा जाएगा. बाद में लंदन में उन्होंने दुष्कर्म के मामले का राजनीतिकरण न करने की भी गुजारिश की.

    शिक्षाविदों ने लिखा कि कठुआ और उन्नाव की घटनाओं के बाद अपराधियों को बचाने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से उन्हें निराशा हुई है. कई भाजपा के नेताओं ने उन्नाव के रेप आरोपी बीजेपी एमएलए कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में बयान दिए और उनका बचाव किया. इसके अलावा कठुआ में भी गैंगरेप आरोपियों के बचाव में झंडे फहराए गए जिसमें भाजपा के दो मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया.

    पत्र में लिखा गया है कि कठुआ और उन्नाव की घटनाएं कोई नई नहीं थी. लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिसमें अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है. ऐसी घटनाओं में रेप और लिन्चिंग को हिंसा फैलाने के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया.

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के दादरी (2015), जम्मू-कश्मीर के उधमपुर (2015), छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा (2015-16), मध्य प्रदेश के हर्दा (2016), झारखंड के लतेहर (2016), गुजरात के ऊना (2016), हरियाणा के रोहतक (2017), दिल्ली (2017), उत्तर प्रदेश के सहारनपुर(2017) और अब जम्मू-कश्मीर व उत्तर प्रदेश (2018) में, ये सभी दंगे बीजेपी शासित राज्यों में भाजपा की केन्द्र में सरकार बनने के बाद हुए.

    पत्र में आगे लिखा है कि वे इन घटनाओं का जिक्र पीएम की पार्टी को हिंसा के से जोड़ने के लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि वे बताना चाहते हैं कि इन घटनाओं में सत्ताधारी पार्टी के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता है.

    पत्र में आगे लिखा गया है इस बात के कम ही सबूत हैं कि सरकार ने कमजोर वर्गों की सहायता के लिए कोई नियम बनाए हों जिसमें कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.

    शिक्षाविदों ने उन्नाव रेप केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के बयान का भी जिक्र किया है जिसमें कोर्ट ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि पुलिस का ऐसा रवैया है तो पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए किसके पास जाए. उन्होंने आगे लिखा, 'हम आपको यह खत इसलिए भेज रहे हैं क्योंकि यह हमारा कर्तव्य है और जिससे हम चुप्पी के दोषी न रहें. उस छोटी बच्ची और महिला को न्याय मिल सके.'

    ये भी पढ़ेंः
    नकली पिस्तौल दिखाकर चार लड़कों ने किया किशोरी के साथ गैंगरेप
    सजा-ए-मौत, 2 महीने में जांच और सुनवाईः जानें कितना मजबूत हुआ POCSO एक्ट

    Tags: BJP, Kathua Rape

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर