सचिवालय में प्रवेश नहीं दिया गया तो वोटर कार्ड लौटा देंगे गुजरात के एक्टिविस्ट

गुजरात पुलिस पर ब्लैकलिस्ट बना कर SC/CT अधिकार कार्यकर्ताओं को रोकने का आरोप, राज्यपाल ने सीएम रुपाणी को लिखने का आश्वासन दिया

News18Hindi
Updated: September 7, 2018, 11:39 PM IST
सचिवालय में प्रवेश नहीं दिया गया तो वोटर कार्ड लौटा देंगे गुजरात के एक्टिविस्ट
राज्यपाल से मिलते SC/ST प्रतिनिधि
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Updated: September 7, 2018, 11:39 PM IST
गुजरात के 20 एससी-एसटी कार्यकर्ताओं के एक दल ने राज्य सचिवालय में प्रवेश पर रोक के विरोध में राज्यपाल ओ पी कोहली को ज्ञापन सौंपा. गुजारत पुलिस पर आरोप है कि उसने एक ब्लैकलिस्ट बना करके एससी-एसटी अधिकारों के लिए काम करने वाले इन कार्यकर्ताओं का सचिवालय में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है.

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इन एक्टिविस्ट्स में किरीट राठौड़, जिग्नेश मेवाणी के सहयोगी सुबोध परमार, सफाई कर्मचारियों के नेता विनूभाई झापरिया हैं. किरीट राठौड़ का कहना है कि इन लोगों ने राज्यपाल से मांग की कि दूसरे लोगों की तरह इन्हें भी सचिवालय में जाने आने के लोकतांत्रिक अधिकार दिलाए जाएं, क्योंकि ये लोग अधिकारों के लिए काम करने वाले हैं कोई अपराधी नहीं. उनके मुताबिक राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही इस बारे में मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को लिखेंगे.

किरीट राठौड़ ने ये भी कहा, “ हमने राज्यपाल को कह दिया कि अगर ये रोक नहीं हटाई गई तो हम लोग गांधी जयंती पर अहमदाबाद गांधी आश्रम में जमा होकर अपने वोटर कार्ड लौटा देंगे. क्योंकि हमारे वोटों से चुनी गई सरकार हमें ही सचिवालय में घुसने से रोक रही है. फिर इस मताधिकार का क्या अर्थ रह जाता है. अलोकतांत्रिक तरीके से हमारे अधिकार छीने जा रहे हैं.”

इन लोगों के मुताबिक 18 मई को जब ये लोग सचिवालय में गए तो इन्हें गेट पर बताया गया कि ये ब्लैकलिस्टेड हैं और इन्हे प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. इनका कहना है, “जब इस बारे में आरटीआई के जरिए इन लोगों ने जानकारी मांगी तो पुलिस की ओर से बताया गया कि मैंने 14 अप्रैल को आत्मदाह करने की घोषणा की थी, जबकि मैंने विरोध की बात कही थी, आत्मदाह की नहीं. फिर इस आधार पर मुझे हमेशा के लिए कैसे रोका जा सकता है?"

इस बारे में न्यूज 18 को पुलिस ने बताया था कि सचिवालय में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत मंत्रीगण बैठते हैं लिहाजा आत्मदाह करने वाले व्यक्ति को प्रवेश देने से उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है. हालांकि इन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार अलोकतांत्रिक तरीके से मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों को रोकना चाहती है.
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