विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी का एक्शन प्लान, खाड़ी देशों से होगी शुरुआत: सूत्र

विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी का एक्शन प्लान, खाड़ी देशों से होगी शुरुआत: सूत्र
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विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) लॉकडाउन (Lockdown) के कुछ दिनों बाद ही भारतीय दूतावासों (Indian Emabassys) और उच्चायोगों (High Commisions) से जानकारी जुटा रहा है कि किस देश में कितने भारतीय ऐसे हैं जो भारत (India) वापस आने को इच्छुक हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 27, 2020, 1:20 AM IST
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(नीरज कुमार)

नई दिल्ली. विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी की शुरुआत खाड़ी के देशों (Gulf Countries) से होगी. सूत्रों के मुताबिक अगले महीने की शुरुआत से भारतीयों (Indians) की वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी और एक अनुमान के मुताबिक करीब एक महीने तक वापसी की प्रक्रिया चलेगी. सरकार के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी है.

खाड़ी के देशों से शुरुआत क्यों?
सूत्रों के मुताबिक खाड़ी के देशों से भारतीयों की वापसी की प्रक्रिया की शुरुआत करने की वजह ये है कि इन देशो में अधिक प्रवासी कामगार (Migrant Workers) रहते हैं और कंपनियों में काम बंद होने की वजह से इनकी स्थिति गंभीर है. इसके अलावा खाड़ी के देशों में भारतीय समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है और यहां से वापस आने वाले इच्छुक भारतीयों की संख्या भी ज्यादा है. यही वजह है कि खाड़ी के देशों से इस अभियान की शुरुआत की जा रही है. एक बार शुरुआत होने के बाद दूसरे देशों से भी भारतीयों को धीरे-धीरे वापस लाया जाएगा.
किन विमानों से होगी भारतीयों की वापसी?


ज्यादातर फंसे भारतीयों की वापसी स्पेशल विमान से ही होगी और शांतिकाल में भारत का ये सबसे बड़ा वापसी अभियान होगा. स्पेशल विमान के अलावा दूसरे देशों के जो विमान भारत में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए आ रहे हैं, इन विमानों से भी संबंधित देशों में फंसे भारतीयों की वापसी हो सकती है. इसके अलावा खाड़ी के देशों की कुछ कंपनियों ने अपने यहां काम करने वाले कर्मचारी और अधिकारियों को चार्टर्ड फ्लाइट से भी भेजने की पेशकश की है.

राज्यों से विदेश मंत्रालय की चर्चा
विदेश मंत्रालय ने राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों से चर्चा की शुरुआत कर दी है. राज्यों से चर्चा की जा रही है कि वापसी के बाद किस तरह की स्वास्थ्य संबंधी तैयारी की जाएगी. किस राज्य में कितने लोग आने के इच्छुक हैं.

राज्यों के आधार पर फंसे भारतीयों की मैपिंग
विदेशों में फंसे भारतीयों में वापसी के इच्छुक लोगों की संख्या का पता लगाने के साथ साथ भारतीय राज्यों के आधार पर भी इनकी मैपिंग हो रही है यानी ये किस राज्य से हैं. ताकि जब भारत इनकी वापसी हो तो इनके संबंधित राज्यों में इन्हें सीधे भेजा जा सके.

विदेश मंत्रालय फंसे भारतीयों की संख्या के मूल्यांकन में जुटा
विदेश मंत्रालय भी लगातार विदेशों में फंसे और वापसी के लिए इच्छुक भारतीयों की संख्या का मूल्यांकन कर रहा है. विदेश मंत्रालय लॉकडाउन के कुछ दिनों बाद ही भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों से जानकारी जुटा रहा है कि किस देश में कितने भारतीय ऐसे हैं जो भारत वापस आने को इच्छुक हैं. विदेशों में माइग्रेंट वर्कर के अलावा भारतीय छात्र, पर्यटक, शिपिंग क्रू के अलावा हर तरह के भारतीय शामिल हैं. फंसे भारतीयों की वापसी विदेश मंत्रालय की तरफ से जरूरतों और प्राथमिकता को ध्यान में रखकर की जाएगी. भारत सरकार को ये भी उम्मीद है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कॉमर्शियल फ्लाइट शुरू होने से भी बहुत भारतीयों को आने में सहूलियत मिल सकेगी.

प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री विदेशों में फंसे भारतीयों की ले चुके हैं सुध
एक तरफ जहां भारतीय दूतावास और उच्चायोग विदेशों में फंसे भारतीयों की संख्या का आकलन कर रहा है तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न राष्ट्रों के प्रमुखों से बातचीत और विदेश मंत्री इस जयशंकर अलग अलग राष्‍ट्रों के विदेश मंत्रियों से बातचीत में भारतीय समुदाय की सहूलियत और वेलफेयर को लेकर बात कर चुके हैं. दो दिन पहले ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों से बात की और भारतीय समुदाय का ख्याल रखने के लिए धन्यवाद दिया. माना जा रहा है कि इस बातचीत के दौरान भारतीयों की वापसी पर भी बातचीत हुई है.

कितने भारतीय विदेशों में
यूं तो विदेशों में एनआरआई और भारतीय मूल के लोगों की संख्या 2 करोड़ 80 लाख से अधिक है. इसमें एनआरआई की संख्या 1 करोड़ 25 लाख के करीब है. कितने भारतीय कोरोना वायरस कि वजह से भारत आने को इच्छुक हैं विदेश मंत्रालय आकलन कर रहा है. लेकिन एक बात तय है कि जो भी वापस आना चाहते हैं उनके लिए भारत सरकार हर सहूलियत देने की कोशिश करेगी.

शांतिकाल में सबसे बड़ा वापसी का अभियान
विदेशों से भारतीयों की वापसी पहले भी कराई जा चुकी है लेकिन युद्ध से अलग यानी शांतिकाल में भारत की तरफ से ये सबसे बड़ा वापसी का अभियान होगा. 1990 में जब कुवैत पर हमला किया गया तब 1 लाख 70 हज़ार भारतीयों को एयरलिफ्ट कराया गया जो दुनिया के बड़े वापसी अभियान में से एक माना जाता है.

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