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यमुना एक्सप्रेस-वे पर अगर यह 4 काम हो जाएं तो कम हो सकते हैं एक्सीडेंट

 (सांकेतिक फोटो)
(सांकेतिक फोटो)

आरटीआई (RTI) के मुताबिक़ एक्सप्रेस-वे (Expressway) पर अगस्त 2012 से लेकर जनवरी 2018 तक 5000 एक्सीडेंट (Accident) हुए और 700 से ज़्यादा लोगों की हादसों में मौत हो गई. करीब 2000 लोग इन एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल हुए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 22, 2020, 8:49 PM IST
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नई दिल्ली. एक बार फिर कोहरे के चलते यमुना एक्सपेस-वे (Yamuna Expressway) पर जिंदगियों की रफ्तार थम रही है. हालांकि यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी ने कोहरे के असर को देखते हुए रात के वक्त स्पीड लिमिट (Speed Limit) कम कर दी है. बावजूद इसके एक्सीडेंट (Accident) रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. मंगलवार की सुबह भी 5 जिंदगियों की रफ्तार थम गई. लेकिन इसके बाद भी ओवर स्पीड वाहनों को दौड़ाने वाले मान नहीं रहे हैं. बीते वक्त सिर्फ 7 महीने में ही 18 लाख वाहनों ने स्पीड लिमिट कानून (Law) को तोड़ा था.

एक्सीडेंट रोकने को करने होंगे यह चार काम
आरटीआई एक्टिविस्ट और सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट केसी जैन लगातार कोर्ट से लेकर दूसरे प्लेटफार्म पर एक्सप्रेस-वे से जुड़े मामले उठाते रहते हैं. न्यूज18 हिन्दी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि अगर रात के वक्त एक बजे से सुबह 4 बजे तक एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक रोक दिया जाए तो कोहरे के चलते होने वाले एक्सीडेंट में कमी आ सकती है.

सिर्फ इमरजेंसी में जा रहे वाहनों को ही इस वक्त छूट दी जाए. ओवर स्पीड होने पर टोल प्लाजा पर चेतावनी दी जाए. बेशक उसके बाद चालान ऑनलाइन पहुंच जाए. सर्दियों में वाहनों की स्पीड को कम किया जाए. खासतौर से रात के वक्त पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए. आज हुआ एक्सीडेंट भी गलत दिशा से आ रहे वाहन के चलते हुआ है.
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सीआरआरआई की सलाह
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्‍थान (सीआरआरआई) अपनी रिपोर्ट में सीसीटीवी कैमरों की संख्‍या बढ़ाने, रास्‍ते में जगह-जगह छोटे स्‍पीड ब्रेकर लगाने की बात कह चुका है. जिससे वाहन चलाने वाला चौकन्‍ना रहे और स्‍पीड को अधिक न रख सके.

एक्सप्रेस-वे पर यहां हो रहे हैं सबसे ज्यादा एक्सीडेंट
एडवोकेट केसी जैन के अनुसार एक रिपोर्ट की मानें तो यमुना एक्सप्रेस-वे पर सबसे ज्यादा साल के 50 प्रतिशत हादसे जेवर टोल प्लाजा के अंतर्गत आने वाले जीरो पाइंट से लेकर 57 किमी के क्षेत्र में होते हैं. यहां दनकौर, दयानतपुर और फलैदा में सबसे ज्यादा वाहन आपस में टकराते हैं.

अब अगर मथुरा की बात करें तो यहां 58 किमी से लेकर 110 किमी के क्षेत्र में 35 प्रतिशत हादसे होते हैं. नौहझील, मांट और सुरीर वो थाना क्षेत्र जहां ज्यादातर हादसे होते हैं. आखिर में 111 से लेकर 165 किमी का वो क्षेत्र जो आगरा टोल प्लाजा के अंतर्गत आता है. अगर इस क्षेत्र की बात करें तो यहां खंदौली थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं.

साल दर साल ऐसे भारी पड़ रही है लापरवाही
एक्सप्रेस वे का एक दर्दनाक सच यह भी है कि जब से यह चालू हुआ है तब से लेकर जनवरी 2017 तक इस पर करीब 4505 हादसे हुए, जिसमें करीब 626 लोगों की मौत हो चुकी है. साल दर साल यहां पर होने वाले हादसों में तेजी देखने को मिल रही है. 2015 की तुलना में एक्सप्रेस वे पर 2016 में 30 फीसद हादसे ज्यादा हुए थे. 2016 में एक्सप्रेसवे पर करीब 1193 एक्सीडेंट की घटनाएं हुईं थीं. इनमें करीब 128 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 2015 में यहां 919 हादसे हुए थे जिसमें 143 लोगों की मौत हो गई थी.

2013 की बात करें तो यहां 896 हादसे हुए जिसमें 118 लोगों की मौत हो गई थी. 2014 में इस एक्सप्रेस वे पर 771 हादसे हादसे हुए जिसमें 127 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. अगस्त 2012 में जब इस एक्सप्रेस को जनता के सुपुर्द किया गया था तब ही यहां दिसंबर 2012 तक करीब 294 हादसे हुए थे जिसमें 33 लोगों की जान चली गई थी.
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